अरुण जेटली: नोटबंदी से जीएसटी तक वो काम जो सदा रहेंगे याद

Updated at : 24 Aug 2019 11:04 PM (IST)
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अरुण जेटली: नोटबंदी से जीएसटी तक वो काम जो सदा रहेंगे याद

<figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/18248/production/_108488889_1f35ba11-0b68-4ce5-9104-19dd17c15da7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>अरुण जेटली भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद दूसरे ऐसे नेता थे, जिन्हें उदारवादी माना जाता था. </p><p>भारतीय जनता पार्टी को नीतियों और विचारधारा के आधार पर एक हार्डलाइनर पार्टी की तरह पेश किया जाता था. </p><p>अरुण जेटली का पार्टी की विचारधारा […]

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<figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/18248/production/_108488889_1f35ba11-0b68-4ce5-9104-19dd17c15da7.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>अरुण जेटली भारतीय जनता पार्टी में अटल बिहारी वाजपेयी के बाद दूसरे ऐसे नेता थे, जिन्हें उदारवादी माना जाता था. </p><p>भारतीय जनता पार्टी को नीतियों और विचारधारा के आधार पर एक हार्डलाइनर पार्टी की तरह पेश किया जाता था. </p><p>अरुण जेटली का पार्टी की विचारधारा में पूरा विश्वास था लेकिन उनका रुख़ उदारवादी था. पार्टी को इसका बड़ा फ़ायदा हुआ. </p><h3>पार्टी का दायरा बढ़ाया</h3><p>भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को पेश करने में अरुण जेटली की बड़ी भूमिका रही. उन्होंने नीतियों को एक बौद्धिक जामा पहनाया और पार्टी के विचारों और बातों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई. </p><p>जेटली मीडिया में जब भारतीय जनता पार्टी के कोर मुद्दों पर बात रखते थे तो एक पुल की तरह काम करते थे. जो लोग भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा को समझ नहीं पाते थे या उनके घोर विरोधी थे, अरुण जेटली उनसे संवाद करने की कोशिश करते थे. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/6F3E/production/_108487482_28c7e247-0773-4530-91b2-c6c103c573d2.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>अरुण जेटली एक जननेता नहीं थे. उन्होंने साल 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके. उन्हें इसका अफ़सोस था. बड़ा सवाल ये है कि उन्होंने उस समय अमृतसर सीट को क्यों चुना? </p><p>2014 में जो माहौल था, वो कई जगह से चुनाव जीत सकते थे. दिल्ली से चुनाव लड़ सकते थे. जयपुर और लखनऊ में भी उनको बुलाया जा रहा था. वो कहीं से भी चुनाव लड़ते और जीत सकते थे. लेकिन वो खुद को पंजाब से जुड़ा नेता मानते थे और पंजाब से चुनाव लड़ना चाहते थे. ये बात अलग है कि उन्होंने अपनी ज़्यादातर राजनीति दिल्ली में की थी. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/BD5E/production/_108487484_d38ecd23-f6d0-4d67-bfcb-fa53f35ae900.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h3>बीजेपी के रणनीतिकार</h3><p>अरुण जेटली ख़ुद मानते थे कि वो जनाधार वाले नेता नहीं हैं. वो ये भी मानते थे कि वो अटल बिहारी वाजपेयी या सुषमा स्वराज की तरह मंच से प्रभावी भाषण देने वाले वक्ता नहीं हैं. लेकिन वो गजब के रणनीतिकार थे. </p><p>इस मोर्चे पर उनका कोई मुक़ाबला नहीं था. 1998 के बाद कई चुनावों की उन्होंने रणनीति तैयार की. कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान के चुनावों में भी उनकी भूमिका अहम रही. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/10B7E/production/_108487486_872aad10-c38e-4c6e-9953-b18026ee70b4.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>क़ानून और संविधान के अच्छे जानकार</h1><p>अरुण जेटली किसी भी बात को सामने रखने में कभी डर या झिझक महसूस नहीं करते थे. वो सही गलत के बारे में खुलकर बात करते थे. अटल हों, आडवाणी हों या अब नरेंद्र मोदी, सबके सामने वो अपनी बात भरोसे के साथ रखते रहे. </p><p>जेटली क़ानून और संविधान के अच्छे जानकार थे और राजनीतिक तौर पर बात को पेश करना जानते थे. विपक्ष के नेता के तौर पर परमाणु विधेयक पारित करने में उन्होंने कांग्रेस सरकार की मदद की. जेटली के कई प्रस्ताव बिल में शामिल किए गए. लोकपाल विधेयक में भी जेटली के कई सुझाव माने गए. </p><h3>कितने प्रभावी वित्त मंत्री? </h3><p>वित्त मंत्री के रूप में अरुण जेटली ने कई अहम आर्थिक सुधारों की नींव रखी. उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई. बैंकों की स्थिति सुधारने की कोशिश हुई. लेकिन तब भी उन्हें उतना श्रेय नहीं दिया जाता. कई बार उनकी आलोचना भी होती है. </p><p>लेकिन ये याद रखना होगा कि जब वो वित्त मंत्री थे तब विश्व स्तर पर अर्थ व्यवस्था की रफ़्तार सुस्त हो गई. खाड़ी क्षेत्र में चुनौती भरी स्थितियां बनीं. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने माहौल का असर भारत पर भी पड़ा. यूपीए के कार्यकाल में जितने बैंक घोटाले हुए, उनकी जानकारी एनडीए के कार्यकाल में सामने आई. </p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49459187?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अरुण जेटली के सत्ता के शिखर तक पहुंचने की कहानी</a></p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/632C/production/_108488352_5d6fe8a2-17df-45f0-929a-08b33bfc8206.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>2014 में जब नरेंद्र मोदी सरकार बनी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहले ही ये तय कर लिया कि सभी चीजों की जानकारी पहले ही सामने रख दी जाए. ये बता दिया जाए कि गड्ढा बहुत गहरा है. उस समय ये तय हुआ कि जितने गड्ढे हम भर सकते हैं हम भरें. वित्त मंत्री के तौर पर गड्ढे भरने ये काम अरुण जेटली ने ही ज्यादा किया. </p><p>हमें याद रखना होगा कि 2014 से 2019 के दौरान उन्होंने वित्त के साथ कई महीनों तक रक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी भी संभाली. </p><p>वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली के कई कदम लंबे वक्त तक याद रखे जाएंगे. </p><figure> <img alt="नरेंद्र मोदी का पोस्टर" src="https://c.files.bbci.co.uk/B14C/production/_108488354_7bc73973-cd90-4379-8734-2f1d6a567c31.jpg" height="549" width="976" /> <footer>EPA</footer> </figure><h3> जीएसटी </h3><p>जेटली का जो बड़ा काम है वो है जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) जिसे वन नेशन वन टैक्स भी कहा जाता है. जीएसटी बहुत बड़ा आर्थिक सुधार था. </p><p>सेल्स टैक्स और दूसरे टैक्सों को मिलाकर देखें तो भारत में बहुत से टैक्स थे. इन सबको मिलाकर एक टैक्स बनाने के काम में अरुण जेटली का बहुत बड़ा योगदान था. </p><p>इसके लिए सभी राज्यों के सहयोग की ज़रूरत थी. तब एक नेशनल काउंसिल बनाई गई थी. उसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री थे. ये मंत्री अलग-अलग राजनीतिक दलों से थे. कांग्रेस के भी वित्त मंत्री थे. कम्युनिस्ट पार्टी के भी थे. बाकी विपक्षी दलों के भी थे. उनके साथ बैठकर जेटली ने सहमति बनाई. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/FF6C/production/_108488356_eca0c4f5-223d-4805-9228-9cb21ed4f902.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>जीएसटी 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ. इसके पहले जितनी मीटिंग हुईं, उनमें जेटली की भूमिका सबसे अहम रही. </p><p>जीएसटी को लेकर कई राज्यों के मतभेद थे. उन्हें आशंका थी कि कई टैक्स ख़त्म होने से उनका राजस्व कम हो जाएगा. जेटली ने उन्हें मनाया. </p><p>जीएसटी जब लागू हो गया तब भी उसमें कई दिक्कतें आईं. कई दुविधाएं आईं. उसे लेकर उन्होंने व्यापारियों की लॉबी को मनाया. उनसे बार-बार बातचीत की. वो लगातार जीएसटी काउंसिल मीटिंग करते रहे. कई रेट भी बदले गए. जेटली को जीएसटी को बेहतर तरीके से लागू कराने के लिए याद किया जाएगा. </p><p>इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को भी समझना होगा. जीएसटी काउंसिल में उन्होंने इसका विरोध नहीं किया लेकिन लागू करने का वक्त आया तो कांग्रेस जैसे दलों ने कहा कि इसे टाल दिया जाए. </p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-48805747?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जीएसटी लागू होने से फ़ायदा हुआ या नुक़सान</a></p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/14D8C/production/_108488358_2b3c0877-7d41-4ac2-b0bb-811be8043bc8.jpg" height="625" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h3>वन रैंक वन पेंशन </h3><p>सैनिकों की ये मांग बहुत समय से लंबित थी. उसका वित्तीय पक्ष कैसे व्यवस्थित किया जाएगा, ये इतना मुश्किल काम था कि कई सरकारें इसे टालती गईं. </p><p>मोदी सरकार के वित्त मंत्री के रुप में अरुण जेटली और तब के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसे लागू कराने का जो रास्ता तैयार किया, वो एक बहुत बड़ा काम था. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/A210/production/_108488414_d6dbfc0b-02ee-4206-935b-906b8ba882ad.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Reuters</footer> </figure><h3>आम बजट और रेल बजट का एकीकरण </h3><p>ये भी एक बहुत बड़ा काम था और आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा सुधार था. रेलवे को कभी राजस्व लाने वाला मंत्रालय नहीं माना गया. लेकिन रेलवे की ज़रूरतें लगातार बढ़ती गईं. रेलवे में सुधार लाने, उनमें पब्लिक प्राइवेट साझेदारी बढ़ाने और राजस्व हासिल करने के लिए ये कदम ज़रूरी था. </p><p>रेलवे के सामने कई चुनौतियां आज भी हैं. सबसे अहम पटरियों को बदलने की है. नए कोच लाना और सुरक्षा की भी अहम चुनौती है. रेलवे का आधुनिकीकरण भी ज़रूरी है. ये सब करने के लिए रेल बजट को आम बजट के साथ जोड़ना एक बेहद अहम कदम था. </p><figure> <img alt="अरुण जेटली" src="https://c.files.bbci.co.uk/F030/production/_108488416_747a3c6a-46b9-47be-85a9-bf81b609c553.jpg" height="549" width="976" /> <footer>AFP</footer> </figure><h3>जनधन योजना </h3><p>इस योजना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये सबसे अधिक दिलचस्पी थी. मोदी चाहते थे कि हर गरीब परिवार का एक बैंक अकाउंट होना चाहिए. वित्त मंत्री के रुप में उसे लागू करने की ज़िम्मेदारी अरुण जेटली के पास थी. जनधन योजना को विश्व में एक ऐसा बड़ा कार्यक्रम माना जाता है जिसके माध्यम से डायरेक्ट बेनेफिट सिस्टम को लागू करने में मदद मिली. इसमें अरुण जेटली की अहम भूमिका रही. </p><figure> <img alt="कार्टून" src="https://c.files.bbci.co.uk/05D0/production/_108488410_04a7b91c-c2de-4fb9-b9a1-9eafc23d4f73.jpg" height="549" width="976" /> <footer>BBC</footer> </figure><h3>नोटबंदी </h3><p>नोटबंदी और काला धन को लेकर जो कार्रवाई हुई, उससे कई सेक्टर नाराज़ हुए. बड़े राजनीतिक दल और व्यावसायिक घराने नाराज़ हुए. इस दौरान करीब तीन लाख शैल कंपनियों पर कार्रवाई हुई. </p><p>नोटबंदी के दौरान पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखना. फिर नए सिरे से नोट जारी करना आसान काम नहीं था. अरुण जेटली की आलोचना भी हुई. लेकिन इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव जीता. नोटबंदी की चुनौतियों को संभालना और राजनीतिक तौर पर जवाब देने के ज़िम्मेदारी काफी हद तक अरुण जेटली पर ही थी. हालांकि इस फैसले को कई लोग अर्थव्यवस्था में सुस्ती के लिए ज़िम्मेदार बताते हैं. </p><p><strong>(ये लेखक के निजी विचार हैं</strong><strong>. बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित</strong><strong>)</strong></p><p><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49458942?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">अरुण जेटली के ये थे आख़िरी ट्वीट्स </a></p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>

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