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श्रीलंका में मोदी ने आतंकवाद पर पाक को घेरा, कहा-घृणा व हिंसा की मानसिकता विश्व शांति के लिए चुनौती

Updated at : 12 May 2017 7:06 PM (IST)
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श्रीलंका में मोदी ने आतंकवाद पर पाक को घेरा, कहा-घृणा व हिंसा की मानसिकता विश्व शांति के लिए चुनौती

कोलंबो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि बुद्ध का शांति का संदेश ‘हिंसा के बढ़ते दायरे’ का जवाब है. साथ ही उन्होंने घृणा और हिंसा की मानसिकता के कारण विश्व शांति की चुनौती पर भी चिंता जाहिर की. मोदी ने कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय बैसाख दिवस समारोह में कहा, ‘भगवान बुद्ध का संदेश […]

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कोलंबो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि बुद्ध का शांति का संदेश ‘हिंसा के बढ़ते दायरे’ का जवाब है. साथ ही उन्होंने घृणा और हिंसा की मानसिकता के कारण विश्व शांति की चुनौती पर भी चिंता जाहिर की. मोदी ने कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय बैसाख दिवस समारोह में कहा, ‘भगवान बुद्ध का संदेश 21वीं सदी में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना ढाई हजार वर्ष पहले था.’ वह समारोह में मुख्य अतिथि की हैसियत से बोल रहे थे. मोदी ने कहा कि क्षेत्र में घृणा और उसे फैलानेवाले वार्ता की बात करते हैं और वे सिर्फ मौत और विनाश का कारण बन रहे हैं.

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उन्होंने कहा, ‘हमारे क्षेत्र में आतंकवाद का खतरा इस विध्वंसक भावना की ठोस अभिव्यक्ति है.’ उनका इशारा संभवत: पाकिस्तान की तरफ था जिस पर भारत के अंदर हमला करने के लिए आतंकवादियों का सहयोग करने और प्रशिक्षण देने का आरोप है. उन्होंने कहा, ‘सतत् विश्व शांति की सबसे बड़ी चुनौती देशों के बीच संघर्ष नहीं है.’ उन्होंने कहा कि यह मानसिकता और घृणा तथा हिंसा फैलानेवालों में व्याप्त है.

मोदी ने कहा कि उनका मानना है कि ‘बुद्ध का शांति का संदेश पूरी दुनिया में हिंसा के बढ़ते दायरे का जवाब है.’ मोदी ने कहा कि बैसाख दिवस के लिए बुद्ध की शिक्षाओं का चयन सामाजिक न्याय और सतत् विश्व शांति से मेल खाता है. विषय निष्पक्ष प्रतीत हो सकता है लेकिन दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. श्रोताओं में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, राजनयिक, नेता और दुनिया भर से आये कई बौद्ध नेता शामिल थे. पूरी दुनिया में बौद्ध धर्म के लोग भगवान बुद्ध का जन्म, उनके ज्ञान की प्राप्ति और उनके महापरिनिर्वाण की याद में ‘बैसाख दिवस’ मनाते हैं.

मोदी ने कहा, ‘हमारे क्षेत्र ने दुनिया को बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के रूप में अमूल्य उपहार दिया.’ उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म और इसकी शिक्षाएं ‘हमारे शासन, संस्कृति और दर्शन’ में गहरे रूप से समाहित हैं. उन्होंने कहा कि दक्षिण, मध्य, दक्षिण पूर्व और पूर्वी एशिया के देश बौद्ध से जुड़े रहने से गौरवान्वित हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका को राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में भारत के समर्थन का आश्वासन दिया. मोदी ने कहा, ‘आप भारत के रूप में एक मित्र और सहयोगी पायेंगे जो आपके राष्ट्र निर्माण के प्रयत्नों में सहयोग करेगा.’ उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति सिरिसेना और प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे के साथ मेरी बातचीत से हमारे साझा उद्देश्य हासिल करने का प्रयास तेज हुआ है.’ इससे पहले पिछले दो वर्षों में दूसरी बार श्रीलंका पहुंचे मोदी का परंपरागत रूप से स्वागत हुआ जहां श्रीलंका के प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने उनकी अगवानी की.

इससे पहले प्रधानमंत्री ने श्रीलंका के सेंट्रल प्रोविंस के डिकोया कस्बे में भारतीय मूल के तमिलों से कहा, ‘विविधता खुशी मनाने की चीज है, टकराव की नहीं. कहा, श्रीलंका में सिंहला और तमिल समुदायों को एकता और सौहार्द को मजबूत करना चाहिए. उन्होंने श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिलों का जीवनस्तर सुधारने के लिए उस देश द्वारा उठाये गये कदमों को भारत के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया. श्रीलंका अभी वहां की सरकार और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के बीच करीब तीन दशक तक चले असैन्य संघर्ष के जख्मों से उबर ही रहा है. लिट्टे ने श्रीलंका के उत्तर और पूर्व में स्वतंत्र तमिल राज्य बनाने के लिए संघर्ष किया था. इस संघर्ष के कारण तमिलों को बहुत कठिनाइयां आयीं और इस दौरान करीब 80,000 से एक लाख लोगों की मौत हो गयी.

मोदी ने राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे की मौजूदगी में एक रैली में हजारों तमिलों से कहा, ‘हमें एकता और सौहार्द के बंधन को तोड़ना नहीं है, मजबूत करना है.’ हेलीकॉप्टर से डिकोया पहुंचे मोदी ने कहा कि उन्हें पता है कि श्रीलंका सरकार तमिलों के जीवनस्तर को सुधारने के लिए सक्रियता से कदम उठा रही है जिनमें पांच वर्षीय राष्ट्रीय कार्य योजना शामिल है. कहा, ‘शांति और व्यापक समृद्धि की ओर आपकी यात्रा में सरकार और भारत की जनता आपके साथ है.’ उन्होंने ऐलान किया कि भारत इस क्षेत्र में 10,000 अतिरिक्त आवास मुहैया करायेगा. भारत ने पहले ही 4000 मकान बनाये हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने 1990 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा का भी सभी प्रांतों में विस्तार करने का फैसला किया है जो फिलहाल पश्चिमी और दक्षिणी प्रांतों में चलायी जा रही है.’ मोदी ने 2015 में श्रीलंका की अपनी पहली यात्रा के समय एंबुलेेंस सेवा को हरी झंडी दिखायी थी.

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