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''WTO में विकासशील दर्जे पर अमेरिका का रुख उसके घमंड और स्वार्थीपन का सबूत''

Updated at : 29 Jul 2019 9:22 PM (IST)
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''WTO में विकासशील दर्जे पर अमेरिका का रुख उसके घमंड और स्वार्थीपन का सबूत''

बीजिंग : चीन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका का विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीन का ‘विकासशील राष्ट्र’ का दर्जा उससे वापस लेने की चेतावनी उसके ‘घमंड’ और ‘स्वार्थीपन’ को बताता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राबर्ट लाइथाइजर को भेजे गये एक निर्देश के बाद चीन ने सोमवार को […]

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बीजिंग : चीन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका का विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चीन का ‘विकासशील राष्ट्र’ का दर्जा उससे वापस लेने की चेतावनी उसके ‘घमंड’ और ‘स्वार्थीपन’ को बताता है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राबर्ट लाइथाइजर को भेजे गये एक निर्देश के बाद चीन ने सोमवार को यह प्रतिक्रिया जाहिर की.

इसे भी देखें : ‘विकासशील देशों को वैश्विक व्यवस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व एवं भागीदारी मिले’

इस निर्देश में कहा गया है कि व्यापार नियमों की वैश्विक व्यवस्था का संचालन और विवादों का निपटारा करने वाले डब्ल्यूटीओ द्वारा ‘‘विकसित और विकासशील देशों के बीच किया जाने वाला विभाजन अब पुराना पड़ गया है. इसका परिणाम यह हो रहा है कि डब्ल्यूटीओ के कुछ सदस्य बेजा फायदा उठा रहे हैं.

माना जा रहा है कि यह निर्देश चीन को ध्यान में रखकर दिया गया है. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ट्रंप प्रशासन की यह मांग उसके ‘घमंड’ और ‘स्वार्थीपन’ को बताता है. उन्होंने कहा कि एक या कुछ देशों को यह निर्णय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि किसी देश को विकासशील देशों की श्रेणी में रखना है किसे नहीं.

प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि चीन को वास्तविक व्यापार निष्पक्षता प्राप्त करने के लिए विकासशील अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाये रखने की जरूरत है. इस निर्देश में कहा गया है कि 90 दिनों के भीतर डब्ल्यूटीओ नियमों में सुधार की दिशा में सार्थक और ठोस कदम उठाये बिना अमेरिका डब्ल्यूटीओ के किसी भी सदस्य देश को अब विकासशील देश के तौर पर नहीं लेगा. अनुचित तरीके से खुद को विकासशील देश घोषित करके डब्ल्यूटीओ नियमों के लचीलेपन और उसके समझौतों के तहत फायदा उठाने वाले देशों को अब अमेरिका विकासशील नहीं मानेगा.

यह निर्देश मंगलवार और बुधवार को अमेरिकी तथा चीनी वार्ताकारों के बीच शंघाई में होने वाली बैठक से पहले जारी किया गया है. इस बैठक का मकसद दोनों देशों के बीच एक व्यापार विवाद को सुलझाना है, जिसके चलते दोतरफा कारोबार पर 360 अरब डॉलर मूल्य का शुल्क लगाया गया था.

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने डब्ल्यूटीओ के स्तर पर दी गयी इस धमकी के संबंध में लिखा, ‘अमेरिका ने निश्चित रूप से ‘‘एक नयी सौदेबाजी के तहत इस समय यह निर्देश जारी किया है.’ एजेंसी ने लिखा है, ‘लेकिन दबाव डालने की यह चाल चीन के लिए कोई नयी बात नहीं है और यह चाल कभी कामयाब भी नहीं हुई है.’

गौरतलब है कि डब्ल्यूटीओ में विकासशील देश का दर्जा मिलने से विश्व व्यापार संगठन संबंधित सरकारों को मुक्त व्यापार प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए लंबी समय-सीमा प्रदान करता है और साथ ही ऐसे देशों को अपने कुछ घरेलू उद्योगों का संरक्षण करने तथा राजकीय सहायता जारी रखने की अनुमति होती है.

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