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Israel Election: नेतन्याहू को झटका, बेनी गैंट्ज की पार्टी को बढ़त

Updated at : 20 Sep 2019 4:31 PM (IST)
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Israel Election: नेतन्याहू को झटका, बेनी गैंट्ज की पार्टी को बढ़त

यरूशलम : इस्राइल में इस हफ्ते संपन्न हुए आम चुनाव के लगभग पूर्ण नतीजे आने के बाद बेनी गैंट्ज की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, लेकिन बहुमत गठबंधन बनाने के लिए कोई स्पष्ट रास्ता उनके पास नहीं है. हालांकि, अंतिम नजीते बुधवार को घोषित किये जायेंगे और उम्मीद है कि इसमें कुछ […]

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यरूशलम : इस्राइल में इस हफ्ते संपन्न हुए आम चुनाव के लगभग पूर्ण नतीजे आने के बाद बेनी गैंट्ज की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है, लेकिन बहुमत गठबंधन बनाने के लिए कोई स्पष्ट रास्ता उनके पास नहीं है.

हालांकि, अंतिम नजीते बुधवार को घोषित किये जायेंगे और उम्मीद है कि इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं. इस्राइल निर्वाचन कमेटी के परिणाम से पता चलता है कि गैंट्ज की मध्यमार्गी ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी को 120 सीटों वाले सदन में 33 सीटें मिली हैं, जबकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी को 31 सीटें मिली है. कमेटी ने कहा है कि इस परिणाम में 14 मतदान केंद्रों का नतीजा शामिल नहीं है जहां सत्यापन अब भी जारी है. इस्राइल के मीडिया के अनुसार इसका मतलब है कि 99.8 फीसदी मतों की गिनती हो चुकी है. इन चुनावों में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी अरब ज्वाइंट लिस्ट गठबंधन है जिसने 13 सीटें जीती हैं. इन परिणामों से नेतन्याहू के प्रधानमंत्री पद को खतरा पैदा हो गया है. गुरुवार को उन्होंने स्वीकार किया कि ये नतीजे उन्हें दक्षिणपंथी गठबंधन बनाने की इजाजत नहीं देते हैं.

चुनाव में अरब ज्वाइंट लिस्ट के रूप में एक नयी राजनीतिक ताकत का उदय हुआ है. आने वाले समय में इस्राइल का कोई अरब नेता हर महीने वहां की खुफिया एजेंसी मोसाद की मीटिंग ले, वहां के दौरे पर आने वाले सभी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के साथ बैठक करे तो कोई हैरानी नहीं होगी. पहली बार कोई अरब नेता इस्राइली संसद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में दिख सकता है.

इससे पहले, अप्रैल में हुए आम चुनाव में ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी और लिकुद दोनों को 35-35 सीटें मिली थीं. अरब पार्टियों की मजबूती का सबसे बड़ा कारण उनकी एकता रही. इस बार अरब पार्टियों ने ज्वाइंट लिस्ट के बैनर तले गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा. अप्रैल में हुए पिछले चुनाव मेंतीन अरब पार्टियों ने मतभेद के चलते अलग-अलग चुनाव लड़ा था. दूसरी सबसे बड़ी वजह नेतन्याहू द्वारा अरब नेताओं को नजरअंदाज कर अपने दक्षिणपंथी आधार को मजबूत करने की अपनायी गयी रणनीति रही. यह रणनीति उल्टा पड़ गयी और वोटिंग का बहिष्कार करने वाले अरब बड़ी तादाद में मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए घरों से निकले.

पांच महीने पहले पिछले चुनाव में जहां अरब वोटरों का टर्नआउट महज 49 प्रतिशत था, इस बार 60 प्रतिशत रहा. इस्राइल में अरब वोटरों की तादाद 18 लाख है जो कुल वोटरों का करीब 20 प्रतिशत है. पिछले चुनाव से भी खराब प्रदर्शन के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने ब्ल्यू एंड व्हाइट पार्टी के बेनी गैंट्ज से अपील की है कि वह एक व्यापक यूनिटी गवर्नमेंट के गठन के लिए साथ आयें. ऐसे में ज्वाइंट लिस्ट की भूमिका काफी अहम रहने वाली है.

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