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यह कैसी रेल, सुरक्षा के इंतजाम फेल

Updated at : 22 Sep 2018 10:21 AM (IST)
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यह कैसी रेल, सुरक्षा के इंतजाम फेल

-स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रही रेल पुलिस रेलवे का सफर अब सुहाना नहीं रहा. तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में वारदातों पर लगाम नहीं लग पा रही है. अपराधियों को ट्रेनों को निशाना बनाना ज्यादा आसान लगता है. तभी तो चलती ट्रेनों को ताबड़तोड़ टारगेट किया जा रहा है. बीते दिनों भारत […]

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-स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रही रेल पुलिस

रेलवे का सफर अब सुहाना नहीं रहा. तमाम कोशिशों के बावजूद ट्रेनों में वारदातों पर लगाम नहीं लग पा रही है. अपराधियों को ट्रेनों को निशाना बनाना ज्यादा आसान लगता है. तभी तो चलती ट्रेनों को ताबड़तोड़ टारगेट किया जा रहा है. बीते दिनों भारत बंद वाले दिन 10 सितंबर को डकैतों ने कोसी सुपर एक्सप्रेस को निशाना बनाया. दो दर्जन हथियारबंद डकैतों ने रात में पटना सिटी के दीदारगंज ओवरब्रिज के पास धावा बोला था.

करीब आधा घंटा तक ट्रेन पर डकैतों का कब्जा रहा. उन्होंने न सिर्फ यात्रियों को लूटा, बल्कि कई को लहूलुहान भी कर दिया. हालांकि, त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तारियां भी की हैं. परंतु यह नाकाफी है. इस तरह की घटनाएं खूब हो रही हैं. सुरक्षित यात्रा की गारंटी नहीं है. घटना को होने से ही रोकना होगा. इसके लिए ठोस रणनीति बनानी होगी. पर्याप्त फोर्स को लगाना होगा.

ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो और वह किसी भी ट्रेन को निशाना बनाने से पहले सौ बार सोचें. पिछले कुछ सालों में वारदातों पर लगाम की भरसक कोशिश रेल पुलिस ने भी की है. परंतु संसाधनों के अभाव में ये कोशिशें नाकाफी ही साबित हुई हैं. प्रस्तुत है ट्रेनों की सुरक्षा व रेल पुलिस की ओर से किये गये इंतजामों की पड़ताल करती संवाददाता राजेश कुमार सिंह की यह रिपोर्ट.

भगवान भरोसे 102 ट्रेनों के रेल यात्री

हर विभाग की तरह रेल पुलिस भी स्टाफ की कमी की दंश झेल रही है. यही वजह है कि पटना रेल परिक्षेत्र में 102 ट्रेनें बिना किसी सुरक्षाकर्मी के ही दौड़ती हैं. ऐसे में इन ट्रेनों को निशाना बनाना बहुत ही आसान हो जाता है. यात्रियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है. स्टाफ की इस कदर कमी है कि अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. 394 ट्रेनों में ही फोर्स चलती है. सूत्रों की मानें तो करीब 800 सिपाही और 140 हवलदार के पद खाली हैं. ऐसा ही हाल, अधिकारियों के पदों का है. हालांकि, पदों को जल्दी ही भरने का दावा किया जा रहा है. परंतु, व्यावहारिक तौर पर यह इतना आसान नहीं है. यह सब जानते हैं. फिर भी हम उम्मीद तो कर ही सकते हैं.

रेल पुलिस के लिए कम नहीं हैं चुनौतियां
रेल यात्रियों के लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करना इतना आसान नहीं है. स्टाफ की कमी तो है ही, बिहार का बड़ा हिस्सा नक्सलग्रस्त है. इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फोर्स की जरूरत पड़ती है. दो-चार फोर्स देकर ट्रेन की सुरक्षा की कल्पना बेमानी है. सूत्रों ने बताया कि नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में आर्म्ड स्क्वायड पर रोक थी. अब शुरू हुआ है. रेलवे से संबंधित पूरा क्षेत्र, प्लेटफाॅर्म और ट्रेनों की सुरक्षा का जिम्मा रेल पुलिस के जिम्मे है. इन स्थानों पर भी फोकस करना पड़ता है. इसके अलावा, ट्रेनों की भी जिम्मेदारी है. चलती ट्रेन में अपराध होने पर जीआरपी को ही देखना पड़ता है. इसके अलावा, ट्रेन से किसी के कटने पर अप्राकृति मौत का मामला दर्ज करने से लेकर ट्रैक पर या किनारे मिलने वाले शवों में भी विवेचना रेल पुलिस को ही करनी पड़ती है. आये दिन बंद का आह्वान होता है. इस दौरान प्रदर्शनकारियों का टारगेट ट्रेनें ही होती हैं. इसके अलावा, रेल भर्ती को लेकर भी तमाम जगह ट्रेनों को रोका जाता है, ट्रैक बाधित किया जाता है. पर्याप्त बल हो तो यह ज्यादा मुश्किल नहीं है, परंतु फोर्स की कमी के कारण तमाम परेशानियां खड़ी होती हैं.

कुछ प्रमुख घटनाएं

26 जून को 18: किऊल-झाझा रेल खंड पर कुंदर हॉल्ट के पास पटना-हटिया पाटलिपुत्र एक्सप्रेस में लूटपाट, अपराधियों ने 40 मिनट तक ट्रेन खड़ी कर मचाया तांडव

वर्ष 2005: अपराधियों ने किऊल-झाझा रेलखंड पर दादपुर हाल्ट केबिन मास्टर केशो यादव की नृशंस हत्या.

11 अक्तूबर, 2009: किऊल-झाझा रेलखंड पर तुलसीटाड़ हाल्ट के पास जनता एक्सप्रेस में लूटपाट एवं एक रेलयात्री को जख्मी किया.

26 दिसंबर, 2009: किऊल-झाझा रेलखंड पर 13005 अप पंजाब मेल को भी लुटेरों ने निशाना बनाया था. लाहाबन स्टेशन के पास ही लुटेरों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन रोकी और लूटपाट की.

24 जुलाई, 2010: किऊल-झाझा रेलखंड पर लहावन के पास पाटलीपुत्रा एक्सप्रेस में लूटपाट.

2 अगस्त, 2010: किऊल-झाझा रेलखंड पर लहावन हाल्ट के पास हावड़ा-अमृतसर में लूटपाट व एक यात्री की गोली मारकर हत्या.

25 फरवरी, 2014: किऊल-झाझा रेलखंड पर तुलसीटांड हाल्ट के पास ही चेन पुलिंग कर अमृतसर-हावड़ा पंजाब मेल एक्सप्रेस को एक घंटे तक रोककर लूटपाट की गयी.

24 मार्च, 2012: किऊल-झाझा रेलखंड पर दादपुर हाल्ट पर खड़ी 3186 डाउन गंगासागर एक्सप्रेस के दर्जनों रेलयात्रियों से हजारों की लूटपाट.

29 मार्च, 2012: किऊल-झाझा रेलखंड पर अपराधियों ने दादपुर केबिन मास्टर को बंधक बना तीन घंटा रेल परिचालन बंद रखा.

16 जुलाई, 2014: किऊल-झाझा रेलखंड पर बड़हिया के पास 18182 डाउन टाटा-छपरा एक्सप्रेस एवं मौर्य एक्सप्रेस में लूटपाट.

7 अगस्त, 2014: पूर्वांचल एक्सप्रेस के दो एसी बागी में लाखों की लूट एवं एक आरपीएफ एएसआई सहित दो यात्रियों को अपराधियों ने घायल कर दिया.

13 मार्च, 2017: चौरा हाल्ट के पास मंसूबे में असफल रहने पर रेल यात्रियों से लूटपाट की.

नक्सल प्रभावित रेल खंड: पटना रेल जिले में पटना-गया रेल खंड, गया-कोडरमा
रेलखंड, गया-सहरसा रेल खंड और जमालपुर रेल जिले में मोकामा-झाझा रेल खंड, किऊल-जमालपुर रेलखंड नक्सल प्रभावित हैं. इसलिए इन रेल खंडों पर ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत होती है.

ये हैं संवेदनशील रूट

रेल पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो कुछ ऐसे रूट हैं, जहां घटनाएं ज्यादा होती हैं. इसको लेकर रेल पुलिस की तरफ से भी सतर्कता बरती जाती है. पटना रेल जिले में पटना-हाथीदह, बख्तियारपुर-राजगीर रेल खंड, मुजफ्फरपुर रेल जिले में मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज, समस्तीपुर-बरौली रेल खंड, कटिहार रेल जिले में बरौनी-किऊल और जमालपुर रेल जिले में किऊल-जसीडीह और किऊल-भागलपुर रेल खंड पर ज्यादा वारदातें होती हैं.

अपील
-अपर पुलिस महानिदेशक, रेलवे, आलोक राज की अपील : ट्रेन में सफर के दौरान अनजान व्यक्ति द्वारा दिये गये खाद्य पदार्थ न खाएं. सावधान रहें. अनजान व्यक्ति से ट्रेन में ज्यादा घुले-मिले नहीं. किसी भी समस्या के लिए जीआरपी का 1512 और आरपीएफ का 182 नंबर डायल करें.
-अधिकतर घटनाओं में अपराधियों की गिरफ्तारियां हुई हैं. अधिकतर कांडों का पर्दाफाश किया जा चुका है. डकैती-लूट जैसी गंभीर वारदातों में अभियुक्तों को गिरफ्तार कर चार्जशीट तक दाखिल कर दी गयी है. लूट का सामान भी बरामद किया गया है. हां, चलती ट्रेनों में सुरक्षा के लिए और पुख्ता कदम उठाने की जरूरत है. जो ट्रेनें बिना मार्ग रक्षण के चल रही हैं, उनको फोकस किया गया है. ऐसी ट्रेनों में जीआरपी व आरपीएफ संयुक्त रूप से अभियान छेड़ेगी. निगरानी की जायेगी.

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