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बढ़ सकता है बिजली संकट, झारखंड सहित कई राज्यों में कोयले की कमी

देशभर में एक बार फिर कोयले का संकट नजर आने लगा है. कई प्लांट में सिर्फ डेढ़ दिनों का कोयला बचा है. देशभर में गर्मी अपने चरम पर है. उत्तर भारत के ज्यादातर राज्य लू की समस्या झेल रहे हैं.

By Prabhat khabar Digital
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कई राज्यों में गर्मी इतनी भीषण है कि लोग पंखे, एसी, कूलर को छोड़ना नहीं चाह रहे हैं. ऐसे में भारत में एक बार फिर कोयला संकट मंडराने लगा है. कई राज्यों ने कोयले की कमी की बात कही है. इस कारण देश के कई राज्यों में बिजली संकट पैदा होने की स्थिति बनी हुई है.

10 राज्य कोयला संकट से जूझ रहे हैं. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं. इन 10 राज्यों में से 4 राज्य ऐसे हैं जहां बिजली की मांग ज्यादा है लेकिन इसकी अपेक्षा वहां उतनी बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रहा है.

झारखंड के ललपनिया स्थित टीवीएनएल के तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन (टीटीपीएस) में कोयला संकट का असर पड़ने लगा है. यहां सिर्फ दो दिनों का ही स्टॉक बचा है. जबकि, केंद्रीय विद्युत प्राधिकार की गाइडलाइन का है कि पावर प्लांटों के पास कम से कम 20 दिनों का स्टॉक हो, ताकि विपरीत परिस्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो. इधर, डीवीसी के कोडरमा, मैथन व चंद्रपुरा थर्मल पावर स्टेशन में फिलहाल 20-20 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक है. डीवीसी के अधिकारियों ने बताया कि डीवीसी के प्लांट में अभी कोयले का संकट नहीं है.

प्रतिदिन दो रैक कोयले की जरूरत : टीवीएनएल के एमडी अनिल शर्मा ने बताया कि टीटीपीएस को प्रतिदिन कम से कम दो रैक कोयले की जरूरत है, लेकिन यह नियमित रूप से नहीं मिल पाता. महीने में 20 दिन सीसीएल की ओर से एक-एक रैक कोयला भेजा जाता है. 10 दिन ऐसा होता है, जब दो रैक कोयला भेजा जाता है. इस कारण कोयले का स्टॉक भी नहीं रख पाते हैं. फिलहाल कोयले की आपूर्ति धीमी हुई है. गौरतलब है कि सीसीएल की ओर से टीटीपीएस को कोयले की आपूर्ति की जाती है.

तेनुघाट की दो यूनिट से प्रतिदिन 325 से 330 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है. शुक्रवार को 325 मेगावाट उत्पादन हो रहा था. एमडी ने चिंता जतायी है कि यदि पर्याप्त कोयला नहीं मिला, तो एक यूनिट को बंद करना पड़ सकता है.केंद्रीय उर्जा मंत्री आरके सिंह की मानें तो कोयले की कमी कुछ राज्यों में है लेकिन कुछ में नहीं है. इसके होने की पीछे कुछ अहम परिस्थितियां जिम्मेदार हैं. हम हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं.

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