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भारत ही नहीं, अफगानिस्तान के भी खिलाफ छद्म युद्ध छेड़े हुए है पाकिस्तान, तालिबान का कर रहा इस्तेमाल

Updated at : 02 May 2017 9:59 AM (IST)
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भारत ही नहीं, अफगानिस्तान के भी खिलाफ छद्म युद्ध छेड़े हुए है पाकिस्तान, तालिबान का कर रहा इस्तेमाल

वाशिंगटन : पाकिस्तान अकेले भारत के साथ ही छद्मयुद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि वह अफगानिस्तान पर भी प्रॉक्सी वार कर रहा है. सोमवार को उसके सैनिकों ने घाटी में नियंत्रण रेखा पर सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैनिकों के गश्तीदल पर अपना निशाना साधा है, तो उधर उसने दक्षिणी वजीरिस्तान में सीमा से […]

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वाशिंगटन : पाकिस्तान अकेले भारत के साथ ही छद्मयुद्ध नहीं लड़ रहा है, बल्कि वह अफगानिस्तान पर भी प्रॉक्सी वार कर रहा है. सोमवार को उसके सैनिकों ने घाटी में नियंत्रण रेखा पर सीजफायर का उल्लंघन करते हुए भारतीय सैनिकों के गश्तीदल पर अपना निशाना साधा है, तो उधर उसने दक्षिणी वजीरिस्तान में सीमा से लगे क्षेत्र में अफगानिस्तानी इलाके में सीमापार आतंकी गतिविधियों की जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया है. मंगलवार की सुबह पाकिस्तान के इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सेना ने दक्षिण वजीरिस्तान के सीमाई इलाके में सीमापार से होने वाली आतंकी गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की है.

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वहीं, प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अमेरिकी सांसदों को बताया है कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान का भारत के साथ संबंध अस्वीकार्य है और वह अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ने के लिए हक्कानी नेटवर्क एवं तालिबान जैसे संगठनों का इस्तेमाल कर रहा है. पिछले सप्ताह कांग्रेस की एक सुनवाई के दौरान इंटरनेशनल सिक्योरिटी एंड डिफेंस पॉलिसी सेंटर, रैंड कॉरपोरेशन के निदेशक सेथ जोन्स ने कहा कि अफगानिस्तान का सबसे मजबूत क्षेत्रीय सहयोगी भारत है और यह बात पाकिस्तान को अस्वीकार्य है. भारत एक शत्रु है, जबकि अफगान सरकार भारत सरकार की एक सहयोगी है.

कांग्रेस के सदस्य टेड पो के सवाल के जवाब में जोन्स ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जैसे स्थानों पर भारतीयों के खिलाफ और अफगानिस्तान में अपनी विदेश नीति के उद्देश्यों के आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने छद्म युद्धों का इस्तेमाल किया है. यहां इसका अर्थ हक्कानी नेटवर्क और तालिबान जैसे संगठनों को सहयोग देने से है. इसलिए यह एक छद्म युद्ध है.

आतंकवाद और परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर बनी सदन की विदेश मामलों की उपसमिति द्वारा आयोजित एक सुनवाई में लॉन्ग वॉर जर्नल के संपादक बिल रोजियो ने कहा कि पाकिस्तान सरकार अपनी नीति को जारी रखे हुए है. यह एक ऐसी नीति है, जो हर चीज को भारत से युद्ध के चश्मे से देखती है.

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