अभिजीत विनायक बनर्जीः अर्थशास्त्री जो फ़िजिक्स पढ़ना चाहता था

Updated at : 14 Oct 2019 10:38 PM (IST)
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अभिजीत विनायक बनर्जीः अर्थशास्त्री जो फ़िजिक्स पढ़ना चाहता था

<figure> <img alt="अभिजीत बनर्जी" src="https://c.files.bbci.co.uk/F553/production/_109230826_hi057296949-1.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BRYCE VICKMARK/MIT/AFP/Getty Images</footer> </figure><p>पूत के पाँव पालने में ही नज़र आने लगे. </p><p>हिंदी की ये मशहूर कहावत प्रोफ़ेसर अमर्त्य सेन के बाद अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय अभिजीत विनायक बनर्जी के साथ हुबहू खरी उतरती है. </p><p>कोलकाता के आभिजात्य साउथ प्वॉयंट स्कूल में पढ़ाई […]

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<figure> <img alt="अभिजीत बनर्जी" src="https://c.files.bbci.co.uk/F553/production/_109230826_hi057296949-1.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BRYCE VICKMARK/MIT/AFP/Getty Images</footer> </figure><p>पूत के पाँव पालने में ही नज़र आने लगे. </p><p>हिंदी की ये मशहूर कहावत प्रोफ़ेसर अमर्त्य सेन के बाद अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय अभिजीत विनायक बनर्जी के साथ हुबहू खरी उतरती है. </p><p>कोलकाता के आभिजात्य साउथ प्वॉयंट स्कूल में पढ़ाई के दौरान अभिजीत अपने घर के पास बनी बस्ती के बच्चों के साथ खेलते थे. </p><p>ग़रीबी की वजह से वह बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे. ये देख कर अभिजीत के दिल में टीस उठती थी और वह अपने माता-पिता के साथ इस बात पर अक्सर चर्चा करते थे. </p><p>स्कूल नहीं जाने की वजह से बस्ती के तमाम बच्चे पूरे दिन खेलते रहते थे और किसी भी खेल में अभिजीत को पलक झपकते हरा देते थे. </p><p>उन बच्चों के रवैये ने अभिजीत के बाल मन में कई सवालों को जन्म दिया था. शायद उन सवालों के जवाब तलाशने की बेचैनी ने ही अभिजीत को नोबेल तक पहुंचाया है.</p><figure> <img alt="अभिजीत की मां निर्मला बनर्जी" src="https://c.files.bbci.co.uk/1669B/production/_109230819_img-20191014-wa0020.jpg" height="1301" width="976" /> <footer>Sanjay Das/BBC</footer> <figcaption>अभिजीत की मां निर्मला बनर्जी</figcaption> </figure><h1>अभिजीत की मां ने क्या कहा</h1><p>कोलकाता में रहने वाली अभिजीत की मां निर्मला बनर्जी, जो खुद अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर रही हैं, बताती हैं, &quot;अभिजीत को नोबेल मिलने की उम्मीद मैंने नहीं की थी. दोपहर दो-ढाई बजे छोटे बेटे ने फोन पर कहा कि मां टीवी ऑन करो. उसके बाद ही मुझे इसका पता चला.&quot; </p><p>निर्मला कहती हैं, &quot;अभिजीत सिर्फ़ मेरा ही नहीं, पूरे देश का बेटा है. उस पर पूरे देश को गर्व है.&quot; </p><p>वह बताती हैं कि अभिजीत के स्कूल में रहने के दौरान हम जिस मकान में रहते थे वहां पास ही एक बस्ती थी. अभिजीत वहां के बच्चो के साथ सड़क पर खेलता था. वह उसी समय उनकी आर्थिक-सामाजिक स्थिति बारे में कई सवाल पूछता रहता था.</p><figure> <img alt="कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी" src="https://c.files.bbci.co.uk/0AF3/production/_109230820_presidencyuniversity-1.jpg" height="650" width="976" /> <footer>Sanjay Das/BBC</footer> <figcaption>कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी</figcaption> </figure><p><strong>पहले </strong><strong>फ़िजिक्स </strong><strong>पढ़ना चाहते थे…</strong></p><p>अभिजीत को नोबेल पुरस्कार मिलने का एलान होने के बाद से ही कोलकाता में उनके बालीगंज स्थित घर पर बधाई देने वालों और मीडिया के लोगों का तांता लगा है. </p><p>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, प्रोफेसर अमर्त्य सेन और राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत सैकड़ों लोगों ने इसे बंगाल और पूरे देश के लिए गर्व बताते हुए अभिजीत को बधाई दी है.</p><p>ये जानना दिलचस्प होगा कि जिस व्यक्ति को अर्थशास्त्र में नोबेल मिला है वो पहले फिजिक्स यानी भौतिक विज्ञान की पढ़ाई करना चाहता था. </p><p>लेकिन प्रयोगशाला में छोटे-छोटे प्रयोग पसंद नहीं आए तो उसने सांख्यिकी पढ़ने का फैसला किया. इसके लिए उसने बाकायदा एक कालेज में दाखिला भी ले लिया. </p><p>लेकिन घर से कॉलेज की दूरी ज्यादा होने की वजह से बाद में उस छात्र अभिजीत ने प्रेसीडेंसी कालेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने का फैसला किया. </p><p>उसके बाद उसने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा. </p><figure> <img alt="अभिजीत की मां निर्मला बनर्जी" src="https://c.files.bbci.co.uk/8023/production/_109230823_hi057294645.jpg" height="650" width="976" /> <footer>REUTERS/Rupak De Chowdhuri </footer> <figcaption>निर्मला बनर्जी के हाथों में बेटे अभिजीत की किताब</figcaption> </figure><h1>माता-पिता दोनों अर्थशास्त्र के प्रोफेसर</h1><p>अभिजीत की मां बताती हैं, &quot;सांख्यिकी कॉलेज घर से दूर होने की वजह अभिजीत को दूसरी गतिविधियों के लिए समय ही नहीं मिल पाता था. लिहाजा उसने प्रेसीडेंसी कॉलेज में दाखिला लेने का फैसला किया.&quot; </p><p>घर का माहौल तो अर्थशास्त्रमय था ही. पिता दीपक बनर्जी प्रेसीडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे, जो बाद में विभागाध्यक्ष बने. </p><p>मां निर्मला बनर्जी भी एक कालेज में अर्थशास्त्र पढ़ाती थीं. तो क्या माता-पिता के कहने या दबाव पर ही अभिजीत ने अर्थशास्त्र की राह चुनी. </p><p>इस सवाल पर निर्मला बताती हैं, &quot;हमने अभिजीत पर कभी अपनी इच्छा नहीं थोपी. उसे अपने पसंदीदा विषय की पढ़ाई का अधिकार था. उसने वही किया जो उसे उचित लगा.&quot;</p><p><a href="https://www.youtube.com/watch?v=qFZAnZ0zNi8">https://www.youtube.com/watch?v=qFZAnZ0zNi8</a></p><h1>साल 2017 में अमरीका की नागरिकता</h1><p>अभिजीत की खासियत क्या है? इस सवाल पर उनकी मां बताती हैं कि अर्थशास्त्र के गूढ़ सिद्धांतों को भी सरल भाषा में समझाना और बताना ही उसकी खासियत है. </p><p>उन्होंने बताया कि अभिजीत ने काफी बेमन से वर्ष 2017 में अमरीका की नागरिकता ली थी. लेकिन दिल से वह पूरी तरह भारतीय है.</p><p>प्रेसीडेंसी कालेज में अभिजीत के शिक्षक रहे शैवाल कर बताते हैं, &quot;अभिजीत अपनी कक्षा में काफी दिलचस्पी लेते थे. अर्शाशास्त्र की उनकी समझ बाकी छात्रों से बेहतर थी. कोई सवाल समझ में नहीं आने पर वह बार-बार पूछते थे.&quot;</p><p>जाने-माने अर्थशास्त्री अजिताभ राय चौधरी अभिजीत के पिता दीपक बनर्जी के मित्र थे. </p><p>वह बताते हैं, &quot;अभिजीत मेरे सामने ही बड़ा हुआ. वह शुरू से ही गरीबी और समाज में कायम असामनता को लेकर सोचता रहता था. उसकी इस सोच ने ही आज उसे इस मुकाम तक पहुंचाया है.&quot; </p><figure> <img alt="कोलकाता की प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी" src="https://c.files.bbci.co.uk/167D1/production/_109231129_presidencyuniversity-5.jpg" height="650" width="976" /> <footer>Sanjay Das/BBC</footer> </figure><h1>राष्ट्र का सम्मान</h1><p>अजिताभ कहते हैं कि अभिजीत ने गरीबी दूर करने की दिशा में अपने शोध और सर्वेक्षणों के जरिए आम लोगों, समाज और अर्थशास्त्रियो पर एक गहरी छाप छोड़ी है.</p><p>अभिजीत को प्रेसीडेंसी कॉलेज से नोबेल पुरस्कार तक का सफर तय करने के दौरान निजी जीवन में कई झंझावातों का भी सामना करना पड़ा है. </p><p>पहले पत्नी डॉक्टर अरुंधती तुली बनर्जी से तलाक हुआ. उसके बाद इस दंपति की एकमात्र संतान कबीर बनर्जी का भी असामयिक निधन हो गया. </p><p>लेकिन ये झटके भी अभिजीत को गरीबी के मुद्दे पर काम जारी रखने के उनके लक्ष्य से नहीं भटका सके. </p><p>साल 1981 में प्रेसीडेंसी कॉलेज से ग्रैजुएशन के बाद 1983 उन्होंने दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमए किया और 1983 में डॉक्टरेट के लिए अमरीका चले गए. </p><p>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने एक ट्वीट में अभिजीत को बधाई देते हुए कहा है कि एक और बंगाली ने नोबेले हासिल कर राष्ट्र का सम्मान बढ़ाया है. हम बेहद खुश हैं.</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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