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सरदार वल्लभ भाई पटेल पर विशेष : दुनिया में सबसे ‘बड़े’ हैं हमारे लौह पुरुष, जानें उनकी राजनीतिक जीवन सफर के बारे में

Updated at : 31 Oct 2018 6:36 AM (IST)
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सरदार वल्लभ भाई पटेल पर विशेष : दुनिया में सबसे ‘बड़े’ हैं हमारे लौह पुरुष, जानें उनकी राजनीतिक जीवन सफर के बारे में

प्रधानमंत्री आज ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है. 153 मीटर ऊंची चीन की स्प्रिंग बुद्ध मूर्ति और 93 मीटर ऊंची न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी इसके सामने काफी छोटी है. इसके आसपास टूरिस्ट स्पॉट बनाया जा रहा है. मूर्ति से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक टेंट […]

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प्रधानमंत्री आज ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ राष्ट्र को समर्पित करेंगे. यह विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है. 153 मीटर ऊंची चीन की स्प्रिंग बुद्ध मूर्ति और 93 मीटर ऊंची न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी इसके सामने काफी छोटी है. इसके आसपास टूरिस्ट स्पॉट बनाया जा रहा है.

मूर्ति से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक टेंट सिटी बनी है, जहां आप रातभर रुक सकते हैं. मूर्ति में लेजर लाइटिंग लगेगी. इसके नीचे एक म्यूजियम है. मूर्ति में दो लिफ्ट लगी हैं, जो प्रतिमा के सीने तक जायेंगी. वहां से आप गैलरी और बाहरी नजारे देख सकेंगे. इस नजारे का दीदार करने के लिए 350 रुपये देने होंगे. एंट्री शुल्क बच्चों के लिए 60 रुपये और बड़ों के लिए 120 रुपये है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरदार वल्लभ भाई पटेल को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट सम्मान देने की मुहिम आज पूरी हो रही है. भारतीय राजनीति के लौहपुरुष सरदार पटेल के कद के ही माफिक विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को गुजरात के राजपिपला के पास नर्मदा नदी के द्वीप ‘साधु बेत’ पर बनाया गया है. सरदार पटेल के देश की 565 रियासतों को एकता के सूत्र में िपरोने के कारण प्रतिमा का नाम स्टैच्यू ऑफ यूनिटी रखा गया है. बांध से लगभग 3.2 किमी दूर बनायी गयी इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है. अगर समुद्र तल से इसकी ऊंचाई की बात करें, तो यह करीब 235 मीटर ऊंची है. इसे बनाने में करीब 3400 मजदूर और 250 इंजीनियर लगे.
यह स्मारक 216 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा, तीव्र कंपन और भूकंप में भी खड़ा रह सकता है. 153 मीटर की ऊंचाई पर करीब 200 लोगों की क्षमता वाली एक व्यूइंग गैलरी भी है, जहां से बांध और आसपास का नजारा देखा जा सकेगा. 2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्मारक का निर्माण कराने की घोषणा की थी. निर्माण कार्य का दायित्व लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को दिया गया. लगभग 42 महीनों में प्रतिमा बन कर तैयार हुई थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से चार महीने का अतिरिक्त समय लगगया. सरकार ने इसकी लागत का आकलन लगभग 3001 करोड़ रुपया किया, लेकिन एलएंडटी ने 2989 करोड़ रुपये में ही इसका काम पूरा किया.
60 मंजिली इमारत जितनी ऊंची है प्रतिमा, आठ फीट का है कोट का बटन
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अपने आप में अनूठी है. सरदार पटेल की यह प्रतिमा करीब 60 मंजिल ऊंची इमारत जितनी ऊंची है. मूर्ति के होंठ छह फीट के इंसान के कद से भी बड़े हैं. आंखें और जैकेट के बटन का व्यास लगभग आठ फीट है. चेहरा 70 फीट का है, जो सात मंजिली इमारत के बराबर है.
नरेंद्र मोदी ने इस स्मारक की आधारशिला 31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी थी. नरेंद्र मोदी उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे. प्रतिमा बनाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट बनाया गया. किसानों से उनके इस्तेमाल हो चुके लोहे के औजारों से तीन महीने में लगभग 5000 मीट्रिक टन लोहा इकट्ठा किया गया.
अमेरिकी आर्किटेक्ट ने सुझाया था राम सुतार का नाम
पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को हू-ब-हू सरदार पटेल का लुक देने के लिए अमेरिका से लेकर चीन तक के शिल्पकारों ने खूब मशक्कत की. मूर्ति के शुरुआती मॉडल और चीन में इसके निर्माण के दौरान पूरी देखरेख का जिम्मा भारत के सुप्रसिद्ध शिल्पकार नोएडा के पद्म भूषण राम सुतार (93) के जिम्मे रहा. खास बात यह कि मूर्ति के निर्माण में सहयोग देने के लिए राम सुतार का नाम अमेरिकी आर्किटेक्ट ने सुझाया था. राम सुतार को काम मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले तीन फुट का मॉडल बनाया. इसके बाद 18 फीट का मॉडल बनाया गया. 18 फीट के मॉडल को पीएम मोदी ने भी देखा था. उन्होंने कई महापुरुषों की भी विशाल मूर्तियां बनायीं हैं.
17 किमी लंबी फूलों की घाटी भी
स्टैच्यू में प्रवेश करते ही लॉबी में एक म्यूजियम और ऑडियो-विजुअल गैलरी होगी. इसमें सरदार पटेल की जिंदगी और गुजरात के ट्राइबल कल्चर पर 15 मिनट का प्रेजेंटेशन होगा. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 19700 वर्ग किलोमीटर में फैली एक परियोजना का हिस्सा है. इसमें करीब 17 किलोमीटर लंबी फूलों की घाटी भी शामिल है. स्टैच्यू से इस घाटी को देखा जा सकेगा. यहां से सरदार सरोवर बांध, फ्लॉवर वैली, विंध्यांचल और सतपुड़ा पर्वतमाला के नजारे तथा एमपी, गुजरात और महाराष्ट्र के मिलने वाले प्वॉइंट भी देखे जा सकेंगे. अगर स्टैच्यू के अंदर से डेक व्यू, वैली आॅफ फ्लॉवर, मेमोरियल, म्यूजियम, आॅडियो—विजुअल गैलरी विजिट करने के साथ साइट और बांध विजिट करना चाहते हैं, तो मात्र 350 रुपये का टिकट लेना होगा. इसमें बस चार्ज भी शामिल है.
सरदार पटेल के राजनीतिक जीवन का सफर
1917 : पहली बार गांधीजी के सीधा संपर्क में आये.
1921 : गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पहले अध्यक्ष बने.
1922 : दंडात्मक कर ‘हदीया’ को समाप्त करवाया. गांधी ने ‘किंग ऑफ बोरसाद’ कहा.
1923 : अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष निर्वाचित हुए.
1928 : खेड़ा जिले में सत्याग्रह अभियान का सफल नेतृत्व किया. किसानों ने इनको सरदार की उपाधि दी. कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस उपाधि को सार्वजानिक मान्यता प्रदान की गयी.
1931 : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता की.
1932 : सविनय अवज्ञा आंदोलन में गांधीजी के साथ यरवदा जेल में रहे.
1935 : 1935 से 1942 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संसदीय बोर्ड के चेयरमैन रहे.
1946 : अंतरिम सरकार में गृह, सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने.
1947 : स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री बने.
1949 : नेहरू की यूएस, यूके और कनाडा की यात्रा के दौरान सफलतापूर्वक पीएम की जिम्मेदारी संभाली.
1950 : 15 दिसंबर को बंबई में निधन.
सरदार पटेल के निधन के 41 वर्ष बाद उन्हें 1991 में भारत के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया. यह अवार्ड उनके पौत्र विपिनभाई पटेल द्वारा स्वीकार किया गया.
565 देसी रियासतों का करवाया विलय
आजादी के समय भारत में कुल 565 रियासतें थीं. कई महाराजा और नवाब दौलत और सत्ता के नशे में थे. पटेल ने उनसे देशभक्ति का आह्वान किया. उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया की अलग राज्य का उनका सपना असंभव है और भारतीय गणतंत्र का हिस्सा बनने में ही उनकी भलाई है. इसके बाद उन्होंने महान बुद्धिमत्ता और राजनीतिक दूरदर्शिता के साथ छोटी रियासतों को संगठित किया.
लौह पुरुष की प्रतिमा भी उन्हीं के समान है अटल और अडिग
80 फीट है प्रतिमा के पैरों की लंबाई, जबकि हाथ 70 फीट लंबे हैं
140 फीट है कंधों की चौड़ाई, वहीं चेहरे की ऊंचाई सात मंजिली इमारत के बराबर है
3.2 किमी दूर बनायी गयी है सरदार सरोवर बांध से, 182 मीटर यानी 597 फीट है प्रतिमा की ऊंचाई
235 मीटर है समुद्र-तल से इसकी ऊंचाई
70000 टन सीमेंट और
22500 टन तांबे का हुआ है इस्तेमाल
550 पैनल में लगी हैं पीतल की प्लेटें, 3400 मजदूरों ने किया काम
250 इंजीनियरों ने संभाला था मोर्चा
216 किमी/घंटे रफ्तार की हवा, तीव्र कंपन व भूकंप में भी खड़ी रहेगी प्रतिमा
200 लोगों की क्षमता वाली, 153 मीटर की ऊंचाई पर व्यूइंग गैलरी
प्रतिमा के अंदर सीने की ऊंचाई पर एक दर्शक दीर्घा (व्यूइंग गैलरी) है. इसमें खिड़कियां हैं. इनकी मदद से डैम व आसपास का मनोरम नजारा देखा जा सकेगा.
46 महीने में पूरा हुआ काम
2989 करोड़ रुपया आयी है लागत
मूर्ति की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके जैकेट में टंगे बटन का व्यास ही ढाई मीटर से ज्यादा है.
182 मीटर ऊंचाईके पीछे का राज
इस विशाल प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है. इसकी वजह यह है कि गुजरात विधानसभा की कुल सीटें 182 हैं.
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