उड़ी हमले के बाद अलग-थलग पड़ा पाक, सार्क समिट हुआ रद्द, जानें फैसले का असर

नयी दिल्ली: आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटे भारत को बुधवार को बड़ी सफलता मिली. भारत के साथ अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी पाकिस्तान में आयोजित 19वें सार्क समिट में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. ये देश भारत की इस बात से सहमत हैं कि वर्तमान […]
नयी दिल्ली: आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटे भारत को बुधवार को बड़ी सफलता मिली. भारत के साथ अफगानिस्तान, बांग्लादेश और भूटान ने भी पाकिस्तान में आयोजित 19वें सार्क समिट में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. ये देश भारत की इस बात से सहमत हैं कि वर्तमान माहौल में इसलामाबाद जाना सही नहीं है. तीनों देशों ने अपने निर्णय से सार्क समिट के मौजूदा अध्यक्ष नेपाल को अवगत करा दिया है. मालूम हो कि उड़ी आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ पैदा हुए तनाव की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान नहीं जाने का फैसला मंगलवार की रात लिया था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि सम्मेलन होना है या नहीं, इसका आधिकारिक एलान सार्क का मौजूदा अध्यक्ष नेपाल करेगा. हालांकि, भारत के समर्थन में तीन और देशों के आने के बाद इस समिट को स्थगित करने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं है. इस बीच काठमांडू पोस्ट ने खबर दी है कि भारत के इनकार के बाद सार्क समिट स्थगित कर दिया गया है. हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इसका आधिकारिक एलान नहीं किया है.
उधर, मेजबान पाकिस्तान ने कहा कि, भारत के इनकार के बाद नवंबर में होने वाली सार्क समिट को टाला जा सकता है. यह भी कहा कि इससे पहले भी भारत चार बार सम्मेलन को टलवा चुका है. इससे पहले पाक पीएम के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने आरोप लगाया कि भारत समिट को विफल करने का दुष्प्रचार कर रहा है. सारी बातों के बीच सार्क चार्टर कहता है कि आठ सदस्यीय समूह में यदि किसी एक देश का नेतृत्व यदि कार्यक्रम में शरीक नहीं होता है, तो यह सम्मेलन खुद -ब -खुद निलंबित या रद्द हो जायेगा. स्पष्ट है कि इस बार इसलामाबाद में सार्क समिट नहीं होगा.
फैसले का असर
1. 1985 में बने इस गुट में भारत सबसे बड़ा सदस्य है. अगर भारत और तीन अन्य सदस्य इस समिट में नहीं जायेंगे, तो यह पाकिस्तान को करारा जवाब होगा और उस पर आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा.
2. भारत के इस कदम का पड़ोसी देशों का साथ देने का मतलब है कि दक्षिण एशिया में उसकी पकड़ मजबूत है. ऐसे में पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ जायेगा.
सार्क और दुनिया
1. जीडीपी के हिसाब से सार्क दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. इसके सदस्य देश दुनिया के तीन फीसदी हिस्से में फैले हैं. दुनिया की पूरी आबादी का करीब 21 फीसदी हिस्सा इन देशों में है.
2. इन आठ देशों में भारत का क्षेत्रफल व आबादी 70% से भी ज्यादा है.
3. 2005-10 के दौरान सार्क की औसत जीडीपी ग्रोथ रेट 8.8 फीसदी प्रतिवर्ष थी, लेकिन 2011 में यह घट कर 6.5 फीसदी रह गयी.
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