ePaper

लोकनायक का अद्वितीय चरित्र माखनचोर श्रीकृष्ण

Updated at : 24 Aug 2019 7:10 AM (IST)
विज्ञापन
लोकनायक का अद्वितीय चरित्र माखनचोर श्रीकृष्ण

डॉ केशव आनंद दास (एमबीबीएस बीजे मेडिकल कॉलेज पुणे) प्रचारक-सह निदेशक, भक्ति वेदांत गुरुकुल विद्याभवन, इस्कॉन, सिल्ली जन्माष्टमी यानी कृष्ण का जन्म. वह कृष्ण जो सार्वभौमिक हैं, वह जो बिना किसी तैयारी के गीता के 700 श्लोक सुनाते हैं, वह कृष्ण जो सदियों से विद्वानों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. भारतीय पुराणों […]

विज्ञापन
डॉ केशव आनंद दास
(एमबीबीएस बीजे मेडिकल कॉलेज पुणे)
प्रचारक-सह निदेशक, भक्ति वेदांत गुरुकुल विद्याभवन, इस्कॉन, सिल्ली
जन्माष्टमी यानी कृष्ण का जन्म. वह कृष्ण जो सार्वभौमिक हैं, वह जो बिना किसी तैयारी के गीता के 700 श्लोक सुनाते हैं, वह कृष्ण जो सदियों से विद्वानों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं.
भारतीय पुराणों में कृष्ण एक ऐसा व्यक्तित्व है, जिसकी तुलना किसी अवतार से नहीं की जा सकती. उनके जीवन की प्रत्येक लीला में, घटना में एक ऐसा विरोधाभास दिखता है, जो साधारणत: समझ में नहीं आता. और यही विलक्षणता है उनके जीवन चरित की या संभवत: जीवन दर्शन की भी.
ज्ञानी-ध्यानी जिन्हें खोजते हुए हार जाते हैं, जो न ब्रह्म में मिलते हैं, न पुराणों में और न वेद की ऋचाओं में. वह मिलते हैं ब्रजभूमि की किसी कुंज-निकुंज में राधारानी के पैरों को दबाते हुए- यह कृष्ण के चरित्र की विलक्षणता ही तो है कि वे अजन्मा होकर भी पृथ्वी पर जन्म लेते हैं. सर्व शक्तिमान होने पर भी जन्म लेते हैं कंस के बंदीगृह में. उनके पिता हैं वसुदेव और माता देवकी, किंतु नंदबाबा और यशोदा द्वारा पालन किये जाने के कारण उनके पुत्र कहलाये जाते हैं.
समस्त सृष्टि को बंधन में रखने की क्षमता रखने पर भी सहज खल से बंध जाते हैं. द्वारकाधीश होने पर भी श्रीकृष्ण अपने निर्धन मित्र सुदामा को नहीं भूलते. अश्रुपूरित नेत्रों से वे सुदामा का आलिंगन करते हैं. उन्हें बस एक सामान्य मित्र ही रहने देते हैं.
ब्रजवासियों को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए कंस का वध किया, न कि सत्ता प्राप्ति के लिए. इसलिए कंस का संहार करके भी उन्होंने कंस के पिता उग्रसेन को ही सिंहासन पर बैठाया. एक ओर श्री कृष्ण बांसुरी बजाकर ब्रज गोपिकाओं के चीर चुराते, रास रचाते हैं, दूसरी ओर कुरुक्षेत्र में सारथी बनकर युद्ध नीति का निर्देशन किया. गीता के रूप में उन्होंने जो उपदेश दिये, उसने उन्हें योगिराज की महत्ता प्रदान की.
पौराणिक एवं धार्मिक क्षेत्र में श्रीकृष्ण की अवतार के रूप में मान्यता है, किंतु भगवान के रूप में कृष्ण जन-जन के जितना निकट हैं, उतना कोई भी दूसरा अवतार नहीं.
ब्रज के ग्वाल-बाल के साथ उनका सखा भाव है, तो ब्रज-गोपिकाओं के साथ अनन्य प्रीति. श्री कृष्ण का चरित्र एक लोकनायक का चरित्र है. वे माखन-चोर हैं, गोपी-बल्लभ हैं और द्वारकाधीश भी, किंतु कभी उन्हें राजा राम की भांति ‘राजा कृष्ण’ के रूप में संबोधित नहीं करते.
श्री कृष्ण के विलक्षण व्यक्तित्व का एक पक्ष यह भी है, जहां उन्होंने दुष्टों के संहार के लिए हाथ में सुदर्शन चक्र लिया, वहीं माधुर्य और प्रीति की रस वर्षा के लिए अधरों पर बांसुरी रखी. उनके इन अन्यान्य अद्भुत गुणों ने ही उन्हें जाति, संप्रदाय, भाषा और संस्कृति से बहुत ऊपर उठा कर न केवल भारतीय संस्कृति का अपितु विश्व संस्कृति का प्रिय चरित्र बना दिया.
इसलिए कृष्ण की भक्ति की अनेक धाराएं लोक जीवन से निकलीं, अनेक संप्रदाय बने. यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन भक्ति संप्रदायों का फैलाव हुआ. इस्कॉन के संस्थापक व भक्ति वेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद जी ने विभिन्न पाश्चात्य देशों में घूमते हुए श्रीकृष्ण के संदेशों से एक ऐसी लहर बनायी कि चरित्रवान नवयुवकों की एक पूरी नयी पीढ़ी तैयार हो गयी. आज करीब पचास करोड़ घरों में कृष्ण का संदेश गीता के रूप में पहुंच चुका है.
कृष्ण के व्यक्तित्व से वह विविधता, सर्वप्रियता, सखाभाव और दो अतिरेकों के बीच समन्वय जैसा गुण हम क्यों नहीं सीखते? उन्होंने तत्कालीन मानव जाति के कल्याण के साथ लोक-कल्याण की अनुकरणीय परंपराओं का शुभारंभ भी किया. आज उन्हीं संदेशों, परंपराओं, लोक भावनाओं का मनोहारी पर्व दुनिया के कोने-कोने में मनाया जा रहा है.
हे बृज में आनंद भयो, जय यशोदा लाल की। नन्द के आनंद भयो,
जय कन्हैया लाल की॥
कृष्ण का एक नाम है ‘सत्कृति’
पुराणों में भगवान श्रीकृष्ण के 108 नाम बताये गये हैं. इनमें एक नाम है ‘सत्कृति’. सत्कृति का अर्थ है- जो अपने भक्त के निर्याण (शरीर त्यागने के) समय में उसकी सहायता करते हैं. वराह पुराण में भगवान श्रीहरि कहते हैं-
वातादि दोषेण मद्भक्तों मां न च स्मरेत्।
अहं स्मरामि मद्भक्तं नयामि परमां गतिम्।।
अर्थात्; यदि वातादि दोष के कारण मृत्यु के समय मेरा भक्त मेरा स्मरण नहीं कर पाता, तो मैं उसका स्मरण कर उसे परम गति प्राप्त करवाता हूं.
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे।।
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola