केंद्र सरकार ने साक्षर भारत अभियान के लक्ष्य का आधार 2001 की जनगणना को बनाया है. उस जनगणना में जितने निरक्षर चिह्न्ति किये गये हैं, उनमें से 8} को साक्षर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है. उसी आधार पर झारखंड के 19 जिलों का आरंभिक लक्ष्य लगभग 26 लाख निरक्षर हैं. रामगढ़ जिले को जोड़ देने पर यह संख्या करीब 28 लाख होगी. हालांकि उसके अलावा भी सभी जिलों को अपने यहां की निरक्षर जनसंख्या का पता लगाने के लिए विशेष सर्वे कराने का दायित्व दिया गया. वर्ष 2010 से यह सर्वे अलग-इलग जिलों में शुरू हुआ, लेकिन सभी जिलों का आंकड़ा अब तक साक्षर भारत मिशन के पोर्टल पर अप लोड नहीं किया गया है. अनुमान है कि अगर सभी जिलों के आंकड़ों को जोड़ दिया जाये, तो राज्य के करीब 55 लाख आबादी को इस अभियान के तहत साक्षर बनाने का लक्ष्य सामने आयेगा.
लक्ष्य समूह
साक्षर भारत अभियान के तहत चार स्तर के महिला-पुरुषों को साक्षर बनाना है.
ऐसे लोग, जो पूर्ण रूप से असाक्षर हैं
ऐसे लोग, जो साक्षर हुए थे, लेकिन पूर्व की स्थिति में लौट गये.
ऐसे लोग, जिन्होंने एक -दो कक्षा तक पढ़ाई के बाद विद्यालय छोड़ दिया.
ऐसे लोग, जो कभी स्कूल नहीं गये, लेकिन अक्षर पहचान सकते हैं.
स्वैच्छिक शिक्षा केंद्र
साक्षर भारत मिशन का लक्ष्य जितना बड़ा है, उस हिसाब से केवल लोक शिक्षा केंद्र के भरोसे इस कार्यक्रम को सफल नहीं किया जा सकता है. लोक शिक्षा केंद्र पंचायत स्तर पर हैं. इसलिए गांव स्तर पर वीटी आधारित साक्षरता केंद्र बनाने का प्रावधान है. इसमें गांव स्तर पर वीटी यानी वोलेंटियर टीचर (स्वयं सेवी शिक्षक) को इस अभियान से जोड़ा जाये. एक वीटी पर दस असाक्षरों को साक्षर बनाने का दायित्व है. इस तरह एक गांव में असाक्षरों की संख्या के आधार पर 10 से 20 वीटी साक्षरता केंद्र चल सकते हैं. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहां उतने वीटी हैं या नहीं, क्योंकि वीटी को कोई मानदेय नहीं मिलना है. वे स्वेच्छा से समाज और राष्ट्र के हित में अक्षर दान करोंगे. उन्हें हर दिन दो से तीन घंटे असाक्षरों को पढ़ाना है. उन्हें केवल पाठय़ सामग्री जिला साक्षरता समिति देती है. इसमें उनके अधीन पढ़ने वाले असाक्षरों की संख्या के आधार पर पेंसिल, रबड़, कटर, चॉक, डस्टर, अभ्यास पुस्तिका, प्राइमर, रजिस्टर आदि उपलब्ध करायी जानी है. झारखंड में अभी वीटी केंद्र शुरू नहीं हुए हैं. वीटी केंद्रों के लिए प्राइमर राज्य मुख्यालय से छाप कर भेजी जानी है. राज्य में अभी तक इतनी संख्या में प्राइमर तैयार नहीं हुए हैं. इसलिए अभी साक्षर भारत अभियान लोक शिक्षा केंद्र तक ही सीमित है.
वीटी साक्षरता केंद्र में बाधा
दरअसल सभी जिलों को अपने असाक्षर लोगों की सर्वे कर उनके नाम के साथ पूरी सूची को साक्षर भारत के पोर्टल पर अप लोड किया जाना था. यह काम अभी हुआ नहीं है. इस बार के साक्षरता कार्यक्रम में एक और अनोखापन है. प्रत्येक शिशिक्षु (ऐसे असाक्षर, जिन्हें साक्षर बनाया जाना है) को एक यूनिक कोर्ड दिया गया है. उसी तरह प्रेरण को भी यूनिक कोर्ड मिला हुआ है. दोनों के नाम और कोड नंबर पोर्टल पर दिये गये हैं. इसमें किसी तरह का दुहराव या अनाधिकृत रूप से किसी का नाम शामिल करने जैसी घटना स्वीकार नहीं होगी. आप भी चाहें, तो उन्हें साक्षर भारत के पोर्टल पर जोकर ट्रैक कर सकते हैं यानी उसके बारे में पता कर सकते हैं. चूंकि झारखंड में यह काम पूरा नहीं हुआ है. इसलिए शिशिक्षु और वीटी का ग्रुप नहीं बन पा रहा है. दूसरा के अभी राज्य संसाधन केंद्र यह तय नहीं कर पा रहा है कि उसे वीटी आधारित साक्षरता केंद्र पर उसे कितने प्राइमर की जरूरत है.
तीन स्तर की परीक्षा आठवीं कक्षा के बराबर
साक्षर भारत मिशन का लक्ष्य असाक्षरों को आठवीं कक्षा के सफल विद्यार्थी के बराबर योग्यता दिलाना है. इसके लिए साक्षरता और शिक्षा के तीन स्तर बनाये गये हैं. हर स्तर की क्षमता के आकलन के लिए परीक्षा भी ली जाती है.
साल में दो बार परीक्षा
संपूर्ण साक्षरता अभियान में नव साक्षरों की क्षमता के आंकलन के लिए कोई औपचारिक परीक्षा आयोजित नहीं की जाती थी. साक्षर भारत मिशन में असाक्षरों को साक्षर बनाने के साथ-साथ उनकी क्षमता के आंकलन के लिए परीक्षा भी ली जाती है. यह परीक्षा साल में दो बार होती है. आम तौर पर 06 मार्च और 25 अगस्त को परीक्षा होती है. यह पूरे देश में एक साथ आयोजित होती है. परीक्षा का संचालन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयीय शिक्षा संस्थान (एनआइओसी) करता है. परीक्षा पास करने वालों को इस आशय का प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है. 2010 से देश में यह परीक्षा आयोजित हो रही है. अब तक सात बार परीक्षा हुई है. झारखंड के अब तक सात लाख शिशिक्षु (लर्नर) इन परीक्षाओं में शामिल हुए हैं.
हर स्तर की समकक्षता तय
साक्षर भारत मिशन के तहत तीन स्तर की परीक्षा आयोजित की जाती है. पहले स्तर की परीक्षा जो नव साक्षर पास कर लेता है, तो यह माना जाता है कि उसने तीसरी कक्षा तक की समक्षता प्राप्त कर ली. यानी एक परीक्षा के जरिये असाक्षर व्यक्ति तीसरी कक्षा तक की योग्यता प्राप्त कर सकता है और उसे इस आशय का प्रमाण-पत्र भी मिलता है. पहले स्तर की परीक्षा पास करने के बाद नव साक्षर को दूसरे स्तर में प्रोन्नति मिल जाती है. दूसरे स्तर का पाठ पूरा करने के बाद उन्हें इस स्तर की परीक्षा में शामिल अवसर होने का अवसर दिया जाता है. दूसरे स्तर की परीक्षा में सफल होने वाले नव साक्षर पांचवीं कक्षा तक की समक्षता हासिल कर लेते हैं. यानी एक साथ दो कक्षा की शैक्षणिक क्षमता का उनमें विकास किया जाता है. इसके बाद वे तीसरे स्तर में प्रोन्नति प्राप्त कर लेते हैं. इस स्तर की शिक्षा के लिए भी प्राइमर तैयार किया जाना है. वह इस तरह का प्राइमर होगा, जो लर्नर में आठवीं कक्षा के विद्यार्थी के बराबर क्षमता का विकास करेगा. इस पाठय़ क्रम को पूरा करने के बाद उन्हें तीसरे स्तर की परीक्षा में शामिल किया जायेगा. इस परीक्षा को जब वे पास कर लेंगे, तब यह मान लिया जायेगा कि वे आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी करने वाले सफल विद्यार्थी की श्रेणी में आ गये हैं. यानी साक्षर भारत मिशन देश भर के निरक्षरों को मिडिल पास बनाना चाहता है. हालांकि झारखंड में अभी यह मिशन प्राथमिक अवस्था में ही है. अब तक केवल एक सौ महिना नव साक्षरों को द्वितीय स्तर की परीक्षा में शामिल कराया जा सकता है, जिनमें से 89 सफल रही हैं, लेकिन यह पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा थीं.
जिलों में प्रशिक्षण होगा शुरू
राज्य संसाधन केंद्र आद्री के मुताबिक जल्द ही राज्य के 12-13 जिलों में वीटी का प्रशिक्षण कार्य शुरू होगा. इस मद की राशि प्राप्त हो चुकी है. प्रशिक्षण के बाद इस स्तर पर भी साक्षरता केंद्र शुरू हो सकेंगे. एक गांव में 10-20 वीटी आधारित साक्षरता केंद्र हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए तकनीकी रूप से तैयारी जरूरी है.
पायलट प्रोजेक्ट
आद्री ने कुछ जिलों में चारों कंपोनेंट को लेकर पायलट प्रोजक्ट भी चलाया है. इसमें राज्य के सारक्षता मिशन वाले सभी 19 जिले शामिल नहीं हैं. हालांकि यह कार्यक्रम समेकित रूप में राज्य के सभी 19 (जल्द ही 20) जिलों में चलना है.
साक्षर भारत मिशन के पोर्टल पर सूचना
साक्षर भारत मिशन के पोर्टल पर आप अपनी पंचायत के असाक्षरों, प्रेरक और वीटी आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. पोर्टल पर आप सिटीजन यूजर्स को क्लिक करें. आपके सामने सभी विकल्प खुल जायेंगे कि आप किस तरह की जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं. जैसे हाउस होल्ड सर्वे, प्रेरक सर्वे, वीटी सर्वे, ग्राम पंचायत प्रोफाइल आदि.
सूचना का अधिकार का करें इस्तेमाल
साक्षर भारत अभियान से जुड़े मामलों में अगर आपको लगता है कि किसी स्तर पर गोपनीयता या अनियमितता बरती जा रही है, तो आप सूचना का अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं. आप सचिव, जिला साक्षरता समिति से संबंधित विषय की सूचना मांग सकते हैं.

