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विधवाओं की जिंदगी अब भी है बेरंग, ये है इनके लिए कुछ सरकारी योजनाएं

Updated at : 26 Sep 2019 8:11 AM (IST)
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विधवाओं की जिंदगी अब भी है बेरंग, ये है इनके लिए कुछ सरकारी योजनाएं

वर्ष 2015 में दुनियाभर में विधवाओं की संख्या करीब 26 करोड़ आंकी गयी थी. इस संख्या में लगातार बढ़त का अनुमान है. वर्ष 2010 और 2015 के बीच हिंसा और बीमारियों से हुई मौतों ने विधवाओं की संख्या में नौ प्रतिशत की वृद्धि की थी. वैश्विक स्तर पर हर सात में से एक विधवा बेहद […]

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वर्ष 2015 में दुनियाभर में विधवाओं की संख्या करीब 26 करोड़ आंकी गयी थी. इस संख्या में लगातार बढ़त का अनुमान है. वर्ष 2010 और 2015 के बीच हिंसा और बीमारियों से हुई मौतों ने विधवाओं की संख्या में नौ प्रतिशत की वृद्धि की थी. वैश्विक स्तर पर हर सात में से एक विधवा बेहद गरीबी में जीने के मजबूर है और इनकी कुल संख्या 3.80 करोड़ से अधिक है. शादी की उम्र की हर 10 महिला में से एक विधवा है.
एक तिहाई विधवाएं भारत और चीन में हैं तथा सबसे अधिक विधवाएं भारत में वास करती हैं. इनकी संख्या 4.60 करोड़ से अधिक है. ऐसी विधवाओं की संख्या भी बड़ी है, जो बचपन में ही विधवा हो गयीं. इससे स्पष्ट है कि दुनिया के बहुत से विकासशील और गरीब देशों में बाल विवाह की प्रथा धड़ल्ले से जारी है तथा बच्चियों की शादी अक्सर उम्रदराज लोगों से कर दी जाती है.
विश्व विधवा रिपोर्ट, 2015 के अनुसार, भारत उन देशों में शामिल है, जहां विधवाओं के साथ अच्छा व्यवहार बहुत कम होता है तथा उनकी देखभाल ठीक से नहीं की जाती है. हमारे देश में मात्र 18 प्रतिशत विधवाओं की बहुत अच्छी देखभाल होती है तथा 24 प्रतिशत की देखभाल का स्तर संतोषजनक है. विधवाओं में 24 प्रतिशत और 11 प्रतिशत की देखभाल न के बराबर या बहुत कम होती है.
विधवाओं के लिए सरकारी योजनाएं
विधवाओं के उत्थान के लिए केंद्र व राज्य सरकारें समय-समय पर नयी-नयी योजनाएं बनाती रहती हैं. कई राज्यों ने जहां विधवाओं के पुनर्विवाह की योजना बनायी है, वहीं कई राज्यों में उन्हें पेंशन और उनकी बेटी की शादी के लिए सहायता की योजना है. मनरेगा के तहत, विधवा महिलाओं की पहचान के भी विशेष प्रावधान किये गये हैं. विधवाओं के कल्याण से संबंधित अनेक योजनाओं को राज्य सरकारों/ केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से केंद्र सरकार ने लागू किया है.
विधवाओं के लिए घर : 1,000 लोगों के रहने की क्षमता वाले एक घर का निर्माण वृंदावन में किया गया है ताकि विधवाओं को सुरक्षित ठिकाना, स्वास्थ्य सेवाएं, पौष्टिक आहार और परामर्श सेवाएं मुहैया करायी जा सकें.स्वाधार गृह योजना : कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के लिए महिला एंव बाल विकास मंत्रालयद्वारा स्वाधार गृह योजना शुरू की गयी है, ताकि ऐसीमहिलाएं अपना जीवन सम्मान और विश्वास के साथ जीसकें.
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना : ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू इस योजना के तहत विधवाओं को पेंशन देने का प्रावधान है.
नारी शक्ति सशक्तिकरण योजना : इस योजना के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय विधवाओं के आय सृजन में मदद करता है.
पूर्व सैनिकों की विधवाओं के व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए सहायता : इस योजना के तहत रक्षा मंत्रालय पूर्व सैनिकों की विधवाओं के व्यावसायिक प्रशिक्षण, गैर पेंशनभोगी पूर्व सैनिकों / विधवाओं की गंभीर बीमारियों के उपचार और बेटी के विवाह/विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है.
आर्थिक स्थिति को लेकर आंकड़ों का अभाव
पति की मृत्यु के बाद एक पत्नी जिन समस्याओं से गुजरती है, लोगों को उसकी बहुत कम समझ है. उनकी समस्याओं को समझने और स्थिति में सुधार के लिए सामान्य योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं. दूसरे, विधवाओं की आर्थिक स्थिति को लेकर हमारे यहां आंकड़ों का अभाव है.
आंकड़े उपलब्ध होने पर ही सर्वाधिक कमजोर और हाशिये पर रहनेवाले समूहों की पहचान हो सकती है. जनगणना के माध्यम से विधवाओं की संख्या का पता तो चल जाता है, लेकिन उनकी स्थिति, सामाजिक सुरक्षा और सशक्तिकरण से संबंधित अन्य प्रावधानों तक पहुंच के लिए जिन चुनौतियां का वे सामना करती हैं, उसके संबंध में कोई विश्वसनीय विश्लेषणात्मक अध्ययन उपलब्ध नहीं है.
इस तरह के आंकड़ों के अभाव में, विधवाओं को लेकर सरकार का जो वर्तमान विश्लेषण है वह जनगणना के आंकड़े,(जो जनसांख्यिकीय प्रकृति का है) मौजूदा सरकारी योजनाओं, विधवाओं के लिए कार्यक्रमों और विधायी हस्तक्षेप पर ही आधारित है.
विधवाओं को कानून का समर्थन
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 के तहत अगर कोई विधवा महिला पुन: विवाह करती थीं, तो उसे मृत पति (उसके द्वारा अर्जित या संयुक्त परिवार की संपत्ति) की संपत्ति में अपने अधिकार को छोड़ना होगा. नतीजतन, इस कानून का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ.
कई हिंदू परिवार की विधवाओं को दोबारा विवाह करने की वजह से संपत्ति से अधिकार छिन गया. इस कानून की कई खामियों को दूर करने के लिए हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम, 1937 लाया गया. इस कानून के तहत सिंगल रह रही विधवाओं को पारिवारिक संपत्ति में अधिकार दिया गया. हालांकि, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और हिंदू विवाह अधिनियम 1956 द्वारा महिलाओं को संपत्ति में कानूनी अधिकार दिये गये.
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