15 अगस्त में दिखेंगी दिल्ली की रक्षा कवच ''''स्पेशल 36''''

15 अगस्त को देश अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने जा रहा है. 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह और 36 महिलाओं की एक स्पेशल टीम, जिसे हम ‘स्पेशल 36’ भी कह सकते हैं. यह टीम है देश की पहली महिला स्वात कमांडो टीम. इस टीम को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा […]
15 अगस्त को देश अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाने जा रहा है. 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह और 36 महिलाओं की एक स्पेशल टीम, जिसे हम ‘स्पेशल 36’ भी कह सकते हैं. यह टीम है देश की पहली महिला स्वात कमांडो टीम. इस टीम को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गयी है.
देश की आधी आबादी के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या होगी कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार किसी प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए महिला टीम को तैनात किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस टीम में देश के उत्तर-पूर्व की महिलाओं का ही चयन किया गया है. दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रमोद कुशवाहा ने इनके लिए कहा है, ‘कुछ कौशल पर बहुत बेहतर’ और ‘मजबूत भी.’
स्वात यानी स्पेशल विपंस एंड टैक्टिक्स, जिसे पहले स्पेशल विपंस अटैक टीम कहा गया था
जमाना बदल रहा है. कल तक पुरुष जहां महिलाओं की सुरक्षा और इज्जत का खास ख्याल रख रहे थे, अब महिलाएं पुरुषों की सुरक्षा में लगायी जा रही हैं. वह भी वीवीआइपी सुरक्षा में. 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब लाल किले से जनता को संबोधित कर रहे होंगे तो इन्हीं महिलाओं की टीम पर उनकी सुरक्षा का जिम्मा होगा.
महिला कमांडो की टीम को सेंट्रल और साउथ दिल्ली की लोकेशन पर तैनात किया जायेगा. इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, महिला फिदायीन राजधानी पर हमले की तैयारी कर रही हैं. अब, जब हमला महिला फिदायीन की ओर से होने की रिपोर्ट मिली है तो काट भी महिलाओं के पास ही होना चाहिए. इसी सोच को ध्यान में रखा दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने.
बनी महिलाओं की स्वात टीम
दिल्ली पुलिस ने इसके लिए एक योजना बनायी. सबसे पहले शुरू हुई स्पेशल 36 की खोज. देश के उत्तर-पूर्वी भाग में यह खोज पूरी हुई. पहली महिला स्वात टीम में 36 महिला सदस्य हैं. इनमें से सबसे ज्यादा 13 महिला कमांडो असम से, पांच अरुणाचल प्रदेश से, पांच मणिपुर से, पांच सिक्किम से, चार मेघालय से, दो नगालैंड से, एक मिजोरम से और एक त्रिपुरा से हैं.
15 महीने की कड़ी ट्रेनिंग
भारत में पहली बार देश की सुरक्षा के लिए स्वतंत्रता दिवस देश के मौके पर महिला कमांडो टीम का गठन किया गया है. इस खास काम के लिए इन्हें करीब 15 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी गयी. देश-विदेश के जाने-माने एक्सपर्ट्स ने इस टीम को ट्रेनिंग दी है. इनमें तीन महीने की ट्रेनिंग स्वात एक्सपर्ट द्वारा दी गयी है.
कम्यूनिकेशन में दिक्कत ने हो इसके लिए टीम में एक इंस्ट्रक्टर भी रखा गया है. आधुनिक हथियार चलाने सिखाये गये. आतंकवादियों से निबटने की परिस्थितियों के बारे में बताया गया. ट्रेनिंग के दौरान महिला दस्ते को बम डिफ्यूज करना, इमारतों पर चढ़ना और बंधकों को छुड़ाना सिखाया गया है. खास बात यह है कि इस दस्ते ने 10 अगस्त, 2018 से अपना काम शुरू भी कर दिया है.
चार तरह के हथियार और 10 उपकरणों से लैस है स्वात टीम
एमपी 5 सबमशीन गन
एके-47 राइफल
जीलॉक 17 पिस्टल
जीलॉक 26 पिस्टल
36 कांस्टेबल्स की स्वात टीम में ये हैं-
टीम लीडर01
इंफॉरमेशन स्पेशलिस्ट01
रेकी ऑफिसर02
शार्प शूटर02
सपोर्ट ऑफिसर30
उपकरण
ग्रेनेड किट
वायरलेस सेट
20 मीटर नाइलॉन रस्सी
बुलेटप्रूफ जैकेट
बुलेटप्रूफ हेलमेट
कटर
पेंसिल टॉर्च
कमांडो डैगर
स्पेशल नी पैड
स्पेशल एल्बो पैड
ट्रेनिंग
पुरुष कमांडो को 12 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है. वहीं, महिला स्वात टीम को 15 महीने की ट्रेनिंग दी गयी है. इसमें तीन महीने की ट्रेनिंग स्वात एक्सपर्ट द्वारा दी गयी है. 12 महीने की कमांडो ट्रेनिंग झारौदा कलां और स्वात ट्रेनिंग एनएसजी के मानेसर स्थित सेंटर पर दी गयी है.
टीम को इस्राइली ‘कर्व मागा’ की ट्रेनिंग दी गयी है. इस्राइल के सुरक्षा बलों द्वारा संचालित सैन्य आत्मरक्षा तकनीक को ही कर्व मागा कहते हैं. इसमें पूर्ण दक्षता हासिल करने के बाद ही इन्हें स्वात टीम में शामिल किया गया है.
टीम को बगैर हथियार के मुकाबले, दुश्मन पर हमला, हमले से बचाव, जंगल में ऑपरेशन, शहरी ऑपरेशन जैसे बिल्डिंग पर चढ़ना, बस, मेट्रो आदि में रेस्क्यू ऑपरेशन और वीवीआइपी सुरक्षा में महारथ हासिल है.विस्फोटकों की जानकारी के अलावा आइइडी इस्तेमाल के बारे में भी इस टीम को बताया गया है.
गृह मंत्री राजनाथ ने की तैनाती
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस स्पेशल महिला कमांडो टीम को दिल्ली की सुरक्षा में तैनात करते हुए कहा कि 2008 में हुए मुंबई हमले के बाद भारत में स्वात टीम की जरूरत महसूस पड़ रही थी जिसके चलते दिल्ली पुलिस को यह बड़ा काम सौंपा गया. दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रमोद कुशवाहा ने कहा कि इन महिलाओं ने स्वात में सिर्फ पुरुषों के होने के वर्चस्व को तोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि लोगों को आमतौर पर इस तरह गलतफहमियां रहती है कि महिलाएं यह नहीं कर सकती हैं या महिलाएं इस तरह के काम नहीं कर सकती हैं. लेकिन मैं गर्व से यह कह सकता हूं कि महिलाएं बराबर हैं.
सात फीसदी हैं सेना में महिलाएं
भारत के पुलिस बल में पुरुषों का दबदबा है. आंकड़ों के मुताबिक सभी अधिकारियों में महिलाओं का संख्याबल महज सात फीसदी के करीब है. यह आंकड़ा सरकार के 33 फीसदी के लक्ष्य से काफी पीछे है. महिलाओं की यह कमांडो टीम सभी पांच पुरुष स्वात टीमों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में काम करेगी.
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