ई-कॉमर्स से आगे भी है स्टार्टअप की दुनिया, जानें कैसे-कैसे निवेशक कहां हो रहा निवेश
Updated at : 12 Sep 2016 5:42 AM (IST)
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पिछले कुछ वर्षों में भारत में विदेशी निवेश में तेजी आयी है. रिटेल, ई-कॉमर्स, मूलभूत सुविधाओं, खदान और फैशन आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें काफी निवेश आया है. हालांकि, पिछले एक साल में निवेशकों ने काफी पैसा बाहर भी खींच लिया है, लेकिन व्यापार चक्र में यह साधारण घटना है. तकनीकी क्रांति के मौजूदा दौर […]
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पिछले कुछ वर्षों में भारत में विदेशी निवेश में तेजी आयी है. रिटेल, ई-कॉमर्स, मूलभूत सुविधाओं, खदान और फैशन आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें काफी निवेश आया है. हालांकि, पिछले एक साल में निवेशकों ने काफी पैसा बाहर भी खींच लिया है, लेकिन व्यापार चक्र में यह साधारण घटना है.
तकनीकी क्रांति के मौजूदा दौर में बहुत से लोगों को लग सकता है कि बड़े निवेशक सिर्फ ई-कॉमर्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि निवेशक और उनके निवेश करने के तरीके अलग-अलग तरह के होते हैं. कितने तरह के होते हैं निवेशक और भारत में किस क्षेत्र की कंपनियों, खासकर स्टार्टअप्स में आ रहा है ज्यादा निवेश, बता रहे हैं स्टार्टअप, ई-कॉमर्स एवं फाइनेंशियल प्लानिंग के विशेषज्ञ दिव्येंदु शेखर.
जानें अलग-अलग निवेशक को
यदि आप स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हों, तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि उसके लिए पूंजी कहां से आ सकती है. इसके लिए सबसे पहले निवेशकों के प्रकार को समझिए.
एंजेल निवेशक : एंजेल का अर्थ होता है देवदूत. ये निवेशक तब साथ आते हैं, जब आपके पास बस एक अच्छा बिजनेस प्लान होता है. ये शुरुआती पूंजी देते हैं और दिशा दिखाते हैं. ये किसी प्रकार के व्यापार में नहीं, बल्कि बिजनेस प्लान में निवेश करते हैं. एंजेल निवेशकों ने अनेक व्यापार में सहयोग किया है, चाहे मैन्युफैक्चरिंग हो, ई-कॉमर्स, खानपान या मार्केटिंग का काम हो. पिछले दो सालों में इनका काफी निवेश मूलभूत सुविधाओं जैसे- सौर ऊर्जा, खेती व खाद्य पदार्थों- में बढ़ा है. इनके निवेश का दायरा 10 से 50 लाख तक होता है.
वेंचर कैपिटल : वेंचर कैपिटल एक बड़ा फंड होता है, जिसके पास अनेक व्यापार के विशेषज्ञ होते हैं. एक बड़े फंड के अंदर छोटे-छोटे कई फंड होते हैं, जो व्यापार विशेष पर ध्यान देते हैं. जैसे तकनीकी, मैन्युफैक्चरिंग आदि का अलग फंड होता है. ये ऐसी कंपनी में निवेश करते हैं, जो एक अच्छा प्रोडक्ट बना चुकी है और बाजार में मौजूदगी दर्ज करा चुकी है. इनका ध्यान ऐसी कंपनी पर होता है, जो नयी तकनीक के साथ पुराने व्यापार को या तो बेहतर बना रही हैं या फिर कोई ऐसी कंपनी जो ऐसा प्रोडक्ट बनाती है, जो नया और अनूठा है.
पहले व्यापार का अच्छा उदहारण ओला और उबेर हैं और दूसरे का मोबिक्विक है, जिसने पहली बार मोबाइल वॉलेट बनाया. वेंचर कैपिटल ज्यादातर बड़े निवेश करते हैं, जो पांच से सौ करोड़ रुपये तक होता है.
प्राइवेट इक्विटी : प्राइवेट इक्विटी बड़े फंड होते हैं, जो अलग तरह से निवेश करते हैं. ये काफी बड़ी कंपनियों में बड़ा निवेश करते हैं. ये ऐसी कंपनियां ढूंढते हैं, जो थोड़े निवेश के साथ और बड़ी हो सकती हैं. कई बार किसी कंपनी के स्टॉक मार्केट में जाने के ठीक पहले ये सस्ते में निवेश करते हैं, ताकि लिस्टेड होने के बाद शेयर बेच कर मुनाफा कमा सकें.
ये कुछ ही क्षेत्रों में 200 से 2,000 करोड़ रुपये तक निवेश करते हैं और उसकी अवधि एक से दो साल की होती है. कुछ खास क्षेत्रों में ये पूरी कंपनी ही खरीद लेते हैं. ब्लैकस्टोन और जीआइसी जैसे फंड भारत में कपड़े, ऑटो, स्टील और खाद्य पदार्थों में निवेश करते आ रहे हैं.
इन्वेस्टमेंट बैंक्स या इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर : ये ज्यादातर स्टॉक मार्केट में निवेश करते हैं. इन्हें इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर भी कहते हैं. स्टार्टअप में ये कम निवेश करते हैं. स्टार्टअप बड़ा होने पर उसमें निवेश के कुछ उदाहरण जरूर हैं. गोल्डमैन सैक्स और फिडेलिटी ऐसे बड़े फंड हैं, जिन्होंने स्टॉक मार्केट में काफी निवेश किया है. अपवाद के तौर पर फ्लिपकार्ट और ओला में भी निवेश किया है. इनके निवेश का खास फार्मूला नहीं है, लेकिन ये तीन से छह महीने में मुनाफा देखना चाहते हैं. इनका फार्मूला है- जितना पैसा डाला है, वह बड़ा मुनाफा कमा कर दे.
सिर्फ ई-कॉमर्स नहीं, दूसरी कंपनियों में भी आता निवेश
बहुत से युवाओं की तरह यदि आप भी सोचते हैं भारत में विदेशी निवेश सिर्फ ई-कॉमर्स में आ रहा है, तो आप गलत हैं. जानें, हाल में ई-कॉमर्स से इतर क्षेत्रों में निवेश हासिल करनेवाली कुछ चर्चित कंपनियों के बारे में.
माइक्रोमैक्स : सस्ते और टिकाऊ मोबाइल फोन से शुरू कर अब माइक्रोमैक्स बेहतर फोन बना रहा है. पिछले दो सालों में यह दो सबसे बड़े मोबाइल ब्रांड में शामिल रहा है. पिछले आठ सालों में निवेशकों से इसने करीब 700 करोड़ रुपये जुटाये हैं.
डी-लाइट : यह स्टार्टअप कम कीमत पर सौर ऊर्जा चालित घरेलू उपकरण और लाइट बनाता है. भारतीय स्टार्टअप नहीं होने के बावजूद इनका भारत में काफी निवेश है और अभी तक इसने करीब 500 करोड़ रुपये जुटाये हैं.
जूमकार : यह स्टार्टअप लोगों को खुद चलाने के लिए गाड़ियां किराये पर देता है. 2012 में बेंगलुरु में शुरू करने के बाद यह कई शहरों में फैल चुका है और रोजाना दस हजार गाड़ियां किराये पर देता है. निवेशकों ने इसमें करीब 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
मैनी प्रिसिशन : यह स्टार्टअप कार के इंजन के पार्ट बनाता है और अनेक सूक्ष्म उपकरण बनाने की क्षमता रखता है.बेंगलुरु में एक फैक्ट्री से शुरू हुए इस स्टार्टअप के आज देश के कई कार निर्माता ग्राहक हैं. निवेशकों ने इसमें भी करीब 35 करोड़ का निवेश किया है.
चायोस : यह चाय आधारित कैफे है, जो तरह-तरह की चाय बनाता है. इसने आधुनिक पैकिंग का इस्तेमाल करके गर्म चाय घर-घर पहुंचाया है. साथ ही चाय की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अच्छी मार्केटिंग की है. पिछले साल टाइगर ग्लोबल ने इसमें 33 करोड़ रुपये का निवेश किया.
स्टार्टअप क्लास
‘स्किल इंडिया’ के तहत आप भीशुरू कर सकते हैं आइटीआइ
– स्टार्टअप इंडिया प्लान के तहत मैं एक आइटीआइ स्थापित करना चाहता हूं. क्या ऐसा हो सकता है? इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में बताएं? – नवीन कुमार, डाल्टेनगंज
अगर आप आइटीआइ लगाना चाहते हैं तो स्किल इंडिया प्लान के तहत लगाएं. स्किल इंडिया के तहत आपको सब्सिडी और सरकारी सहायता दोनों मिलेगी. मशीन और इमारत बनाने में सब्सिडी मिलेगी और ट्रेनिंग व फीस में सरकारी सहायता मिलेगी.
स्टार्टअप इंडिया में प्रक्रिया लंबी है और आइटीआइ के तरफ खास ध्यान नहीं है. जबकि स्किल इंडिया में इसे तवज्जो दिया गया है. उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में राज्य सरकारें विशेष तौर पर कंपनियों को स्किल इंडिया के तहत आइटीआइ से पास लोगों को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित भी करती हैं. साथ ही केंद्र सरकार के ट्रेनिंग पार्टनर बन कर छात्र भी आसानी से मिलेंगे.
तीन साल से पहले बिना गारंटर लोन मुश्किल
– पिछले डेढ़ सालों से मैं वैधानिक तरीके से पार्टनरशिप फर्म चला रहा हूं. स्टार्टअप योजना के तहत अब इसे रजिस्ट्रेशन कराने और व्यापार हेतु छूट व लोन कैसे मिलेगा?
– राजेश कुमार मिश्रा, बरौनी
पार्टनरशिप फर्म को अलग से रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है. आपने यह नहीं बताया है कि आप किस तरीके के व्यापार में लगे हैं, इसलिए मैं आपको यह नहीं बता सकता कि ‘स्टार्टअप इंडिया’ की किस योजना के तहत आपको ये सुविधाएं मिल सकती हैं.
आप स्टार्टअप इंडिया डॉक्यूमेंट और वेबसाइट की मदद से यह पता कर सकते हैं कि आपके सेक्टर में सरकार ने कौन-कौन सी सुविधाएं दी हैं और किस प्रकार की टैक्स छूट प्राप्त है. बिना किसी गारंटी के लोन मिलना मुश्किल है. कारण आप तीन साल से कम समय से व्यापार में हैं. अगर बैंक से बात करें, तो आपको ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिल सकती है. लोन के लिए संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है.
तकनीक व ऑटोमेशन से बढ़ाएं बिजनेस
– मैंने एक स्टार्टअप शुरू किया है, जो व्हाट्सएप्प व कॉल के जरिये ग्राहकों से ऑर्डर लेकर उनके घरों तक फलों, सब्जियों जैसे रोजमर्रा की चीजों को पहुंचाने का काम करता है़ बाजार के अनुरूप सभी प्रोडक्ट के बिक्री मूल्य कायम रखते हुए इस काम को कैसे विस्तार दिया जा सकता है? – यासिर काजमी
आप जिस व्यवसाय में हैं, उसमें दो बहुत बड़े स्टार्टअप हैं- ग्रोफर्स और बिग बास्केट. इसे बढ़ने का एक ही तरीका है- तकनीक और ऑटोमेशन. इसके लिए आपको ज्यादा-से-ज्यादा तकनीक का प्रयोग करना पड़ेगा. इसे ऐसे समझें : (क) चीजों के दाम : आपको बाजार में रियल टाइम कीमत के बारे में पता होना चाहिए ताकि बाजार से बराबरी कर सकें. आपके सिस्टम को यह जानकारी मिलती रहनी चाहिए, ताकि उस अनुरूप आप कीमत बदल सकें.
(ख) आर्डर बुक : आॅर्डर मिलने पर उसे कम-से-कम दाम में सिस्टम में फीड किया जा सके, इसका आसान उपाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या बॉट तकनीक है. इससे गड़बड़ी की संभावना कम होती है और ज्यादा आॅर्डर आने पर भी परेशानी नहीं होती.
(ग) इनवेंटरी मैनेजमेंट : आपको एक इआरपी लगाना होगा ताकि माल के बारे में ताजा जानकारी रख पाएं और कारोबार बढ़ने पर उसे बड़े तरीके से कर पाएं. (घ) डिलीवरी : डिलीवरी कभी भी मुफ्त नहीं देनी चाहिए. सुविधा देने का उचित मूल्य लें.
कामयाबी की राह
जरूरी नहीं िक रुचि दिखानेवाले भुगतान भी करें
स्टार्टअप शुरू करनेवाले यह जरूर जान लें कि इसके लिए मजबूत कलेजे की जरूरत होती है़ ज्यादातर स्टार्टअप चलानेवालों का कहना है कि वे रोजाना कुछ-न-कुछ जरूर सीखते हैं. आपके स्टार्टअप को किस चीज की जरूरत है और इसे कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है, इन सबके लिए दूसरों से सलाह लेना बेहतर है, लेकिन उसे अपने अनुभवों से सीखना और भी बेहतर होता है़.
स्टार्टअप को एक नयी ऊंचाई तक कैसे ले जायें, इसके लिए कोई एक तय फार्मूला नहीं है, इसे आपको समय और हालात के साथ तय करना होता है, फिर भी कुछ नुस्खे हैं, जिन्हें अपनाकर बेहतरी की ओर आगे बढ़ सकते हैं :
– सभी से संवाद : यदि आप स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो मिलनेवाले सभी लोगों से बात करें. कई बार आपको यह महसूस होगा कि संवाद कायम करने से कहीं आपका आइडिया कोई चुरा न ले या फिर उसका मजाक न बना दे, लेकिन आप बातचीत जरूर करें. आपके प्रोडक्ट या सर्विस के ग्राहकों, निवेशकों, विशेषज्ञों, सलाहकारों आदि से नियमित संपर्क में रहें, ताकि वे किसी खामी या संभावित बेहतरी के बारे में आपको आगाह कर सकें. इससे आपका आइडिया परिष्कृत होगा और बाजार बढ़ने की उम्मीद रहेगी़
– पसंद और भुगतान करना अलग बातें हैं : आपके प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में ग्राहकों की क्या राय है, इसे भी जानना जरूरी
है.आखिरकार आपका मुनाफा वहीं से आता है. इसलिए उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए. यदि आप कोई नया प्रोडक्ट लॉन्च करना चाहते हैं, तो जरूरी नहीं कि जो लोग उसे पसंद करते हैं, वे खरीद ही लेंगे या आपके द्वारा तय कीमत का भुगतान कर ही देंगे़ इसलिए यह जानना जरूरी है कि आपके संभावित ग्राहक उसके लिए कितनी कीमत चुका सकते हैं. इससे आप यह जान पायेंगे कि उसकी गुणवत्ता कैसी रखी जाये, ताकि लागत पर आप एक उचित मुनाफा कमा सकें. इसके लिए किसी खास क्षेत्र में शुरुआत करने से पहले सर्वे करा लेना चाहिए़
– समस्या को सुलझाने की कूव्वत : यदि आप किसी समस्या को बेहतर तरीके से सुलझाने की कूव्वत रखते हैं, तब ही आपको स्टार्टअप के क्षेत्र में आना चाहिए. आज बहुत से लोग उद्यमी बनना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि करना क्या है. समझ-बूझ कायम होने के बाद ही बिजनेस की शुरुआत करनी चाहिए.
– विजन : बतौर उद्यमी आप को सभी काम खुद करना होता है. मुनाफे की बजाय अपने विजन की ओर ज्यादा फोकस करना चाहिए, अन्यथा आप मूल मकसद से भटक सकते हैं. पहले से की गयी सटीक प्लानिंग न सिर्फ अापकी प्रोडक्टिविटी को बढ़ायेगी, बल्कि आनेवाली रुकावटों का अंदाजा भी पहलेसे हो जायेगा.
आसपास के बाजार में बिकने लायक प्रोडक्ट बनायें
– हमारे कस्बे में बिजली की दशा में सुधार हुआ है़ छोटे स्तर पर किस तरह के प्रोडक्शन स्टार्टअप की शुरुआत की जा सकती है, जिसमें बिजली की ज्यादा जरूरत होती है?
प्रोडक्शन का काम शुरू करने से पहले यह देखें कि आसपास किस चीज का बड़ा बाजार है, जहां आप उत्पाद बेच सकें. ज्यादातर कस्बों में निर्माण कार्य बढ़ रहा है. लोग पक्के घर बना रहे हैं. कृषि उपकरणों की मांग बढ़ी है. पता करें कि आसपास फेब्रिकेशन में कितना बड़ा बाजार है. इसके तहत कम लागत में लोहे के उपकरण बना सकते हैं. दरवाजे, खिड़कियाें की जालियां व छोटे कृषि उपकरण का अच्छा बाजार है और आप इसके फेब्रिकेशन का उद्योग चला सकते हैं.
गांव से सीधे खरीद शहर में बेच सकते हैं अनाज
– शहरों में अनाज के बिक्री मूल्य और गांवों में उसके खरीद मूल्य में आम तौर पर बहुत अंतर देखा जाता है़ क्या इस सेक्टर में नये तरीके से कारोबार शुरू किया जा सकता है, ताकि दोनों ही को फायदा पहुंचाते हुए मुनाफा हासिल किया जा सके?
पिछले कुछ दिनों में सरकार ने मंडी के नियमों में बदलाव किये हैं, जिससे किसानों के लिए मंडी के अलावा भी माल बेचना मुमकिन हो गया है. आप गांव से खरीद कर सीधे शहर में बेचने का व्यापार शुरू कर सकते हैं.
इससे आप बिचौलियों को खत्म कर देंगे, जो मुनाफे का 80 फीसदी तक अपने पास रख लेते हैं. इसके लिए गांव में कोआॅपरेटिव भी खोल सकते हैं, जहां आप मुनाफा सीधे किसानों को भी बांट सकते हैं. इसके लिए आप अपने राज्य या जिले के कृषि या खाद्य विभाग से ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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