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डॉक्यूमेंटरी को प्रतिबंध करने के भारत के फैसले का उल्टा असर हुआ : अमेरिकी समूह

Updated at : 07 Mar 2015 3:41 PM (IST)
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डॉक्यूमेंटरी को प्रतिबंध करने के भारत के फैसले का उल्टा असर हुआ : अमेरिकी समूह

न्यूयार्क : अमेरिकी के प्रमुख लेखकों के एक समूह ने कहा है कि दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले पर बीबीसी की डॉक्यूमेंटरी को प्रतिबंधित करने के भारत सरकार के फैसले का ‘उल्टा असर’ हुआ है और दरअसल, फिल्म को प्रतिबंधित करने के प्रयास ने महिला अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर एक व्यापक बहस […]

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न्यूयार्क : अमेरिकी के प्रमुख लेखकों के एक समूह ने कहा है कि दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले पर बीबीसी की डॉक्यूमेंटरी को प्रतिबंधित करने के भारत सरकार के फैसले का ‘उल्टा असर’ हुआ है और दरअसल, फिल्म को प्रतिबंधित करने के प्रयास ने महिला अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर एक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है. पेन अमेरिकन सेंटर ने कहा कि डॉक्यूमेंटरी ‘स्टोरीविले : इंडियाज डॉटर’ पर भारत सरकार की रोक सार्वजनिक हित से जुडे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगाम लगाने का एक ‘चिंताजनक प्रयास’ है.

पेन अमेरिकन सेंटर की कार्यकारी निदेशक सुजेन नोसेल ने एक बयान में कहा, ‘फिल्म को दबाने की भारत सरकार की कोशिश का बिल्कुल उल्टा असर हुआ है और इसने जटिल सवालों पर व्यापक घरेलू और वैश्विक बहस को जन्म दिया है.’ नोसेल ने कहा कि फिल्म के गुण दोषों पर बहस करना और यदि इसकी विषयवस्तु में मामले को गलत ढंग से पेश किया गया हो तो इस पर जोर शोर से आवाज उठना बिल्कुल जायज हैं. जिन लोगों ने फिल्म देखना तय किया है उन्हें इस महत्वपूर्ण विषय पर अपनी राय बनाने और अपना विचार रखने की आजादी होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘यदि लोग फिल्म के संदेश से असहमत हैं तो वे या तो इसका खंडन कर सकते हैं या फिर इसकी निंदा कर सकते हैं, लेकिन वे इसे प्रतिबंधित करने पर जोर नहीं देंगे.’ पेन अमेरिकन सेंटर ने वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट यूट्यूब और भारत में प्रभावित अन्य सभी मीडिया संगठनों से इस डॉक्यूमेंटरी को हर संभव मुफ्त मुहैया कराने और इस बेबुनियाद रोक के खिलाफ भारत की अदालत में चुनौती देने का आग्रह किया है, जो अभिव्यक्ति की आजादी पर देश के खुद के घरेलू कानूनी प्रावधानों सहित अभिव्यक्ति की आजादी को बढावा देने के इसके अंतरराष्ट्रीय दायित्वों से मेल नहीं खाती.

ब्रितानी फिल्मकार लेस्ली उडविन की यह डॉक्यूमेंटरी दिसंबर 2012 में दिल्ली में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा के साथ हुए बर्बर दुष्कर्म और उसकी हत्या पर केंद्रित है. फिल्म में पीडिता के परिवार के सदस्यों, बलात्कारियों और बचाव पक्ष के वकीलों की विस्तृत फुटेज और साक्षात्कारों को शामिल किया गया है जिसका उद्देश्य भारत में महिलाओं को लेकर मौजूदा दृष्टिकोण की विस्तार से तहकीकात करना है.

डॉक्यूमेंटरी में उडविन और बीबीसी की ओर से बस चालक मुकेश सिंह का एक साक्षात्कार भी रखा गया है. 16 दिसंबर 2012 को इसी बस में छह लोगों ने छात्रा के साथ बर्बर दुष्कर्म किया था. दिल्ली पुलिस ने कहा कि मुकेश ने इसमें महिलाओं के खिलाफ बहुत अपमानजनक बयान दिए हैं.

डॉक्यूमेंटरी को ब्रिटेन में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रसारित किया जाना था, लेकिन भारत सरकार के दुनियाभर में इसकी रिलीज को प्रतिबंधित करने के प्रयासों के कारण इसे बुधवार की रात में ही प्रसारित कर दिया गया. बीबीसी की ओर से इसे स्टोरीविले वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने के बाद भारत की सरकारी एजेंसियों ने यूट्यूब को फिल्म हटाने का निर्देश दिया है. आलोचकों की शिकायत है कि यह फिल्म अन्य चिंताओं के बीच भारत की नकारात्मक छवि उकेरती है.

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