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बिहार में कैंसर फैल रहा है दबे पांव, चपेट में महिलाएं सर्वाधिक

Updated at : 04 Feb 2018 7:47 AM (IST)
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बिहार में कैंसर फैल रहा है दबे पांव, चपेट में महिलाएं सर्वाधिक

पटना : बिहार में कैंसर दबे पांव फैलती चली जा रही है. कैंसर की चपेट में महिलाएं सर्वाधिक आ रही हैं, जबकि 2012 में कैंसर पीड़ित महिलाओं की संख्या महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा थी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में कैंसर के कुल मरीजों में 58 फीसदी पुरुष थे, वहीं महिलाओं का […]

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पटना : बिहार में कैंसर दबे पांव फैलती चली जा रही है. कैंसर की चपेट में महिलाएं सर्वाधिक आ रही हैं, जबकि 2012 में कैंसर पीड़ित महिलाओं की संख्या महिलाओं की तुलना में काफी ज्यादा थी. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2012 में कैंसर के कुल मरीजों में 58 फीसदी पुरुष थे, वहीं महिलाओं का प्रतिशत 42 फीसदी था. वर्ष 2017 में ये आंकड़ा तकरीबन उलट चुका है. अब महिला मरीजों की संख्या 42 से बढ़कर 54 फीसदी हो चुकी है. फिलहाल कैंसर की पीड़ा से बिहार कराह रहा है. इसे रोकने के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं. जागरूकता के अभाव ने कैंसर को बढ़ा दिया है.

ये हैं कारण

तेजी से बदलते जीवन-शैली के कारण महिलाएं तेजी से कैंसर जैसी बीमारियों की शिकार हो रही हैं. जंक फूड, देर से शादी, मोटापा, स्तनपान न कराना. बार-बार गर्भपात, मेनोपॉज जैसे कई कारणों से महिलाएं कैंसर जैसी बीमारियों की शिकार हो रही हैं. इसके अलावा आनुवांशिक कारण भी शामिल है.

25 हजार में साढ़े 13 हजार महिलाओं को कैंसर

महावीर कैंसर संस्थान के मुताबिक वर्ष 2017 में कैंसर मरीजों की संख्या कुल 25 हजार रही. इनमें 13,500 महिलाएं रही, जो सर्वाइकल और स्तर कैंसर से संबंधित रहीं. वहीं, 11,500 कैंसर के मामले पुरुष के रहे. महावीर कैंसर संस्थान में 54 प्रतिशत महिलाएं कैंसर की शिकार हैं. 2016 में कैंसर पीड़ित मरीजों की संख्या 23 हजार थी.

इन जिलों में तेजी से बढ़ रहा कैंसर
डॉक्टरों के मुताबिक बिहार के वैशाली, औरंगाबाद, जमुई व पूर्णिया जिले में सबसे अधिक महिलाएं कैंसर की शिकार हो रही है. इनमें सबसे अधिक सर्वाइकल और स्तन कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं. पूरे बिहार भर में प्रतिवर्ष 35 हजार महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की पहचान होती है और इनमें 25 हजार महिलाओं की मौत हो जाती है. वहीं, पूरे बिहार से 80 हजार कैंसर के नये मरीज आते हैं. कुल मरीजों की संख्या लगभग ढ़ाई लाख है. इनमें महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक करीब 61 फीसदी है और पुरुषों का 38 फीसदी है.

महिलाओं में कैंसर के मामले तेजी से बढ़े हैं. आज से चार से पांच साल पहले के आंकड़ाें को देखें, तो कैंसर रोगियों में महिला रोगियों की संख्या पुरुषों की तुलना में कम था. फिर समान अनुपात में मामले आने लगे. लेकिन पिछले दो सालों में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
डॉ मनीषा सिंह, सह निदेशक, कीमोथेरेपी, महावीर कैंसर संस्थान

कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ने का मुख्य कारण बदलती जीवन शैली है. बिहार टीकाकरण में अब भी पीछे हैं. सर्वाइकल कैंसर से निजात दिलाने के लिए एचपीवी नामक टीकाकरण बनाया गया है. टीका लड़कियां शादी से पहले लगा लें तो 75 फीसदी कमी लायी जा सकती है.
डॉ जितेंद्र कुमार सिंह, निदेशक, पारस कैंसर सेंटर

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