विश्व की अन्य संस्कृतियों में भी हैं प्रकाश पर्व

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Nov 2018 5:47 AM

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थाईलैंड का लोई क्रतोंग पर्व लोई क्रतोंग या यी पेंग थाईलैंड में हर साल नवंबर महीने में मनाया जाता है. ‘लोई’ का मतलब तैरने के लिए होता है और क्रतोंग केले द्वारा बनाये गये कमल के आकार का पात्र होता है. पारंपरिक थाई चंद्रमा संबंधी कैलेंडर के अनुसार, लोई क्रतोंग त्योहार साल के बारहवे महीने […]

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थाईलैंड का लोई क्रतोंग पर्व
लोई क्रतोंग या यी पेंग थाईलैंड में हर साल नवंबर महीने में मनाया जाता है. ‘लोई’ का मतलब तैरने के लिए होता है और क्रतोंग केले द्वारा बनाये गये कमल के आकार का पात्र होता है.
पारंपरिक थाई चंद्रमा संबंधी कैलेंडर के अनुसार, लोई क्रतोंग त्योहार साल के बारहवे महीने में पूर्णिमा के दिन होता है़ इस दिन लोग इकट्ठे हो कर पास की नदी पर जाते हैं और मोमबत्ती व अगरबत्ती जलाकर, फूल और सिक्कों से क्रतोंग को सजाकर जल देवी की पूजा करने के लिए बहाते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं. इसके अलावा, लाना शैली के आकाश लालटेन (खोम फाई) भी हवा में छोड़े जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि क्रतोंग बुरे भाग्य और समय को अपने साथ बहाकर ले जाता है और इससे स्थानीय लोगों को मुसीबतों से छुटकारा मिलता है.
कोबे लुमिनरी, जापान
जापान में हर वर्ष कोबे लुमिनरी प्रकाश-पर्व मनाया जाता है. वर्ष 1995 में कोबे शहर में भयानक भूकंप आया था. भूकंप के केंद्र के निकट होने के कारण, कोबे शहर के बुनियादी ढांचे और स्थानीय जीवन पर विनाशकारी असर पड़ा था.
भूकंप के कारण शहर में बिजली आपूर्ति ठप्प हो गयी थी और कुछ दिनों तक शहर अंधेरे से घिरा रहा था. उसके बाद, घनघोर निराशा में घिरे लोगों में जिजीविषा पैदा करने और शहर में उम्मीद की किरण लाने के लिए कोबे लुमिनरी त्योहार की शुरुआत की गयी थी. इसके लिए इटली सरकार ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रिक लाइट्स आदि दान किये थे. त्योहार की अत्यधिक लोकप्रियता के बाद, अब यह हर साल आयोजित किया जाता है. प्रत्येक वर्ष इस भव्य त्योहार को देखने के लिए दुनिया भर से तीन मिलियन से ज्यादा लोग कोबे आते हैं.
अप हेली आ, स्कॉटलैंड
स्कॉटलैंड के ‘अप हेली आ’ फायर फेस्टिवल (अग्नि उत्सव) में लोग, टार के जलते बैरल द्वारा यूल के मौसम के अंत को चिह्नित करते हैं, जिसे ज्यादातर लोग क्रिसमस सीजन के रूप में जानते हैं. यद्यपि ‘टार बैरलिंग’ की इस लेरविक परंपरा को वर्ष 1884 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन आज भी मशाल जलाने और जुलूस निकालने की परंपरा है.
इस त्योहार को मध्य जनवरी के आसपास मनाया जाता है, जिसमें हजारों पुरुष और युवा लड़के सक्रियता से भागीदारी करते हैं. वाइकिंग योद्धाओं की तरह कपड़े पहने पुरुषों के इस समूह को ‘जार्ल स्क्वाॅड (समूह)’ कहा जाता है. जुलूस एक वाइकिंग या गैले की प्रतिकृति में मशालों के फेंकने के साथ समाप्त होता है. मार्च पूरा हो जाने के बाद और गैले को आग लगने के बाद, जार्ल स्क्वाॅड स्थानीय स्कूलों, होटलों और हॉलों की मेजबानी करते हैं तथा पार्टियों में प्रत्येक टीम थियेटर, गायन या नृत्य जैसी गतिविधियों में शामिल होती है ताकि सभी का मनोरंजन किया जा सके.
यहूदियों का हनुका पर्व
हनुका 164-165 ईसा पूर्व में ग्रीक शासकों से यहूदियों के हुए युद्ध में यहूदियों की जीत के उपलक्ष्य में मनाये जानेवाला पर्व है. एक मिथक भी हनुका से जुड़ा हुआ है.
माना जाता है कि जब यहूदियों की जीत हुई थी, तब हारे सीरियाई लोगों द्वारा टेंपल में जलाया गयी मोमबत्ती, एक दिन के लिए जलाने के लिए रखे जैतून के तेल से चमत्कारिक रूप से आठ दिनों तक जलती रही थी. इसलिए, हनुका यहूदियों (इस्राइल तथा प्रवासियों के बीच) के बीच आठ दिनों तक मनाया जाता है. इसमें, नवंबर के अंतिम दिनों से दिसंबर तक, आठ दिन हर शाम मोमबत्तियां जलायी जाती हैं. हनुका पर्व दुनिया को संप्रभुता का संदेश देता है.
हॉलैंड का सेंट मार्टिन दिवस
सेंट मार्टिन दिवस प्रकाश पर्व हर साल 11 नवंबर को हॉलैंड में मनाया जाता है. इस त्योहार में बच्चे लालटेन जलाकर घर-घर जाते हैं और गाने गाते हैं. पारंपरिक तौर पर ‘माय बोनी लाइज ओवर दी ओसियन’ नामक गीत इस दिन गाया जाता है, जिसमें सेंट मार्टिन की दयालुता का बखान किया जाता है.
मान्यता है कि चौथी सदी में मार्टिन नामक एक रोमन सिपाही था, जो बाद में संत बन गया था. उन्होंने बर्फीली तूफानों से भरी एक रात, बेघर इंसान को अपना लबादा फाड़कर पहना दिया था. उस रात ईसा मसीह वह फाड़कर दिया गया आधा लबादा पहनकर उनके सपने में आये थे और उन्होंने कहा था कि आज तुमने मुझे अपना आधा लबादा पहनाया है. इसके बाद मार्टिन को सेंट मार्टिन के तौर पर माना जाने लगा. सेंट मार्टिन को दयालुता और अनजान लोगों के प्रति भी मदद की भावना रखने के लिए याद किया जाता है.
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