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पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाये भारत

Updated at : 21 Jul 2019 6:14 AM (IST)
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पाकिस्तान पर दबाव बढ़ाये भारत

शशांक पूर्व विदेश सचिव भारत और पाकिस्तान की कानूनी व्यवस्थाएं मुख्य रूप से ब्रिटिश सिविल कोड और ब्रिटिश कॉमन कोड से प्रभावित रही हैं. हालांकि, इसमें अब बहुत सी चीजों में बदलाव आ चुके हैं. कुलभूषण जाधव का मामला कोर्ट के जरिये तय होना चाहिए, न कि सैन्य कोर्ट के जरिये. क्योंकि यह मामला सैन्य […]

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शशांक

पूर्व विदेश सचिव

भारत और पाकिस्तान की कानूनी व्यवस्थाएं मुख्य रूप से ब्रिटिश सिविल कोड और ब्रिटिश कॉमन कोड से प्रभावित रही हैं. हालांकि, इसमें अब बहुत सी चीजों में बदलाव आ चुके हैं. कुलभूषण जाधव का मामला कोर्ट के जरिये तय होना चाहिए, न कि सैन्य कोर्ट के जरिये. क्योंकि यह मामला सैन्य कोर्ट का नहीं है.

लेकिन पाकिस्तान ने जाधव को सैन्य कोर्ट के तहत फांसी की सजा सुना दी, जिस पर अंतरराष्ट्रीय अदालत (आइसीजे) ने रोक लगा दी है. अब भारत को कोशिश यह करनी चाहिए कि मामले को पाकिस्तान की सैन्य अदालत में न चलने दे. इसके लिए जितनी भी लीगल जरूरतें हों, भारत को चाहिए कि उन सबकी तैयारी करके अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में अर्जी दे, ताकि आइसीजे सही निर्णय ले सके. पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक देश है और वहां सैन्य सरकार नहीं है, इसलिए कुलभूषण जाधव के मामले पर वहां की सैन्य अदालत कोई फैसला नहीं ले सकती. इस बात का जबर्दस्त विरोध भारत को करना चाहिए. यह पाकिस्तान की लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने आप को सैन्य सरकार का रूप न दे. भारत को चाहिए कि तमाम सबूतों और कानूनी दस्तावेजों के साथ मजबूती से आइसीजे में अपनी बात रखे, ताकि पाकिस्तान पर दबाव बन सके.

भारत सहित पाकिस्तान भी कॉमनवेल्थ का सदस्य है. अगर पाकिस्तान नहीं मानता है, तो भारत को यह कोशिश भी करनी चाहिए कि वह पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ से बाहर निकाले जाने की बात रखे.

एक बार बहुत पहले भारत ने पाकिस्तान को कॉमनवेल्थ से निकलवा दिया था, जब पाकिस्तान में सैन्य सरकार बन गयी थी. इस बार भी इस पूरे मामले का अध्ययन करके कि पाकिस्तान इस वक्त जो कर रहा है, वह पूरी तरह से सैन्य सरकार का ही स्वरूप है, इसलिए उसे कॉमनवेल्थ से बाहर किया जाना चाहिए. ऐसा करके भारत उस पर दबाव बना सकता है.

यह एक अच्छा मौका है, जब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाना बहुत जरूरी हो गया है. बीते दिनों हाफिज सईद की गिरफ्तारी से लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि पाकिस्तान दबाव में आकर ऐसी कार्रवाइयां कर रहा है. लेकिन मुझे लगता है कि यह कुछ खास नहीं है. क्योंकि इसमें राजनीति है. इमरान जल्दी ही अमेरिका जानेवाले हैं, इसलिए यह कार्रवाई की गयी, ताकि अमेरिका से वे यह कह सकें कि पाकिस्तान आतंक पर सख्ती बरत रहा है. लेकिन, जब तक वहां के सारे आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध रूपी कार्रवाइयां नहीं होती हैं, तब तक नहीं माना जायेगा कि पाकिस्तान कार्रवाई कर रहा है. ऐसा तभी संभव है, जब वहां की सरकार में सेना का दखल नहीं होगा. अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ (एफएटीएफ) ने आतंकी गुटों के धन मिलने पर रोक न लगा पाने की वजह से पाकिस्तान को निगरानी सूची में डाला हुआ है. एफएटीएफ भी सख्त कार्रवाई कर सकता है.

पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि आइसीजे में उसकी जीत हुई है और वह लगातार यह कहता रहा है कि जाधव के साथ वह जो कर रहा है, सही है. दूसरी बात यह है कि वहां कहने को लोकतांत्रिक सरकार है, लेकिन सेना ही सरकार चला रही है. इसलिए इस वक्त भारत को कानूनी, राजनयिक और कूटनीतिक, हर संभव कोशिश करनी चाहिए कि वह पाकिस्तान के इस दोहरे चरित्र को बेनकाब करे और जाधव को छुड़ा कर अपने देश वापस ले आये.

भारत की आशंका : वियना संधि के तहत पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मुहैया कराने के लिए बाध्य है. लेकिन भारत आशंकित है कि अगर जाधव के साथ भारतीय कॉन्सुलरों की मुलाकात के दौरान पाक अधिकारी भी मौजूद रहे तो सही जानकारी नहीं मिल पायेगी. गोपनीय मुलाकात में ही भारतीय अधिकारी कुलभूषण जाधव से केस से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जुटा पायेंगे.

गोपनीय मुलाकात में ही वे जान पायेंगे कि पाकिस्तान ने किस तरह जाधव को गिरफ्तार किया, कस्टडी के दौरान उनके साथ कैसा व्यवहार किया गया, किन परिस्थितियों में उनके कबूलनामे वाले वीडियो बनाये गये. नियमों के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारी मुलाकात के दौरान कमरे से बाहर नहीं जायेंगे. वहीं, पाकिस्तान के पूर्व रिकॉर्ड को देख कर भी ऐसा नहीं लग रहा है कि भारतीय कॉन्सुलरों को जाधव से अकेले में मुलाकात का मौका मिल पायेगा.

पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया

कुलभूषण जाधव मामले में आइसीजे के फैसले के बाद भले ही पाकिस्तान की विश्वमंच पर फजीहत हो रही हो, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया ने इसे पाकिस्तान सरकार की बड़ी जीत बताया है. पाकिस्तानी मीडिया की प्रतिक्रिया भारतीय मीडिया के ठीक उलट है.

पाकिस्तान टुडे : ‘आइसीजे ने कुलभूषण जाधव को बरी किये जाने की भारत की याचिका खारिज कर दी’ शीर्षक के साथ पाकिस्तान टुडे ने लिखा है कि जा‌धव मामले में पाकिस्तानी कार्रवाई और मृत्युदंड वियना समझौते का उल्लंघन नहीं है. साथ ही लिखा है कि अदालत ने भारत की मांग की खारिज कर दी है.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून : कुलभूषण जाधव मामले पर इस वेबसाइट पर कुल आठ स्टोरी हैं. होमपेज की स्टोरी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भारत की सभी उम्मीदें धराशायी कर दी.’ पाकिस्तान आर्मी के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर के हवाले से एक्सप्रेस ट्रिब्यून लिखता है कि यह फैसला पाकिस्तानी सैन्य अदालत की कार्रवाई को सत्यापित करता है.

पाक डेली : पाक डेली लिखता है कि कुलभूषण जाधव पर आइसीजे का फैसला उनकी रिहाई या पुनर्विचार को मंजूरी नहीं देता. आइसीजे ने कहा कि कॉन्सुलर रिलेशन पर वियना समझौते के अनुच्छेद-36 का पाकिस्तान ने उल्लंघन किया है.

डॉन : जाधव मामले को डॉन ने अपने समाचारों में प्रमुखता से उठाया है. डॉन लिखता है कि जाधव की वापसी और कॉन्सुलर एक्सेस की भारत की याचिका को आइसीजे ने खारिज कर दिया है. डॉन ने इस फैसले को पाकिस्तान की जीत करार दिया है. साथ ही डॉन ने जाधव पर आइसीजे के फैसले को पांच बिंदुओं पर विश्लेषण के साथ समझाया है.

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