कत्लगाह होता देश और ''गेर्निका''
Updated at : 08 Sep 2019 2:19 AM (IST)
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अशोक भौमिक युद्ध की पृष्ठभूमि पर बने चित्रों में पाब्लो पिकासो द्वारा बनाया गया चित्र ‘गेर्निका’ निर्विवाद रूप से सबसे महत्वपूर्ण चित्र है. द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक पहले स्पेन के एक शहर ‘गेर्निका’ में जर्मन बमवर्षक विमानों ने भयंकर बमबारी की थी. स्पेन पर जर्मनी द्वारा यह बमबारी स्पेन के ही तानाशाह नेता फ्रांको […]
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अशोक भौमिक
युद्ध की पृष्ठभूमि पर बने चित्रों में पाब्लो पिकासो द्वारा बनाया गया चित्र ‘गेर्निका’ निर्विवाद रूप से सबसे महत्वपूर्ण चित्र है. द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक पहले स्पेन के एक शहर ‘गेर्निका’ में जर्मन बमवर्षक विमानों ने भयंकर बमबारी की थी. स्पेन पर जर्मनी द्वारा यह बमबारी स्पेन के ही तानाशाह नेता फ्रांको को सत्ता पर लाने के उद्देश्य से किया गया था. पाब्लो पिकासो स्पेन की चुनी हुए सरकार और जनता के पक्ष में थे इसलिए उन्होंने ‘गेर्निका’ पर हुए बमबारी के विरोध में यह चित्र बनाया था.
यह चित्र विशाल आकार का ही नहीं, बल्कि अपने स्वरूप में यह एक भित्तिचित्र (म्यूरल) जैसा है. इस एकवर्णी चित्र में केवल काले और सफेद रंग के साथ-साथ इन दो रंगों के बीच के धूसर रंग की विविध छटाओं का प्रयोग हुआ है. चित्र की समस्त गतिविधियां एक बंद कमरे के अंदर ही घटित होती दिखती है.
चित्र के बायीं ओर हम एक महिला को एक मृत बच्चे को गोद में लिये विलाप करते हुए पाते हैं, जो कि इस चित्र का सबसे मार्मिक अंश भी है. इसके विपरीत, ठीक उसके ऊपर ही हम एक सफेद सांड को पाते हैं, जो इस चित्र में सबसे शांत उपस्थिति है. यह सांड़, इस चित्र की तमाम मृत्यु-हत्या-चीख-पुकार आदि से बेखबर मुंह मोड़े हुए है.
समीक्षकों का मानना है कि पिकासों ने इस क्रूर सांड के माध्यम से तानाशाह फ्रांको को चित्रित किया है. चित्र के केंद्र में चीखता हुआ एक आहत घोड़ा है, जिसकी पीठ पर एक भाला बिंधा हुआ है. इस घोड़े के मुंह को गौर से देखने से हमें एक करोटी (स्कल या खोपड़ी) भी दिखती है.
इस घोड़े के शरीर पर कतारों में बनी, छोटी-छोटी ‘खड़ी पाई’ के आकार के असंख्य निशान दिखते हैं. वास्तव में पिकासो , जो की स्पेन के रहनेवाले थे, गेर्निका में बमबारी के समय पेरिस में थे और बमबारी की तमाम सूचनाएं उन तक अखबारों के माध्यम से पहुंची थी, कहते हैं कि इन कतार में बने चिह्नों से उन्होंने उन अखबारी खबरों का आभास दिया है.
चित्र में बच्चे को गोद में लये स्त्री के अतिरिक्त तीन अन्य स्त्रियों को भी हम विभिन्न परिस्थितियों में देख पाते हैं. एक स्त्री को हम खिड़की से कोहरे के तरह हाथ में लालटेन थामे इस कमरे में प्रवेश करते देख पाते हैं, तो दूसरी स्त्री को लगभग रेंगते हुए चित्र के केंद्र की ओर बढ़ते देख सकते हैं.
तीसरी स्त्री को दोनों हाथों को ऊपर किये हुए, एक दरवाजे के पास आर्तनाद करते हुए पाते हैं. इस दरवाजे के बाहर किसी विस्फोट के कारण आग की लपटों को भी देखा जा सकता है. चित्र के निचले हिस्से में, यानी कमरे के फर्श पर एक आदमी और उसका हाथ दिखता है.
वहीं एक दूसरा हाथ भी है, जो एक टूटी हुए तलवार की मूठ पकड़े हुए है. इस चित्र में एक कबूतर और एक फूल भी है, जो इस आतंक भरे युद्ध चित्र को देखते हुए प्रायः हमसे छूट जाते है. चित्र में तलवार पकड़े हाथ के मुट्ठी के पास एक फूल और घोड़े के मुंह और सांड के बीच अंधेरे में एक घायल कबूतर, हमें गौर से देखने पर ही दिखायी देते हैं.
यह चित्र, हालांकि, साल 1937 में स्पेन के गृह युद्ध के दौर का चित्र है, पर महान चित्रकार पाब्लो पिकासो का चित्र अपनी अभिनव संरचना, रंग और नाटकीयता के चलते यह किसी युद्ध विशेष के संदर्भों से बाहर आकर, विश्व का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध विरोधी चित्र बन सका है.
साल 1937 में स्पेन के गृह युद्ध के दौर का यह चित्र है, पर महान चित्रकार पाब्लो पिकासो का चित्र अपनी अभिनव संरचना, रंग और नाटकीयता के चलते यह किसी युद्ध विशेष के संदर्भों से बाहर आकर, विश्व का सबसे महत्वपूर्ण युद्ध विरोधी चित्र बन सका है.
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