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विश्व वयस्क दिवस: भारत में बढ़ती बेरोजगारी व युवा वर्ग एक गंभीर समस्या

Updated at : 18 Nov 2018 9:08 AM (IST)
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विश्व वयस्क दिवस: भारत में बढ़ती बेरोजगारी व युवा वर्ग एक गंभीर समस्या

रिपोर्टों के अनुसार हर दिन 26 युवा खुदकुशी के काल में समाए जा रहे हैंबेरोजगारों की संख्या 2019 में 1. 89 करोड़ बढ़ने का अनुमानविभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की आवश्यकता संजय सागर भारत युवाओं का देश है। विश्व में भारत एक ऐसा देश है, जहां युवाओं की संख्या अधिक है. इसीलिए […]

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रिपोर्टों के अनुसार हर दिन 26 युवा खुदकुशी के काल में समाए जा रहे हैं
बेरोजगारों की संख्या 2019 में 1. 89 करोड़ बढ़ने का अनुमान
विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने की आवश्यकता

संजय सागर

भारत युवाओं का देश है। विश्व में भारत एक ऐसा देश है, जहां युवाओं की संख्या अधिक है. इसीलिए यहां नारा लगाया जाता है युवा शक्ति राष्ट्र ,शक्ति ।लेकिन बेरोजगारी की आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो युवा शक्ति काफी कमजोर नजर आता है. जिस युवा शक्ति के बलबूते हम अनेकों सपने बुनते हैं. वह सपने बेरोजगारी के आलम में टूटते नजर आते हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रतिदिन 26 युवा खुद को काल के गाल में झोंक रहे हैं और इस संताप की स्थिति का जन्म छात्र बेरोजगारी की गंभीर समस्या के कारण हुआ है. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन, भारत सरकार और विभिन्न एजेंसियों के ताजा सर्वेक्षण और रपट इस ओर इशारा करते हैं कि देश में बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ा है.

आईएलओ ने जो अनुमान लगाया है, वह मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी है. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2018 में भारत में बेरोजगारों की संख्या 1.86 करोड़ रहने का अनुमान है. साथ ही इस संख्या के अगले साल, यानी 2019 में 1.89 करोड़ तक बढ़ जाने का अनुमान लगाया गया है. आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे ज्यादा बेरोजगारों का देश बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय देश की 11 फीसदी आबादी बेरोजगार है. यह वे लोग हैं जो काम करने लायक हैं, लेकिन उनके पास रोजगार नहीं है. इस प्रतिशत को अगर संख्या में देखें, तो पता चलता है कि देश के लगभग 12 करोड़ लोग बेराजगार हैं. इसके अलावा बीते साढ़े तीन साल में बेरोजगारी की दर में जबरदस्त इजाफा हुआ है. यह तो कहना है, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन यानी आईएलओ की रिपोर्ट का. वहीं मोदी सरकार के श्रम मंत्रालय के श्रम ब्यूरो के सर्वे से भी सामने आया है कि बेरोजगारी दर पिछले पांच साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है.

केंद्रीय श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार हर रोज 550 नौकरियां कम हुई हैं और स्वरोजगार के मौके घटे हैं. इन सारी कवायदों के बीच जो आंकड़े आमने आए हैं, उनसे पता चलता है कि रोजगार के मुद्दे पर देश के हालात बहुत खराब हैं. हाल ही में आई अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि साल 2019 आते-आते देश के तीन चैथाई कर्मचारियों और प्रोफेशनल्स पर नौकरी का खतरा मंडराने लगेगा या फिर उन्हें उनकी काबिलियत के मुताबिक काम नहीं मिलेगा.

सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती बेरोजगारी

रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में भारत में जो करीब 53.4 करोड़ काम करने वाले लोग हैं उनमें से करीब 39.8 करोड़ लोगों को उनकी योग्यता के हिसाब से न तो काम मिलेगा, न नौकरी. इसके अलावा इन पर नौकरी जाने का खतरा भी मंडरा रहा है. वैसे तो 2017-19 के बीच बेरोजगारी की दर 3.5 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है, लेकिन 15 से 24 साल के आयुवर्ग में यह प्रतिशत बहुत ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक 2017 में 15 से 24 आयु वर्ग वाले युवाओं का बेरोजगारी प्रतिशत 10.5 फीसदी था, जो 2019 आते-आते 10.7 फीसदी पर पहुंच सकता है. महिलाओं के मोर्चे पर तो हालत और खराब है. रिपोर्ट कहती है कि बीते चार साल में महिलाओं की बेरोजगारी दर 8.7 तक पहुंच गई है. भारत में शिक्षित एवं अशिक्षित बेरोजगारी की समस्या सुरसा के मुंह की तरह विकराल रूप धारण करती जा रही है. और इस सुरसा के मुंह में हमारे युवा वर्ग समाए समाए जा रहे हैं.

सरकारी क्षेत्र में रोजगार हासिल करने के लिए बेरोजगार युवाओं को आज कितनी मशक्कत करनी पड़ रही है, यह बात किसी से छिपी नहीं है. लाखों बेरोजगार युवाओं को आवेदन करने के एवज में आवश्यकता से अधिक आवेदन राशि देनी पड़ रही है. आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए इस बेरोजगार युग में रुपए जुटाना कोई आसान काम नहीं है. सरकार द्वारा की जाने वाली भर्तियों में पदों की संख्या बेरोजगारों की भीड़ को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान होती है. इसके बावजूद लाखों युवाओं द्वारा दिया गया आवेदन शुल्क सरकार के खजाने में जमा हो जाता है। लेकिन रोजगार कसरत नहीं बढ़ाया जा रहा है.

रोजगार श्रोत की आवश्यकता
भारत सरकार को देश के सेवा क्षेत्र में नए प्रयोग करने के साथ-साथ उसमें विस्तार करने की जरूरत है, ताकि नए पद सृजित किए जा सकें. नए सरकारी पद सृजित होंगे तो युवाओं को रोजगार मिलेगा. इससे देश की विकास दर रफ्तार पकड़ेगी. अर्थव्यवस्था में वृद्धि होगी. आज कृषि, प्रशासन, बैंक, बीमा, चिकित्सा, शिक्षा, रक्षा, साइबर सुरक्षा, तकनीकी और अनुसंधान क्षेत्रों में नए पदों पर भर्तियों की आवश्यकता है.

बेरोजगारी का फायदा उठा रहे हैं बहुराष्ट्रीय कंपनियां

भारत में बेरोजगारी की संख्या को देखते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनी इसके लाभ उठाने में लगी है कम पैसे में अधिक काम कराना बहुराष्ट्रीय कंपनी के आदत स होते जा रहे हैं. इसलिए बेरोजगारों के सामने मरता क्या नहीं करता वाली परिस्थिति उत्पन्न हो गई है. मोदी सरकार ने बेरोजगारी को दूर करने को लेकर कौशल विकास के वादे किए हैं. इस वादे में युवा वर्ग अब तक आशा के दृष्टिकोण से टकटकी लगाए हुए हैं कि अब देखना है इस कौशल विकास से कितनी बेरोजगारी दूर होगी बेरोजगार युवा कौशल विकास और अन्य नियुक्तियों आस लगाए बैठे हैं. अनुमानत: भारत में प्रतिदिन 400 नए रोजगारों का सृजन किया जाता है. यह हमारी बेलगाम रफ्तार से बढ़ती आबादी के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरा के समान है. भारत में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए योजनाओं के स्रोत को सृजन किया जाए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए. व में रिक्त पदों को भरा जाए. प्रखंड मुख्यालयों एवं पंचायतों में रिक्त पदों को भरा जाए ,कृषि क्षेत्र में जुड़े युवाओं को प्रोत्साहन दिया जाए. शिक्षा विभाग में राइट एजुकेशन के तहत छात्र अनुपात में शिक्षकों की नियुक्त किया जाए. तभी हमारी बेरोजगारी दूर हो सकती है.

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