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गाजियाबाद : पूर्व सेना प्रमुख वी के सिंह के सामने सपा-बसपा-रालोद की तिकड़ी बनी चुनौती

Updated at : 09 Apr 2019 12:16 PM (IST)
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गाजियाबाद : पूर्व सेना प्रमुख  वी के सिंह के सामने सपा-बसपा-रालोद की तिकड़ी बनी चुनौती

गाजियाबाद : भाजपा गाजियाबाद में सपा-बसपा-रालोद के मजबूत गठबंधन का सामना करने के लिए विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का सहारा ले रही है जबकि शहरी इलाकों में फिर से पैठ बना रही कांग्रेस ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद और धौलाना विधानसभा क्षेत्रों तक फैले इस निर्वाचन […]

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गाजियाबाद : भाजपा गाजियाबाद में सपा-बसपा-रालोद के मजबूत गठबंधन का सामना करने के लिए विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का सहारा ले रही है जबकि शहरी इलाकों में फिर से पैठ बना रही कांग्रेस ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद और धौलाना विधानसभा क्षेत्रों तक फैले इस निर्वाचन क्षेत्र में 27 लाख मतदाता हैं.

साल 2014 में यहां 23 लाख मतदाता थे जब भारतीय जनता पार्टी के वी के सिंह ने ‘‘मोदी लहर” में अच्छे खासे बहुमत से जीत दर्ज की थी. हरियाणा मूल का होने के कारण अक्सर ‘‘बाहरी” कहे जाने वाले पूर्व सेना प्रमुख को 7.58 लाख वोट मिले थे. उन्हें अकेले 14 अन्य उम्मीदवारों और नोटा के मुकाबले करीब दो लाख अधिक वोट मिले थे.

चुनावी मैदान में उतरे 12 उम्मीदवारों में सिंह (67), राजनीतिक परिवार से होने के साथ एमबीए डिग्री धारक कांग्रेस की डॉली शर्मा (33) और समाजवादी पार्टी के सुरेश बंसल (70) शामिल हैं. पूर्व विधायक बंसल को बहुजन समाज पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और आम आदमी पार्टी का समर्थन हासिल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल के महीनों में कई बार यहां आए हैं.

छह बार भाजपा के प्रदेश कार्यकारी सदस्य रहे पृथ्वी सिंह ने कहा, ‘‘विकास, राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा इस बार हमारे अहम चुनावी मुद्दे हैं.” भाजपा मेट्रो रेल लाइन के विस्तार, एनएच-24 पर काम, हिंडन हवाईअड्डे पर घरेलू टर्मिनल खोले जाने का प्रचार कर रही है. विदेश राज्य मंत्री सिंह ने 32,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का जिक्र किया.

उन्होंने कहा कि गाजियाबाद स्वच्छता सूचकांक में 2017 में 351वीं रैंक से 2018 में 13वीं रैंक पर आ गया. उन्होंने कहा, ‘‘कुछ काम पूरे हो गए और कुछ अन्य काम पाइपलाइन में है. अगर हमें दूसरा मौका नहीं मिला तो शायद वे काम पूरे ना हो पाए.”

समाजवादी पार्टी ने दावा किया कि अखिलेश यादव सरकार के बाद भाजपा की सरकार आने पर गाजियाबाद में ज्यादा कुछ नहीं हुआ। सपा के गाजियाबाद के पूर्व अध्यक्ष संजय यादव ने कहा, ‘‘लोग स्थानीय मुद्दों को लेकर आक्रोशित हैं। यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने हिचकते हुए यह स्वीकार किया है कि वे काम नहीं कर सके. सांसद स्थानीय होना चाहिए और लोगों के लिए उपलब्ध होना चाहिए. कारोबारी और उद्यमी जीएसटी और नोटबंदी को लेकर नाखुश हैं.”

कांग्रेस ने दावा किया कि भाजपा ने गाजियाबाद को कुछ नहीं दिया.

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने कहा, ‘‘लोग कर दे रहे हैं और उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए. मूल ढांचागत और यातायात समस्याएं एक मुद्दा है। सांसद ने इन मोर्चो पर कुछ नहीं किया.” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नागरिक मुद्दे साहिबाबाद (9.48 लाख) और गाजियाबाद (4.48 लाख) के मिले जुले शहरी मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं जबकि लोनी (4.91 लाख), मुरादनगर (4.43 लाख) और धौलाना (3.94 लाख) विधानसभा क्षेत्र में जाति एक अहम भूमिका निभा सकती है.

चुनाव पर्यवेक्षकों के अनुसार, ब्राह्मण-वैश्य मतदाताओं वाली यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है. इस क्षेत्र में करीब 10 लाख मतदाता हैं. इस सीट पर छह लाख अनुसूचित जाति, 5.5 लाख मुस्लिम, 1.5 लाख जाट, करीब 50,000 यादव हैं. गाजियाबाद में गुरुवार को मतदान होना है.

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