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नक्सलियों के दुष्कर्म के बाद मां बनी लुगनी की व्यथा : चाहती है कोई अपना ले उसके लाल को...

Updated at : 01 Sep 2015 2:24 AM (IST)
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नक्सलियों के दुष्कर्म के बाद मां बनी लुगनी की व्यथा : चाहती है कोई अपना ले उसके लाल को...

यह कैसा समाज है, जहां लुगनी जैसी एक नि:शक्त युवती के साथ दुष्कर्म किया जाता है, वह बिन ब्याही मां बन जाती है. खुद घिसट कर चलती है, तो अपने बच्चे को कैसे पालेगी. अंतत: वह फैसला करती है कि वह अपने बेटे को किसी व्यक्ति या संस्था को गोद दे देगी, ताकि उसका बेटा […]

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यह कैसा समाज है, जहां लुगनी जैसी एक नि:शक्त युवती के साथ दुष्कर्म किया जाता है, वह बिन ब्याही मां बन जाती है. खुद घिसट कर चलती है, तो अपने बच्चे को कैसे पालेगी. अंतत: वह फैसला करती है कि वह अपने बेटे को किसी व्यक्ति या संस्था को गोद दे देगी, ताकि उसका बेटा पढ़ कर सही रास्ते पर चल सके. जिस राज्य में नक्सल घटना पर रोक लगाने के लिए सैकड़ों करोड़ का बजट होता है, उसी राज्य में एक नक्सली के हवस का शिकार बनी लुगनी की सहायता के लिए प्रशासन आगे नहीं आता. न लाल कार्ड, न इंदिरा आवास. हाल ही में हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीरेंदर िसंह ने एक दुष्कर्म पीड़िता की सहायता के लिए जिस प्रकार शनिवार को विशेष अदालत लगा कर निर्णय सुनाया, उससे लुगनी और उस जैसी अनेक पीड़ितों में उम्मीद जगी है.
शिव शंकर साहू, गुड़ाबांदा
जियान की लुगनी (बदला हुआ नाम) जन्मजात विकलांग है. दोनों पैरों से लाचार है और हाथों के सहारे ही चल पाती है. लगभग चार साल पहले एक नक्सली उठा कर उसे ले गया था और उसने उसके साथ दुष्कर्म किया था. वह गर्भवती हो गयी थी. एक बेटे को जन्म दिया था. वह बेटा अब तीन साल का हो गया है. बिन ब्याही लुगनी अब अपने बेटे के भविष्य को लेकर चिंतित है. वह चाहती है कि कोई उसके बेटे को ले जाये और पढ़ा-लिखा कर अच्छा इनसान बना दे. लुगनी कहती है-वह खुद अपना भार नहीं उठा पाती, तो कैसे बेटे को पालेगी. मुझे सिर्फ चार सौ रुपये का विकलांग भत्ता मिलता है, इससे मैं कैसे अपना और अपने बेटे का पेट पालूंगी. अभी तो मैं अपने बुजुर्ग मां-पिता, भाई के साथ रहती हूं. बाद में क्या होगा? जिस नक्सली गुलाछ मुंडा ने उसके साथ दुष्कर्म किया था, उसे गर्भवती बनाया था, उसकी मौत हो चुकी है. जिन दिनों यह घटना घटी थी, पुलिस अधिकारियों ने वादा किया था कि उसे 50 हजार रुपये की सहायता की जायेगी लेकिन उसे सिर्फ दस हजार रुपये मिले, जो तुरंत खत्म हो गये.
घटना 2011 से पहले की है. जिस गुड़ाबांधा के जियान में लुगनी रहती है, वह घोर नक्सल प्रभावित इलाका है. उन्हीं दिनों वहां गुलाछ मुंडा नामक नक्सली को आतंक था. गुलाछ नि:शक्त लुगनी को बंदूक की नोंक पर उठा कर ले गया था. वहां उसके साथ दुष्कर्म किया था. वह विरोध नहीं कर पायी थी. लुगनी के दोनों पैर जन्म से ही खराब हैं. चल नहीं पाती.
लेकिन किसी को भी उस पर दया नहीं आयी. गुलाछ ने एक बार नहीं, कई बार उसके साथ दुष्कर्म किया और वह गर्भवती हो गयी. इसकी जानकारी पुलिस को मिली. 22 जुलाई 2011 को लुगनी के बयान पर गुड़ाबांधा थाने में नक्सली गुलाछ मुंडा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला (कांड संख्या-19/11, भादवि की धारा 376) दर्ज किया गया था. पुलिस उसे प्रसव के लिए जमशेदपुर लेकर गयी थी. वहीं पर एक अस्पताल में लुगनी ने एक बच्चे को जन्म दिया था. पुलिस ने सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन उसे यों ही छोड़ दिया गया.
लुगनी नि:शक्त है, चल नहीं पाती, लेकिन उसके पास ट्राइसाइकिल नहीं है, लाल कार्ड नहीं है, इंदिरा आवास तक नहीं दिया गया है. हां, उसे हर माह विकलांग भत्ता के रूप में 400 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसे लाने के लिए उसे ज्वालकांटा बैंक जाना पड़ता है. काफी दूर है और वहां आने-जाने में ही यह पैसा खर्च हो जाता है, क्योंकि उसे गाड़ी किराये पर लेकर जाना पड़ता है. टाटा मैजिक में बैठ कर जाना पड़ता है, आने-जाने में 400 रुपये खर्च हो जाते हैं. कोल्हान के डीआइजी आरके धान गुड़ाबांधा गये थे. लुगनी के घर भी गये थे, हाल-चाल जानने. उन्होंने भरोसा दिया था कि बेटे की परवरिश में उसकी सहायता की जायेगी. इससे उसे उम्मीद जगी कि कुछ सहायता मिलेगी, लेकिन मिला कुछ नहीं.
अब लुगनी टूट चुकी है. बेटा भी बड़ा हो रहा है. तीन-साढ़े तीन साल का हो गया है. बेटे का भविष्य उसे अधर में दिखता है. वह चाहती है कि बेटा पढ़े,उसका जीवन बने, लेकिन वह लाचार है. इसलिए लुगनी चाहती है कि कोई उसके बेटे को ले जाये, गोद ले ले, ताकि उसके बेटे का भविष्य बन सके. वह कहती है-बेटे को अपने से अलग करना आसान नहीं होगा, लेकिन कोई रास्ता भी नहीं है. बेटे का भविष्य बनाने के लिए वह यह दर्द भी सहने को तैयार है.
रामगढ़ में गिरफ्तार महिला नक्सलियों ने सुनायी थी बेबसी
रामगढ़ पुलिस ने 19 जुलाई को वहां के एक अस्पताल में इलाज कराने आयी दो महिला नक्सली को गिरफ्तार किया था. दोनों ने पुलिस को बताया था कि अगर वे नक्सली दस्ते में शामिल नहीं होती, तो उनकी हत्या कर दी जाती. गरीबी और बेबसी का लाभ उठा कर नक्सली संतोष व दस्ते के अन्य सदस्य दोनों के साथ दुष्कर्म करते थे. विरोध करने पर शादी करने का भी प्रलोभन दिया जाता था.
मुझे किसी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं मिली है. पुलिस ने कहा था कि 50 हजार मिलेंगे, लेकिन सिर्फ 10 हजार मिले. जो आया, सिर्फ आश्वासन दिया. मैं पैरों से लाचार हूं. खुद कुछ काम नहीं कर सकती हूं. गरीब मां-बाप और भाई पर बोझ हूं. बेटे का बोझ कैसे उठाऊंगी. कैसे उसका लालन-पालन करूंगी. अगर कोई व्यक्ति या संस्था मेरे बेटे को गोद लेना चाहे तो मैं गोद देने को तैयार हूं.
लुगनी (दुष्कर्म पीड़िता नि:शक्त
नाम : बदला हुआ) जियान, गुड़ाबांधा, पूर्वी सिंहभूम
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