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धमकी : अरुणाचल दौरे से चीन खफा, बोला- दलाई लामा का इस्तेमाल कर रहा भारत, उठायेंगे कदम

Updated at : 06 Apr 2017 9:28 AM (IST)
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धमकी : अरुणाचल दौरे से चीन खफा, बोला- दलाई लामा का इस्तेमाल कर रहा भारत, उठायेंगे कदम

बीजिंग‍ : तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश का दौरा शुरू होने पर चीन ने एक बार फिर भारत पर हमला बोला है. पुराना राग अलापते हुए कहा है कि भारत दलाई लामा का कूटनीति इस्तेमाल कर रहा है. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है कि दलाई […]

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बीजिंग‍ : तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश का दौरा शुरू होने पर चीन ने एक बार फिर भारत पर हमला बोला है. पुराना राग अलापते हुए कहा है कि भारत दलाई लामा का कूटनीति इस्तेमाल कर रहा है. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है कि दलाई लामा धर्म की आड़ में चीन के खिलाफ पृथकतावादी गतिविधियों में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. ऐसे में उन्हें अरुणाचल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में आमंत्रित करने से भारत व चीन के रिश्ते प्रभावित हुए हैं.

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि भारत ने दुराग्रह पूर्वक यहां दलाई लामा का दौरा कराया, ताकि चीन के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचे. इससे न सिर्फ तिब्बत के मुद्दे पर विपरीत असर पड़ेगा, बल्कि सीमा क्षेत्र को लेकर विवाद भी बढ़ेगा. यह दौरा निश्चित रूप से असंतोष बढ़ायेगा.

भारत क्यों करे इस्तेमाल भले ही चीन माने राक्षस

दलाई लामा ने कहा है कि यदि चीन उन्हें असुर भी माने तो भी दिक्कत नहीं. साफ शब्दों में कहा है कि भारत ने चीन के खिलाफ उनका कभी इस्तेमाल नहीं किया है. बात यह है कि चीन की मीडिया ने आरोप लगाया कि भारत दलाई लामा को चीन के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है.

समझा चुका है भारत, न दें दखल : रिजीजू

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने चीन से कहा था कि दलाई लामा की यह यात्रा पूरी तरह धार्मिक है. इसका कोई राजनीतिक तात्पर्य नहीं निकाला जाना चाहिए. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कहा कि दलाई लामा एक सम्मानित धार्मिक नेता हैं. पहले भी वह कई मौकों पर प्रदेश का दौरा कर चुके हैं.

क्यों डरा है चीन

चीन अरुणाचल को विवादित क्षेत्र मानता है. इसके कुछ हिस्सों को दक्षिणी तिब्बत कहता है. ऐसे में यहां चलनेवाली ही गतिविधि पर उसकी नजर होती है.

चीन की चिंता की वजह भावी आर्थिक व सामरिक व्यवहार में तिब्बत का महत्व बढ़ना भी है. ग्वादर बंदरगाह की गतिविधियां हों या फिर नेपाल के साथ व्यवहार, सब कुछ तिब्बत से ही जुड़ा है.

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