सबरीमाला मंदिर मामला: सुप्रीम कोर्ट में नौ सदस्यों की बेंच का गठन

<figure> <img alt="चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे" src="https://c.files.bbci.co.uk/6717/production/_110419362_f7227253-6aac-4060-bd71-b791b207b736.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे</figcaption> </figure><p>सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ जजों की बेंच का गठन किया है. इस बेंच की अध्यक्षता चीफ़ जस्टिस एस.ए. बोबडे करेंगे.</p><p>बेंच में शामिल अन्य जज हैं- जस्टिस आर. भानुमति, एल. नागेश्वर […]
<figure> <img alt="चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे" src="https://c.files.bbci.co.uk/6717/production/_110419362_f7227253-6aac-4060-bd71-b791b207b736.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे</figcaption> </figure><p>सबरीमाला मंदिर मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ जजों की बेंच का गठन किया है. इस बेंच की अध्यक्षता चीफ़ जस्टिस एस.ए. बोबडे करेंगे.</p><p>बेंच में शामिल अन्य जज हैं- जस्टिस आर. भानुमति, एल. नागेश्वर राव, अशोक भूषण, मोहन एम. शांतनागौडर , एस. अब्दुल नज़ीर, आर. सुभाष रेड्डी, बी.आर. गवई और सूर्य कांत.</p><p>2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाज़त दे दी थी.</p><p>इससे पहले सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में फैसला देने वाले जस्टिस आर.एफ़. नरीमन और डी.वाई. चंद्रचूड़ नई बेंच में शामिल नहीं हैं. इसके साथ ही जस्टिस इंदू मल्होत्रा भी नई बेंच में नहीं हैं. वह महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में नहीं थीं.</p><figure> <img alt="सबरीमाला" src="https://c.files.bbci.co.uk/B537/production/_110419364_7ee9f4ee-5ec8-4cca-9d0d-0de4cf4dc960.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><p>इस साल नवंबर में इस संबंध में आईं कई याचिकाओं को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नौ जजों की बड़ी बेंच के पास भेजा था. </p><p>अब नई बेंच को इस मामले की फिर से समीक्षा करनी है और साथ ही मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के ख़तना और ग़ैर-पारसियों से शादी करने वाली पारसी महिलाओं को पवित्र मंदिर में प्रवेश पर रोक के मुद्दों को भी देखना है.</p><p><strong>जेएनयू के वीसी </strong><strong>बोले</strong><strong>- हिंसा समाधान नहीं</strong></p><figure> <img alt="जगदीश कुमार" src="https://c.files.bbci.co.uk/7257/production/_110417292_gettyimages-615875128.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>जेएनयू के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने कहा है कि रविवार पाँच जनवरी को हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है.</p><p>उन्होंने कहा, "हमारा कैम्पस किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए विचार विमर्श और चर्चा के लिए जाना जाता है. हिंसा समाधान नहीं है. हम विश्वविद्यालय में सामान्य स्थिति लौटाने के लिए हर क़दम उठाएँगे."</p><p>जगदीश कुमार ने कहा कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया फिर से शुरू हो गई है और विंटर सेमेस्टर के लिए छात्र रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. </p><p>उन्होंने कहा- चलिए बीती बात भूलकर नई शुरुआत करते हैं. </p><h1>आइशी पर एफ़आईआर</h1><p>जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बीती 5 जनवरी को हिंसक घटनाएं सामने आने के बाद जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष समेत कुछ अन्य लोगों के ख़िलाफ़ वसंत कुंज उत्तर थाने में एफआईआर होने की ख़बरें आ रही हैं. </p><figure> <img alt="आईशी घोष" src="https://c.files.bbci.co.uk/B5E1/production/_110416564_gettyimages-1192227878.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>आईशी घोष</figcaption> </figure><p>हालांकि, इस एफ़आईआर का 5 तारीख़ को हुई हिंसक घटनाओं से ताल्लुक नहीं है. </p><p>दिल्ली दक्षिण-पश्चिम ज़िले के डीसीपी देवेंद्र आर्या ने बीबीसी से बात करते हुए इसकी पुष्टि की है. </p><p>उन्होंने कहा, "इस एफ़आईआर का हिंसक घटनाओं से कोई संबंध नहीं है. इन लोगों के ख़िलाफ़ जेएनयू प्रशासन की ओर से तीन जनवरी को शिकायत की गई थी. इसके बाद चार जनवरी को आइशी घोष समेत कई लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है."</p><p>डीसीपी देवेंद्र आर्य ने ये भी कहा कि रविवार के बाद से जेएनयू में हिंसा की एक भी घटना सामने नहीं आई है.</p><p>उन्होंने कहा, ”हालात अब पूरी तरह से पुलिस और प्रशासन के काबू में हैं.”</p><h3>दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के हाथ कमान</h3><p>आर्य ने कहा रविवार की घटना को लेकर अभी तक सिर्फ़ एक ही एफ़आईआर हुई है जिसमें दंगा और सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने से सम्बन्धित धाराएं लगाई गई हैं.</p><p>उन्होंने कहा, ”बाकी दो एफ़आईआर, जिनकी मीडिया में बात हो रही है, वो तीन और चार जनवरी की हैं. उनमें जेएनयू के सर्वर को ऩुकसान पहुंचाने जाने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है.”</p><p>आर्य ने कहा कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच स्थानीय टीम की मदद से हिंसा की जांच कर रही है और जल्दी ही इस बारे में ज़्यादा जानकारी साझा की जाएगी.</p><p>पाँच जनवरी की शाम को जेएनयू में नक़ाबपोश लोगों के हमले में आइशी घोष को गंभीर चोट आई थी और उनके सिर पर कई टाँके लगाने पड़े थे.</p><p>हमले में आइशी और अन्य छात्रों समेत 34 लोग घायल हो गए थे जिन्हें दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर से सोमवार सुबह डिस्चार्ज कर दिया गया.</p><p><strong>ये भी पढ़ें</strong><strong>: </strong><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51006654?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जेएनयू में हिंसा का राज़ व्हाट्सएप इनवाइट लिंक में?</a></p><h3>नक़ाबपोशों की पहचान नहीं</h3><p>इस बीच हमले को दो दिन बाद भी हमलावर नक़ाबपोशों की पहचान नहीं हो पाई है.</p><p>रविवार शाम कई नक़ाबपोश हमलावरों ने जेएनयू हॉस्टलों में जाकर तोड़-फोड़ की और छात्रों पर हमला किया. </p><p>हिंसा के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और वामपंथी छात्र संगठन हिंसा के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाए हैं.</p><p>जेएनयू पिछले कुछ महीनों से उथल-पुथल का केंद्र बना रहा है. </p><p>पिछले महीने ही फ़ीस वृद्धि और हॉस्टल मैनुअल में बदलाव का विरोध कर रहे कई छात्र दिल्ली पुलिस की पिटाई में घायल हुए थे.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप 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