बांग्लादेश दौरा: 'कोई संधि नहीं' फिर क्यों अहम है दौरा?

शुभज्योति घोष बीबीसी संवाददाता, दिल्ली भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बुधवार से तीन दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं. सरकार के अनुसार ये दौरा संबंधों को मज़बूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें कोई संधि या समझौता करने की कोई योजना नहीं. लेकिन स्वराज की यात्रा के दौरान तीस्ता नदी के पानी के […]
भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज बुधवार से तीन दिन के बांग्लादेश दौरे पर हैं. सरकार के अनुसार ये दौरा संबंधों को मज़बूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें कोई संधि या समझौता करने की कोई योजना नहीं.
लेकिन स्वराज की यात्रा के दौरान तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे, या सीमा पर जो विवाद है और उसी तरह के दूसरे मुद्दों पर बातचीत होगी.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन का कहना है, "हम बहुत सारे मुद्दों पर काम कर रहे हैं और उनके नतीजे हम आपको जल्द ही बताएंगे."
भारत की चिंताएं
भारत ने दोहराया है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ उसके लिए चिंता का विषय है और भारतीय विदेश मंत्री इस मुद्दे को बांग्लादेश के नेताओं के सामने रखेंगी. भारत ने ये भी स्पष्ट कर दिया कि वो बांग्लादेश के नागरिकों के लिए ‘वीज़ा ऑन अराइवल’ यानी सीधे भारत पहुँचकर हवाई अड्डे पर ही वीज़ा लेने की प्रक्रिया पर विचार नहीं कर रहा है.
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की विदेश मामलों की इकाई के प्रमुख और पूर्व राजदूत हरदीप पुरी का कहना है कि इसके बावजूद सुषमा स्वराज ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए बांग्लादेश को चुनकर ढाका को एक अहम संदेश दिया है.
उन्होंने कहा, "चुनावी भाषणों में बहुत कुछ कहा जाता है लेकिन जब आप सरकार में होते हैं तो हर मुद्दे को उसकी अहमियत और राजनयिक शिष्टाचार की दृष्टि से देखना होता है. साथ ही साथ पड़ोसी मुल्कों को हमारी संवदेनशीलताओं का ध्यान रखने की भी आवश्यकता है."
बांग्लादेश में भारत के पूर्व राजदूत पिनाक रंजन चक्रवर्ती कहते हैं कि अगर काठमांडू, कोलंबो, वॉशिंगटन या बीजिंग से पहले सुषमा स्वराज ढाका की यात्रा कर रही हैं तो ये बहुत मायने रखती है.
वह कहते हैं, "भारत की बांग्लादेश नीति घरेलू राजनीति से परे है चाहे जो भी राजनीतिक दल भारत में सत्ता में रहे वो बांग्लादेश के साथ संबंधों को मजबूत करने और आगे बढ़ाने के लिए कोशिश करेगा. ये सच है कि चुनाव के दौरान बहुत सारे ऐसे बयान आए जिसे लेकर बांग्लादेश में कुछ शंकाएं थीं."
इस यात्रा से किसी बड़े फैसले की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए. लेकिन बीजेपी के शासनकाल में भी अगर भारत-बांग्लादेश के रिश्ते आगे बढ़ते हैं तो ये एक सफल यात्रा कही जाएगी.
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