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रियो ओलंपिक की ‘सांबा'' के साथ रंगारंग शुरुआत, ग्लोबल वार्मिंग पर रहा जोर

Updated at : 06 Aug 2016 10:33 AM (IST)
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रियो ओलंपिक की ‘सांबा'' के साथ रंगारंग शुरुआत, ग्लोबल वार्मिंग पर रहा जोर

रियो डि जिनेरियो : रियो के मशहूर ‘सांबा’ नृत्य के साथ ब्राजील के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के भव्य प्रदर्शन के साथ 31वें ओलंपिक खेलों की आधिकारिक शुरुआत हो गयी जिसमें रंगारंग कार्यक्रमों के जरिये दुनिया के लिये सबसे बडे संकट बन रहे ग्लोबल वार्मिंग (विश्व भर के तापमान में वृद्धि) को लेकर संक्षिप्त […]

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रियो डि जिनेरियो : रियो के मशहूर ‘सांबा’ नृत्य के साथ ब्राजील के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के भव्य प्रदर्शन के साथ 31वें ओलंपिक खेलों की आधिकारिक शुरुआत हो गयी जिसमें रंगारंग कार्यक्रमों के जरिये दुनिया के लिये सबसे बडे संकट बन रहे ग्लोबल वार्मिंग (विश्व भर के तापमान में वृद्धि) को लेकर संक्षिप्त लेकिन दमदार संदेश दिया गया. ब्राजीली आयोजकों ने फुटबाल के प्रति अपने जुनून को एकतरफ रखकर लगभग चार घंटे चले उदघाटन समारोह में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों की कमी को अपना मुख्य विषय बनाया जिसके साथ 17 दिन तक चलने वाले खेल महाकुंभ की शुरुआत हुई जिसमें भारत और शरणार्थी ओलंपिक टीम सहित 209 देशों के 11,000 से अधिक खिलाडी हिस्सा ले रहे हैं. ब्राजील के कार्यवाहक राष्ट्रपति माइकल टेमर ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थामस बाक और संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख बान की मून की उपस्थिति में दक्षिण अमेरिका में पहली बार हो रहे खेलों के शुरुआत की घोषणा की. टेमर ने कहा, ‘मैं रियो ओलंपिक और आधुनिक युग के 31वें ओलंपिक खेलों के शुरुआत की घोषणा करता हूं.’ मरकाना स्टेडियम से रियो का आकाश आतिशबाजी से नहा रहा था और ऐसे भव्य समारोह में टेमर की घोषणा के साथ साथ प्रतियोगिता की आधिकारिक शुरुआत भी हो गयी.

वांडरलेई डी लिमा ने जलाया ओलंपिक मशाल

खेलों की आधिकारिक घोषणा के बाद ब्राजील के 2004 एथेंस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता वांडरलेई डि लिमा ने ओलंपिक ज्योति प्रज्वलित की. इसके बाद विश्व के पूर्व नंबर एक टेनिस खिलाडी और तीन बार के फ्रेंच ओपन विजेता गुस्तावो कुएर्टन तालियों के गडगडाहट के बीच मशाल को मुख्य स्थल पर लेकर आए. मरकाना स्टेडियम कई यादगार मुकाबलों का गवाह रहा है लेकिन 78 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम आज दुनिया को बेहतर बनाने के ब्राजील के प्रयासों का गवाह बना. इससे ओलंपिक से पहले के संकटों को भी दरकिनार करने की कोशिश की गयी जिनमें मेजबान शहर पर जीका वायरस के खतरे, चरमराती अर्थव्यवस्था और खेलों की बहुत अधिक लागत शामिल है.

पृथ्‍वी को बचाने का संकल्प

उद्घाटन समारोह से जुडे मुख्य अधिकारी ने कहा, ‘इस ग्रह को नुकसान पहुंचाने से रोकना ही पर्याप्त नहीं है, अब समय आ गया है कि हम इसे परेशानियों से मुक्त करें. यह हमारा ओलंपिक संदेश होगा. पृथ्वीवासियों आओ पेड लगाये, आओ इस ग्रह को बचायें.’ परंपरा के अनुसार प्राचीन ओलंपिक के जनक यूनान का दल खिलाडियों की परेड में सबसे पहले जबकि मेजबान ब्राजील की टीम सबसे आखिर में आयी. सभी देशों ने पुर्तगाली में उनके नाम के अनुसार वर्णमाला क्रम में परेड में हिस्सा लिया. ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा की अगुवाई में भारत ने 95वें देश के रूप में स्टेडियम में प्रवेश किया. बिंद्रा का यह आखिरी ओलंपिक है और वह भारत के ध्वजवाहक थे. भारत के 118 में से लगभग 70 खिलाडियों और 24 अधिकारियों ने मार्च पास्ट में हिस्सा लिया. पुरुष खिलाडियों ने गहरे नीले रंग का ब्लैजर और पैंट तथा महिला खिलाडियों ने पारपंरिक साडी और ब्लैजर पहन रखा था. अपने रिकार्ड सातवें ओलंपिक खेलों में भाग ले रहे लिएंडर पेस को दर्शकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए देखा गया जबकि महिला खिलाडियों में शटलर ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा तथा जिम्नास्ट दीपा करमाकर ने सभी का ध्यान खींचा.

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने परेड में भाग नहीं लिया

पुरुष हाकी टीम ने परेड में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि उन्हें आयरलैंड के खिलाफ मैच खेलना है. तीरंदाजी, टेबल टेनिस और भारोत्तलन टीम ने भी उद्घाटन समारोह में हिस्सा नहीं लिया. स्पेनिश और ब्रिटिश टीमों को भी दर्शकों ने खूब समर्थन किया क्योंकि उनकी अगुवाई क्रमश: टेनिस स्टार राफेल नडाल और एंडी मर्रे कर रहे थे. जमैका का 60 सदस्यीय दल अपने सबसे बडे स्टार उसैन बोल्ट के बिना परेड में उतरा। दुनिया के सबसे सफल ओलंपियन में से एक तैराक माइकल फेलप्स ने अमेरिका के 500 सदस्यीय दल की अगुवाई की जिन्होंने लाल, सफेद और नीले रंग की पोशाक पहनी हुई थी. कीनिया के दो बार के ओलंपिक चैंपियन किपचोग कीनो को पहले ‘ओलंपिक लॉरेल’ से सम्मानित किया गया। आईओसी ने खेलों के जरिये शिक्षा, संस्कृति और शांति में विशिष्ट योगदान देने वाले खिलाडी को सम्मानित करने के लिये इस पुरस्कार की शुरुआत की है.

22 खंडों में विभाजित था पूरा समारोह

समारोह को 22 खंडों में बांटा गया था जिसमें पहले 11 ब्राजील और उसके विकास से जुडे हुए थे. पहले 45 मिनट ब्राजील के इतिहास और हजारों वर्ष पहले से उसके विकास पर केंद्रित रहे और इसके बाद धरती को लेकर कार्यक्रम पेश किये गये. अकादमी पुरस्कार विजेता जूडी डेंच ने ब्राजीली थियेटर ‘ग्रेंड डेम’ और फर्नांडो मोंटेग्रो के साथ जीवंत उपस्थिति दर्ज करायी. इन दोनों ने कार्लोस ड्रमंड द आंद्रेड की मशहूर कविता ‘ए फ्लोर इ नौसिया’ के संदेश से लोगों को अवगत कराया जो भविष्य के लिये उम्मीद से जुडा है. ‘अक्वेल अबराको’ गीत पर ब्राजील के मशहूर अभिनेता लुई मलोडिया ने प्रदर्शन किया. स्वागत संबंधी खंड में दिलकश लहरों की खूबसूरत रचना और मार्कोस वेले के ‘समर सांबा’ का मनमोहक संगीत शामिल था. समारोह की शुरुआत उल्टी गिनती से हुई और फिर ढोल नगाडों की थाप पर कलाकारों ने अपने करतब दिखाये. आधिकारिक ध्वज को रियो के पर्यावरण से जुडे पुलिस अधिकारी ने फहराया, जिसमें यह संदेश दिया गया कि वनों का संरक्षण ब्राजील के सामने अब मुख्य चुनौती है. इसके बाद आईओसी अध्यक्ष बाक और ब्राजील के कार्यवाहक राष्ट्रपति टेमर के साथ ब्राजील के दस खिलाडियों और 50 युवा एथलीटों ने स्टेडियम में प्रवेश किया.

सांबा नृत्य ने समां बांधा

‘सांबा’ नृत्य के सबसे बडे प्रतिपादकों में से एक पावलिन्हो दा वियोला ने अपने अनूठे अंदाज में राष्ट्रगान प्रस्तुत किया. लगभग छह मिनट 20 सेकेण्ड में पिण्डोरमा को दिखाया गया, जिसमें जीवन के शुरुआत की कहानी को पेश किया गया. इसमें बहुत खूबसूरती से स्पेशल इफेक्ट्स को पिरोया गया था. इसमें थ्रीडी में अमेजन वर्षावन को दर्शकों सामने प्रस्तुत किया गया. इसमें सूक्ष्मजीवों और उनके अनंत विभाजन का खूबसूरत नजारा पेश किया गया. इसके बाद ब्राजील के अस्तित्व में आने की कहानी तथा जर्मन, स्पेनिस, सीरिया और लेबनान के प्रवासी आंदोलनों की झलक देखने को मिली। दूसरे चरण में समकालीन ब्राजील और उसके शहरीकरण की कहानी को पेश किया गया. इसके अलावा लगभग 1500 लोगों ने परंपरागत ‘बेली चार्म’ पर अपनी प्रस्तुति दी, जिसमें बाद में लगभग 60,000 और लोग शामिल हो गये.

ओलंपिक से शांति को मिलेगा बल : थामस बाक

एथलीटों के ‘मार्च पास्ट’ के बाद थामस बाक और रियो आयोजन समिति के अध्यक्ष कार्लोस आर्थर नुजमन के भाषण के साथ औपचारिक समारोह शुरू हुआ. बाक ने कहा,‘ओलंपिक से शांति को बल मिलेगा. हम लोग संकट, अविश्वास और अनिश्चितता के युग में जी रहे हैं. सर्वश्रेष्ठ 10,000 एथलीट प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और एक ओलंपिक गांव में रह रहे हैं. वे अपने भोजन और भावनाओं को साझा कर रहे हैं. ओलंपिक की इस दुनिया में सबके लिए एक नियम है. हम सभी बराबर हैं.’ उन्होंने साथ कहा, ‘पूरे विश्व के संदर्भ में ओलंपिक के मूल्यों को अनूठा बनाने के लिए मैं सभी एथलीटों से खुद का और दूसरों का सम्मान करने का आह्वान करता हूं. स्वार्थ फैल रहा है, कुछ लोग अपने को श्रेष्ठ बता रहे हैं. ओलंपिक के जरिये उनको हम लोगों का जवाब है.’ तलवारबाजी के पूर्व ओलंपिक चैम्पियन बाक ने इस ओलंपिक में शामिल किये गये शरणार्थियों की ओलंपिक टीम का विशेष तौर पर जिक्र किया. दिग्गज फुटबॉलर पेले को ओलंपिक ज्योति प्रज्वलित करनी थी लेकिन अस्वस्थ होने के कारण वह समारोह में शामिल नहीं हुए.

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