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श्रावणी मेला 2023: श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर पूर्व रेलवे ने की घोषणा, ये स्पेशल ट्रेनें चलेंगी 17 जुलाई से

Updated at : 16 Jul 2023 4:17 PM (IST)
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श्रावणी मेला 2023: श्रद्धालुओं की भीड़ को लेकर पूर्व रेलवे ने की घोषणा, ये स्पेशल ट्रेनें चलेंगी 17 जुलाई से

पूर्व रेलवे ने श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त ट्रेनों समेत विशेष व्यवस्था की है. श्रावणी मेला के दौरान जसीडीह/देवघर और सुल्तानगंज में सुविधाओं और अन्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है.

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कोलकाता: श्रावणी मेले में तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पूर्व रेलवे ने श्रद्धालुओं को और सुविधाएं देने का निर्णय लिया है. इसके लिए अतिरिक्त ट्रेनों समेत अन्य विशेष व्यवस्थाएं की गयी हैं. पूर्व रेलवे की कोशिश है कि तीर्थयात्रियों को श्रावणी मेले में भीड़ से यात्रा में परेशानी नहीं हो. इसके लिए लंबी दूरी की कई ट्रेनों का जसीडीह और सुल्तानगंज स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव किया गया है. आपको बता दें कि लिए श्रावणी मेला अवधि के दौरान जसीडीह तक या जसीडीह और सुल्तानगंज से गुजरने वाली कुछ श्रावणी मेला विशेष ट्रेनों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है. अब श्रावणी मेले के दौरान तीर्थयात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को पूरा करने के लिए और अधिक ट्रेनों की घोषणा की गई है.

जसीडीह और सुल्तानगंज स्टेशनों पर कई ट्रेनों पर अतिरिक्त ठहराव

पूर्व रेलवे ने श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त ट्रेनों समेत विशेष व्यवस्था की है. श्रावणी मेला के दौरान जसीडीह/देवघर और सुल्तानगंज में सुविधाओं और अन्य सुविधाओं में वृद्धि हुई है. तीर्थयात्रियों की भीड़ को पूरा करने के लिए श्रावणी मेला अवधि के दौरान जसीडीह तक या जसीडीह और सुल्तानगंज से गुजरने वाली कुछ श्रावणी मेला विशेष ट्रेनों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है. इसके अलावा मेला अवधि के दौरान लंबी दूरी की कई ट्रेनें जसीडीह और सुल्तानगंज स्टेशनों पर अतिरिक्त ठहराव प्रदान कर रही हैं.

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रेलवे ने लिया अनारक्षित विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय

अब श्रावणी मेले के दौरान तीर्थयात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को पूरा करने के लिए और अधिक ट्रेनों की घोषणा की गई है. रेलवे ने सुल्तानगंज के रास्ते समस्तीपुर और भागलपुर के बीच तथा दानापुर और जसीडीह स्टेशनों के बीच अनारक्षित विशेष ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है.

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श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों का ये है टाइम टेबल

05574 समस्तीपुर-भागलपुर श्रावणी मेला स्पेशल दिनांक 17 जुलाई से 30 अगस्त (33 ट्रिप) के बीच प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को 14:30 बजे समस्तीपुर से प्रस्थान कर 19:50 बजे भागलपुर पहुंचेगी. उसी दिन और 05573 भागलपुर-समस्तीपुर श्रावणी मेला स्पेशल 17 जुलाई और 30 अगस्त (33 ट्रिप) के बीच प्रत्येक सोमवार, मंगलवार, बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को 21:00 बजे भागलपुर से रवाना होकर 02:30 बजे समस्तीपुर पहुंचेगी. फिर अगले दिन ट्रेन पूर्वी रेलवे प्रणाली पर सुल्तानगंज और मोंगहिर स्टेशनों पर रुकेगी.

श्रावणी मेला स्पेशल इन ट्रेनों का ये है टाइम टेबल

03244 दानापुर-जसीडीह श्रावणी मेला स्पेशल दिनांक 17.07.2023 और 29.08.2023 (20 ट्रिप) के बीच प्रत्येक रविवार, सोमवार, मंगलवार को दानापुर से 07:20 बजे प्रस्थान कर उसी दिन 12:55 बजे जसीडीह पहुंचेगी और 03243 जसीडीह-दानापुर श्रावणी मेला स्पेशल 17.07.2023 और 29.08.2023 (20 ट्रिप) के बीच प्रत्येक रविवार, सोमवार, मंगलवार को 14:30 बजे जसीडीह से रवाना होगी और उसी दिन 21:00 बजे दानापुर पहुंचेगी.

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक है बाबाधाम

झारखंड के देवघर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक है बाबाधाम. इसे मनोकामना लिंग भी कहते हैं. कहते हैं कि यहां आकर भक्त जो मांगता है, भगवान भोलेनाथ उसे जरूर पूरी करते हैं. देवघर में हर साल श्रावणी मेला लगता है, जो एक माह तक चलता है. देश भर से लाखों श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं. इस साल मलमास की वजह से श्रावण मेला दो माह का है. बाबाधाम की तरह दुमका स्थित बासुकीनाथ मंदिर भी प्रसिद्ध है. देवघर आने वाले श्रद्धालु बासुकीनाथ जरूर जाते हैं. बासुकीनाथ को फौजदारी बाबा भी कहा जाता है. देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम की तरह दुमका का बासुकीनाथ मंदिर भी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि बाबाधाम दीवानी न्यायालय है और बासुकीनाथ हाईकोर्ट. अगर बाबाधाम में आपकी मनोकामना पूरी नहीं होती, तो बासुकीनाथ में अर्जी लगानी पड़ती है. इसलिए कांवर लेकर देवघर आने वाले श्रद्धालु बासुकीनाथ की भी यात्रा जरूर करते हैं. वहां बाबा बासुकीनाथ और मां पार्वती को जलार्पण करने के बाद ही कांवर यात्रा पूरी मानी जाती है. बाबाधाम की तरह बासुकीनाथ धाम में श्रावणी मेला लगता है.

हर श्रद्धालु की मनोकामनाएं होती हैं पूरी

झारखंड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम द्वादश ज्योतिर्लिंगों में एक है. यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जो शक्तिपीठ भी है. यानि एकमात्र ऐसा धाम जहां शिव और शक्ति दोनों एक साथ विराजमान हैं. इसे शिव और शक्ति का मिलन स्थल भी कहा जाता है. कहते हैं कि बाबा धाम आने वाले भक्तों की सभी मन्नतें जरूर पूरी होती है. यहां मनोकामनाएं पूरी होने के कारण मंदिर में स्थापित शिवलिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है. सावन के महीने में बिहार के भागलपुर जिला में स्थित सुल्तानगंज की उत्तर वाहिनी गंगा से भक्त गंगाजल लेकर कांवर उठाते हैं और बोल बम, बोल बम करते हुए पैदल देवघर तक 107 किलोमीटर की कांवर यात्रा करके देवघर स्थित बाबाधाम में बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं. इस दौरान भक्त सात्विक भोजन करते हैं और दिन-रात बाबा की भक्ति में बिताते हैं. देवघर में हर साल एक महीने का श्रावणी मेला लगता है, जिसमें देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करने आते हैं. अधिकमास या मलमास होने पर श्रावणी मेला दो महीने का हो जाता है. इस साल भी मलमास के कारण श्रावणी मेला दो महीने तक चलेगा.

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