भारत और चीन मिलकर प्रगति की नयी ऊंचाइयां छू सकते हैं : नरेंद्र मोदी

Updated at : 16 May 2015 3:14 PM (IST)
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भारत और चीन मिलकर प्रगति की नयी ऊंचाइयां छू सकते हैं : नरेंद्र मोदी

शंघाई : भारत और चीन के बीच सहयोग की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि दोनों देश मिलकर गरीबी को दूर करने के लिए विकास की ऐसी नयी ऊंचाइयां छू सकते हैं जिससे सम्पूर्ण विश्व लाभान्वित होगा. क्योंकि दुनिया की एक तिहाई आबादी इन दोनों देशों में बसती है. फूदान विश्वविद्यालय […]

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शंघाई : भारत और चीन के बीच सहयोग की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि दोनों देश मिलकर गरीबी को दूर करने के लिए विकास की ऐसी नयी ऊंचाइयां छू सकते हैं जिससे सम्पूर्ण विश्व लाभान्वित होगा. क्योंकि दुनिया की एक तिहाई आबादी इन दोनों देशों में बसती है.

फूदान विश्वविद्यालय में गांधीवादी एवं भारतीय अध्ययन केंद्र का शुभारंभ करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक और सभ्यता से जुडे संबंध हैं और दोनों मिलकर एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जो मानवता की सेवा कर सके. चीन की यात्रा के अंतिम दिन प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी का जिक्र किया और कहा कि वर्तमान विश्व की आतंकवाद एवं ग्लोबल वार्मिंग जैसी कई समस्याओं का समाधान इनकी शिक्षा में निहित है.

फूदान विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को हिन्दी में संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ’21 वीं शताब्दी एशिया की शताब्दी है. दुनिया की एक तिहाई आबादी इन दोनों देशों में बसती है. इसलिए अगर भारत और चीन मिलकर गरीबी उन्मूलन के लिए काम करते हैं तब एक तिहाई वैश्विक आबादी को इस समस्या से निजात मिल जायेगी और जो पूरे विश्व के लिए फायदेमंद होगी.’

मोदी ने कहा, ‘और इसलिए भारत और चीन मानवता के प्रति संवेदनशीलता एवं भगवान बुद्ध के दर्शन एवं महात्मा गांधी के प्रयोग के साथ प्रगति की नयी ऊंचाइयां छू सकते हैं ताकि हम दुनिया को एक ऐसी व्यवस्था दे सकें जो मानवता के कल्याण के लिए समर्पित हो.’

महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस समय दुनिया दो अहम संकट से गुजर रही है जिसमें ग्लोबल वार्मिंग और आतंकवाद शामिल है. दोनों का समाधान गांधीजी की शिक्षा में निहित है. गांधी अभी भी प्रासंगिक हैं.’ उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी का जन्म भारत के एक हिस्से में हुआ होगा लेकिन वह वैश्विक नागरिक हैं.’

उन्होंने कहा कि शांति के इस दूत ने हमें इस संकट से निकलने का रास्ता दिखाया होता जिससे आज दुनिया गुजर रही है.इस समारोह में चीनी छात्रों ने संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण किया.मोदी ने कहा कि भारतीय दर्शन के मूल में सभी दिशाओं से ज्ञान के प्रवाह को आने देने में निहित है.

उन्होंने कहा, ‘ज्ञान के लिए कोई पूरब या पश्चिम नहीं है. यह वैश्विक है. किसी भी तरह के ज्ञान से मानवता का भला होता है.’ मोदी ने इस दौरान गीता की शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि हर किसी को परिणाम की चिंता किये बिना कर्म करते रहना चाहिए.प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और चीन ज्ञान के आकांक्षी रहे हैं और इस दौरान उन्होंने चीनी यात्री ह्वेन सांग का जिक्र किया.

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