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भारत को राफेल बिक्री पर पेरिस में आज उच्च स्तरीय बैठक

Updated at : 13 Apr 2015 9:21 AM (IST)
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भारत को राफेल बिक्री पर पेरिस में आज उच्च स्तरीय बैठक

पेरिस/नयी दिल्ली : फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलोंद भारत को 36 राफेल लडाकू विमानों की बिक्री संबंधी पांच अरब डालर के करार की बारिकियों पर आज पेरिस में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि ऐलिसी पैलेस में ओलोंद, उनके शीर्ष अधिकारियों और राफेल विमानों की विनिर्माता कंपनी देसाल्ट ऐविएशन के […]

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पेरिस/नयी दिल्ली : फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलोंद भारत को 36 राफेल लडाकू विमानों की बिक्री संबंधी पांच अरब डालर के करार की बारिकियों पर आज पेरिस में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि ऐलिसी पैलेस में ओलोंद, उनके शीर्ष अधिकारियों और राफेल विमानों की विनिर्माता कंपनी देसाल्ट ऐविएशन के अधिकारियों के बीच बैठक होगी. फ्रांस की अपनी चार दिवसीय यात्रा कल संपन्न करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण संचालनात्मक जरुरत को देखते हुए जल्द से जल्द 36 राफेल विमानों की आपूर्ति करने के लिए फ्रांस से कहा था. उन्होंने विमानों को ऐसी स्थिति में सौंपे जाने को कहा था जिससे कि वह तुरंत उडान भर सकें. यह करार दोनों देशों की सरकारों के बीच होगा.

सूत्रों ने बताया, ‘‘ जब दोनों नेताओं ने राफेल के बारे में बातचीत की तो उस समय भारतीय या फ्रांसीसी पक्ष की ओर से कोई मौजूद नहीं था. सब को सोमवार को विस्तार से बताया जाएगा कि क्या बातचीत हुई तथा इस पर चर्चा होगी कि इसे आगे कैसे ले जाया जाए.’’ रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा है कि दो साल में 36 राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाएगा. सूत्रों ने बताया कि दो साल का समय सही है क्योंकि अंतिम करार पर बातचीत और उस पर हस्ताक्षर करने की जरुरत है. साथ ही विमानों के निर्माण में भी समय लगेगा. देसाल्ट संयंत्र की क्षमता प्रति वर्ष 36 विमानों के उत्पादन की है और इस विमान के भारतीय संस्करण को उसकी जरुरतों के अनुरुप तैयार करना होगा. सूत्रों ने विमानों की आपूर्ति के लिए विशेष समय सीमा तय किए जाने के साथ ही कहा, ‘‘ फ्रांस के पास पहले से ही मिस्र की ओर से 24 राफेल विमानों का आर्डर है जिसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना है.’’ इसमें एक विकल्प यह तलाशा जा रहा है कि फ्रांसीसी सेना के आर्डर को रोक कर इन विमानों को भारत की तत्काल जरुरतों को पूरा करने के लिए दिया जाए.

बैठक में एक अन्य मुद्दा कीमतों का भी रहेगा और साथ ही इस पर भी विचार किया जाएगा कि क्या फ्रांसीसी सरकार भारत को विमानों की आपूर्ति कम कीमत पर करने के लिए देसाल्ट को कोई कर छूट या किसी अन्य तरह की छूट उपलब्ध कराएगी. मोदी और ओलोंद ने उन शर्तो पर विमानों की आपूति के लिए अंतर सरकारीय समझौते को संपन्न करने पर सहमति जतायी थी जो देसाल्ट एविएशन की शर्तो से बेहतर और एमएमआरसीए टेंडर से अलग प्रक्रिया होगी. फ्रांस में आम धारणा यह है कि 36 विमानों का आर्डर 126 विमानों के लिए एमएमआरसीए टेंडर से अलग है जिसके बारे में उनका मानना है कि उस पर बातचीत जारी रहेगी.

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि 36 विमान एमएमआरसीए करार के अतिरिक्त होंगे या इन्हें जारी वार्ता के भीतर ही समायोजित किया जाएगा. मूल करार के तहत 18 विमानों की आपूर्ति की जानी थी तथा बाकी 108 का निर्माण सरकारी हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाना था. बातचीत कीमत तथा देसाल्ट द्वारा एचएएल द्वारा विनिर्मित किए जाने वाले विमानों की गारंटी से इंकार करने को लेकर रुकी पडी है. शुरुआत में एमएमआरसीए करार दस अरब डालर का था लेकिन अब इसकी कीमत बढकर 20 अरब डालर हो चुकी है.

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