प्रचार में ‘कोरोना महामारी’ पर मारामारी, आज बढ़ते मामलों पर ‘आरोप’ की राजनीति, फेल हो गया सारा मैनेजमेंट?
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 27 Apr 2021 4:45 PM
Bengal Election 2021: इसे पश्चिम बंगाल की बेबसी ही कहिए कि कोरोना संकट में हर दूसरे टेस्ट के कोविड-19 पॉजिटिव होने की पुष्टि हो रही है. सिस्टम पर आरोप लगाने वालों के पास नेताओं की चुनावी रैलियों में उड़ती कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियों का कोई जवाब नहीं है. कोरोना संकट के जिम्मेदार नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बीच बंगाल चुनाव का आठवां और अंतिम फेज करीब आ गया है. पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को अंतिम फेज की वोटिंग होगी. इसके बाद 2 मई को रिजल्ट निकलने वाला है. इस बार ‘रिजल्ट डे’ पर ना तो जीत का जश्न मनाने की छूट होगी और ना ही हार पर मातम मनाने वालों को चिढ़ाने की इजाजत ही मिलेगी.
Bengal Election 2021: इसे पश्चिम बंगाल की बेबसी ही कहिए कि कोरोना संकट में हर दूसरे टेस्ट के कोविड-19 पॉजिटिव होने की पुष्टि हो रही है. सिस्टम पर आरोप लगाने वालों के पास नेताओं की चुनावी रैलियों में उड़ती कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियों का कोई जवाब नहीं है. कोरोना संकट में जिम्मेदार नेताओं के आरोप-प्रत्यारोप के बीच बंगाल चुनाव का आठवां और अंतिम फेज करीब आ गया है. पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को अंतिम फेज की वोटिंग होगी. इसके बाद 2 मई को रिजल्ट निकलने वाला है. इस बार ‘रिजल्ट डे’ पर ना तो जीत का जश्न मनाने की छूट होगी और ना ही हार पर मातम मनाने वालों को चिढ़ाने की इजाजत ही मिलेगी.
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चुनाव आयोग ने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलावा पांच राज्यों में 2 मई को चुनावी नतीजे निकलने के बाद किसी तरह के जश्न को बैन किया है. कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सभी पार्टियों को फैसले को मानने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. बंगाल में छठे चरण के बाद आयोग ने नई कोरोना गाइडलाइंस भी जारी की थी. बड़ा सवाल है आखिर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच राजनीतिक पार्टियां इतनी ढीली क्यों दिखी? आखिर क्यों नहीं किसी भी दल के नेता ने चुनावी मंच से लोगों से कोरोना गाइडलाइंस मानने की अपील की?
बंगाल में पहले चरण की वोटिंग 27 मार्च को हुई. लेकिन, बंगाल में सियासी संग्राम पिछले साल नवंबर से ही शुरू हो गया था. नवंबर 2020 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में चुनावी सभा के दौरान केंद्र सरकार के कोरोना मैनेजमेंट की तारीफ की थी. इस साल फरवरी में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनावी मंच से कोरोना संकट से निपटने के लिए मोदी सरकार की खूब तारीफ भी की थी. खुद पीएम मोदी ने बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान कोरोना संकट में भेजी गई राशि को हड़पने का आरोप ममता सरकार पर लगाया था. उन्होंने केंद्र सरकार के कोरोना संकट में उठाए गए प्रभावी कदमों का भी खूब जिक्र किया था. लेकिन, सभी राजनीतिक दलों ने महामारी पर चुनाव प्रचार के दौरान मारामारी की. सभी ने सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप ही लगाए.
बीजेपी नेताओं पर बंगाल में कोरोना संक्रमण फैलाने का आरोप लगाने वाली टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनावी मंच से भयावह होते कोरोना संक्रमण के आंकड़ो को गंभीरता से नहीं लिया. कभी ममता बनर्जी बीजेपी नेताओं पर कोरोना संक्रमण फैलाने का आरोप लगाती दिखी, तो कभी ऑक्सीजन और रेमेडिसीवर दवाई देने में भेदभाव का आरोप लगाती रहीं. एक दिन पहले ममता बनर्जी ने कोलकाता में अधिकारियों के साथ बैठक के बाद दावा किया कि राज्य में ऑक्सीजन की किल्लत नहीं है. इसके बावजूद उनका बीजेपी नेताओं पर आरोप बरकरार है. कहने का मतलब है कि जनता को सुविधाएं देने की बजाय नेताओं ने महज आरोप ही लगाए हैं.
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पिछले चौबीस घंटे में पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के 16 हजार मामले मिले हैं. 24 घंटे में लिए गए सैंपल में करीब आधे कोरोना संक्रमित हैं. बंगाल में कोरोना संक्रमण से मरने वालों की संख्या 11,000 को पार कर चुकी है. जबकि, राज्य भर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या 95,000 को पार कर चुकी है. यहां बताना सही होगा कि राज्य में मार्च महीने तक एक्टिव केस की संख्या महज 3,000 थी. अप्रैल के आखिरी सप्ताह में एक्टिव केस की संख्या 95,000 तक पहुंच चुकी है. हालांकि, कोरोना के संक्रमण के बढ़ने की बहुत बड़ी वजह चुनावी रैलियों में मौजूद भीड़ को कहा जा सकता है. टीएमसी बीजेपी पर आरोप लगा रही है तो बीजेपी के नेता कोरोना ठीक करने के उपाय बता रहे हैं. सवाल इतना है क्या सिर्फ जनता गाइडलाइंस माने?
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