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पंचायत चुनाव : भाजपा बंगाल के लोगों से ले रही है बदला, बोले राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी

Updated at : 07 Jul 2023 11:10 AM (IST)
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पंचायत चुनाव : भाजपा बंगाल के लोगों से ले रही है बदला, बोले राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी

बंगाल में केंद्रीय योजनाओं को लेकर अब तक सेंट्रल फोर्स की 186 कंपनियां आयी हैं, लेकिन अभी तक खामियां ढूंढ़ नहीं पायी हैं. पंचायत चुनाव में हर बूथ के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बल लगाइए, यह तृणमूल के लिए अच्छा ही होगा .

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पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव को लेकर आठ जुलाई को मतदान होगा. सांसद व तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को हराने में नाकाम रहने पर भाजपा बंगाल के लोगों से बदला ले रही है. राज्य में हुए गत विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था. यही वजह है कि भाजपा नीत केंद्र सरकार प्रतिशोध की राजनीति कर रही है. यदि ऐसा नहीं होता, तो 100 दिनों रोजगार गारंटी योजना समेत कुछ अन्य केंद्रीय योजनाओं के फंड बंगाल को गत दो वर्षों में क्यों नहीं दिये गये हैं.

केन्द्र ने अब तक बकाये का भुगतान नहीं किया

बंगाल को बकाये के तौर पर करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये दिये जाने हैं, लेकिन केंद्र सरकार नहीं दे रही है. श्री बनर्जी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को बंगाल से 2,60,000 करोड़ जीएसटी के तौर पर मिला है, जबकि अलग-अलग मदों में 3,20,000 करोड़ की राशि मिली है, जबकि उन्होंने (केंद्र सरकार ने) विभिन्न मदों में बंगाल को दी जाने वाली धनराशि रोक रखी है. भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा परियोजना पर 20,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन उसने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत पश्चिम बंगाल को मिलने वाले 7,500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान नहीं किया है, जिसकी मदद से राज्य के लाखों लोगों को काम दिया जा सकता था.

अभिषेक बनर्जी का चैलेंज केंद्रीय एजेंसियों से नहीं डरते हम

श्री बनर्जी ने भाजपा को चैलेंज करते हुए यह भी कहा कि ‘‘आप (भाजपा नीत केंद्र सरकार) सीबीआइ (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) और इडी (प्रवर्तन निदेशालय) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को हमारे (तृणमूल नेताओं के) पीछे लगाना जारी रख सकते हैं, लेकिन हम बाहरी लोगों के सामने सिर नहीं झुकाएंगे, जिन्हें बंगाल के लोगों के जीवन की जरा-भी परवाह नहीं है. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन मुद्दों को लेकर बड़ी सादगी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अन्य मंत्रियों से सौजन्य साक्षात्कार कर चुकी हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. बंगाल में केंद्रीय योजनाओं को लेकर अब तक सेंट्रल फोर्स की 186 कंपनियां आयी हैं, लेकिन अभी तक खामियां ढूंढ़ नहीं पायी हैं.

वंशवाद की राजनीति समाप्त करने के लिए विधेयक लाये केंद्र

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी का कहना है कि अगर भाजपा नीत केंद्र सरकार वंशवाद की राजनीति समाप्त करने के लिए विधेयक लाती है, तो वह उसका समर्थन करने वाले पहले व्यक्ति होंगे. भाजपा अकसर दावा करती है कि वंशवाद की राजनीति लोकतंत्र की सबसे ”बड़ी दुश्मन” है. ऐसे में केंद्र सरकार विधेयक तो लाये. वह इसका समर्थन करेंगे और अपने पद से इस्तीफा भी देंगे.

अमेरिका से सेना ले आइये, फर्क नहीं पड़ेगा

पंचायत चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर श्री बनर्जी ने कहा कि हर बूथ के बाहर केंद्रीय सुरक्षा बल लगाइए, यह तृणमूल के लिए अच्छा ही होगा, क्योंकि जिन-जिन चुनावों में केंद्रीय बल के जवान लगाये गये तृणमूल चुनाव जीती है. चाहें, तो अमेरिका से सेना ले आया जाये, कोई फर्क नहीं पड़ेगा. बंगाल में पंचायत चुनाव में अब तक इतने लोगों ने कभी नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है. चुनाव के लिए 2.36 लाख नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं, जिनमें 1.56 लाख नामांकन पत्र केवल विपक्षी दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के हैं.

भाजपा नेता भाषण देते हैं काम नहीं करते

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार व दिलीप घोष बड़े-बड़े दावे कर चुके हैं. उन्हें मैं चैलेंज करता हूं कि तीनों में से एक मेरे साथ बैठकर चर्चा करे कि गत दो वर्षों में कब 100 दिन के पैसे, आवास योजना के पैसे बंगाल को दिये गये हैं? यह मान भी लिया जाये कि 10 हजार लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हो सकते हैं. लेकिन उनकी सजा क्या 10 हजार करोड़ लोगों को दी जायेगी. यदि किसी विधायक पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, तो क्या विधानसभा ही बंद कर देनी चाहिए. बकाये राशि के भुगतान की मांग पर हम जल्द ही बड़े आंदोलन की तरफ जा रहे हैं, अब नयी दिल्ली में बंगाल के लोग आंदोलन कर अपना हक लेंगे.

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Shinki Singh

लेखक के बारे में

By Shinki Singh

10 साल से ज्यादा के पत्रकारिता अनुभव के साथ मैंने अपने करियर की शुरुआत Sanmarg से की जहां 7 साल तक फील्ड रिपोर्टिंग, डेस्क की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ महिलाओं से जुड़े मुद्दों और राजनीति पर लगातार लिखा. इस दौरान मुझे एंकरिंग और वीडियो एडिटिंग का भी अच्छा अनुभव मिला. बाद में प्रभात खबर से जुड़ने के बाद मेरा फोकस हार्ड न्यूज पर ज्यादा रहा. वहीं लाइफस्टाइल जर्नलिज्म में भी काम करने का मौका मिला और यह मेरे लिये काफी दिलचस्प है. मैं हर खबर के साथ कुछ नया सीखने और खुद को लगातार बेहतर बनाने में यकीन रखती हूं.

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