नासा की तस्वीर जारी होने के बाद चंद्रयान-2 मिशन को कितना सफल माना जाए?

Updated at : 27 Sep 2019 10:54 PM (IST)
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नासा की तस्वीर जारी होने के बाद चंद्रयान-2 मिशन को कितना सफल माना जाए?

<p>नासा द्वारा जारी की गई चंद्रमा की सतह की तस्वीरों से पुष्टि हो गई है कि भारत का प्रमुख चंद्रमा मिशन चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ चिन्हित की गई जगह पर नहीं है. </p><p>यह तस्वीर कम रोशनी के वक़्त ली गई है नासा अगले महीने फिर तस्वीरें लेगा. </p><p>लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) कह रहा […]

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<p>नासा द्वारा जारी की गई चंद्रमा की सतह की तस्वीरों से पुष्टि हो गई है कि भारत का प्रमुख चंद्रमा मिशन चंद्रयान-2 का लैंडर ‘विक्रम’ चिन्हित की गई जगह पर नहीं है. </p><p>यह तस्वीर कम रोशनी के वक़्त ली गई है नासा अगले महीने फिर तस्वीरें लेगा. </p><p>लेकिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) कह रहा है कि चंद्रयान-2 को असफल नहीं कहा जा सकता है. वह अपने चेयरमैन डॉ. के. सिवन के उस बयान के साथ खड़ा है जिसमें उन्होंने कहा था कि यह मिशन 98 फ़ीसदी तक सफल रहा है. </p><p>अब तक यह सवाल बरक़रार है कि लैंडर ‘विक्रम’ कहां है हालांकि फिर इसरो के इस दावे की क्या हक़ीक़त है कि यह मिशन 98 फ़ीसदी सफल है? </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-49848164?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">चांद पर हुई थी ‘विक्रम’ की हार्ड लैंडिंग, नासा ने जारी की नई तस्वीरें</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-49637079?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">इसरो के ‘विक्रम लैंडर’ की वायरल तस्वीर का सच</a></li> </ul><h1>डाटा से पता होता है सफलता</h1><p>इसरो के एक वैज्ञानिक ने अपनी पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी हिंदी से कहा कि वैज्ञानिक मिशनों में सफलता इस बात से आंकी जाती है कि ‘आपको क्या हासिल हुआ है.'</p><p>इसरो वैज्ञानिक ने कहा, &quot;हमने सटीक लॉन्चिंग की थी, ऑर्बिटर ने वैसे किया है जैसे हमने अनुमान लगाया था और वह इस सफलता का मुख्य भाग है और लैंडर भी पूरे तीन चरणों से गुज़रा लेकिन अंतिम चरण में उसने हमारी उम्मीदों के हिसाब से काम नहीं किया.&quot;</p><p>&quot;ऑर्बिटर से हम जो डाटा प्राप्त करने वाले हैं वह आमतौर पर हम दो से तीन मिशनों में हासिल करते. ऑर्बिटर का जीवन एक से सात साल का है क्योंकि उसका ईंधन अभी तक ख़र्च नहीं हुआ है. इस मामले में हम सौभाग्यशाली हैं.&quot;</p><p>आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रक्षेपण स्थल से सात सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए चंद्रयान-2 मिशन लॉन्च किया गया था. सब कुछ वक़्त के अनुसार, ठीक से हो रहा था ऑर्बिटर से लैंडर के अलग होने के बाद भी यह ठीक काम कर रहा था. </p><p>हालांकि, चंद्रमा पर लैंड करने से 2.1 किलोमीटर पहले ही लैंडर से संपर्क टूट गया. नासा ने बयान में कहा है कि लैंडर के सटीक लैंडिंग की जगह के बारे में ‘अभी भी पता लगाया जाना बाकी है’ और ‘अक्तूबर में अनुकूल रोशनी में कई तस्वीरें ली जाएंगी.'</p><p>अगर लैंडर ‘विक्रम’ दो बड़े गड्ढों में चिन्हित जगह पर उतरता तो रोवर चंद्रमा की सतह पर जाता और वह वहां मिट्टी के नमूने इकट्ठा करता. इसका मक़सद दक्षिणी ध्रुव पर पानी और खनिज की मौजूदगी का पता लगाना था. </p><p>अगर यह मिशन सफल होता तो भारत सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाला दुनिया का चौथा देश और दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन जाता.</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49630542?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">चंद्रयान-2: क्या ISRO ने इसराइल से सबक नहीं लिया था?</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/science-49627954?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">इसरो लैंडर विक्रम से क्या दोबारा संपर्क स्थापित कर पाएगा?</a></li> </ul><h1>लैंडर की गति की वजह से नहीं हुई लैंडिंग</h1><p>इसरो के पूर्व चेरमैन डॉ. माधवन नायर ने बीबीसी हिंदी से कहा, &quot;फ़ाइनल लैंडिंग इसलिए सफल नहीं हो पाई क्योंकि लैंडर की ऊंचाई को सही तरीक़े से बरक़रार रखने में गलती हुई. यह बहुत गति से नीचे की ओर गिरा. तो यह मिशन का एक छोटा हिस्सा था जो सफल नहीं हो पाया.&quot;</p><p>डॉ. नायर इस बात पर ध्यान दिलाते हैं कि अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के बाद, लैंडर और ऑर्बिटर का अलग होना, ऑर्बिटर का चंद्रमा की कक्षा में सही जगह पर स्थापित होने जैसी चीज़ों को भी महत्व दिया जाना चाहिए.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;शायद, हमारे पास वैश्विक समुदाय द्वारा ली गई चंद्रमा की सतह की बेहतरीन तस्वीर है. लैंडर को बहुत मुश्किल ऑपरेशन मिला था. लैंड कराने के लिए लैंडर की गति को तक़रीबन ज़ीरो तक करना था. यहां तक की चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए लैंडिंग ऑपरेशन बेहद क़रीब था.&quot;</p><p>डॉ. नायर कहते हैं कि इसी कारण वैज्ञानिकों में आत्मविश्वास था कि ‘हम ग़लती को ठीक कर सकते हैं.'</p><p>इसरो अधिकारी कहते हैं कि जब मिशन की योजना बनाई जाती है तो उद्देश्यों के बारे में अच्छे से मालूम होता है. </p><p>&quot;हर एक चरण को तवज्जो दी जाती है. यह अंतरिक्ष यान की लॉन्चिंग से शुरू हुआ और फिर इसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भी है. अगर आप ऑर्बिटर के आठ पेलॉड्स से सात सालों तक डाटा प्राप्त करते हैं तो इसका मतलब है कि कई तकनीक काम कर रही हैं.&quot;</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम</a><strong> और </strong><a href="https://www.youtube.com/bbchindi/">यूट्यूब</a><strong> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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