पत्रलेखा होने का मतलब!

Updated at : 15 Jun 2014 1:31 PM (IST)
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पत्रलेखा होने का मतलब!

पिछले दिनों एक फिल्म देखी ‘सिटी लाइट्स’. कमाल की फिल्म, कमाल का अभिनय. मुख्य अभिनेता राजकुमार राव को तो तुरंत पहचान लिया, लेकिन मुख्य अभिनेत्री को न पहचान सका. बाद में पता चला कि उनका नाम पत्रलेखा है. इस नाम ने चौंकाया. मानो पौराणिक या प्राचीन काल का कोई चरित्र सामने आ गया हो. पता […]

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पिछले दिनों एक फिल्म देखी ‘सिटी लाइट्स’. कमाल की फिल्म, कमाल का अभिनय. मुख्य अभिनेता राजकुमार राव को तो तुरंत पहचान लिया, लेकिन मुख्य अभिनेत्री को न पहचान सका.

बाद में पता चला कि उनका नाम पत्रलेखा है. इस नाम ने चौंकाया. मानो पौराणिक या प्राचीन काल का कोई चरित्र सामने आ गया हो. पता चला कि वह बंगाली हैं और उनकी कवयित्री दादी ने उनका यह नाम रखा था. तुरंत यह जिज्ञासा हुई कि उनके नाम का मतलब क्या है.

फौरन मुङो याद आयी चित्रलेखा (भगवती चरण वर्मा का मशहूर उपन्यास जो इसके केंद्रीय स्त्री पात्र का नाम भी है) की. लगा कि इसी तर्ज पर पत्रलेखा नाम भी होगा. चित्रलेखा का शाब्दिक अर्थ यह उपन्यास पढ़ते हुए शब्द कोशों में देखा था. चित्रलेखा का अर्थ है- चित्र या पोट्र्रेट, एक छंद का नाम, एक अप्सरा का नाम जो चित्रकला में निपुण थी, सुंदर रूपरेखा वाली, चित्र बनाने की कूची. इसी तर्ज पर मैंने पत्र का अर्थ चिट्ठी लगाते हुए पत्रलेखा का अर्थ निकालने की कोशिश की, पर बात कुछ बनी नहीं. पुन: शब्द कोशों (हिंदी शब्द सागर और संस्कृत के आप्टे तथा मोनियर विलियम्स) का सहारा लिया.

पत्र का मूल अर्थ है, पेड़ का पत्ता या फूलों की पंखुड़ी. चूंकि भारत में लेखन की शुरुआत ताड़ के पत्ताें आदि पर हुई, इसलिए पत्र का अर्थ चिट्ठी, कागज वगैरह भी हो गया. लेकिन, पत्रलेखा में जो पत्र है, उसका अर्थ है- कस्तूरी, केसर, चंदन, मेहंदी आदि द्रव्यों से शरीर, खास कर गालों पर सजावट के लिए चित्रण करना. चूंकि पहले रंग बनाने के लिए पुष्पों, पत्ताें व वनस्पतियों का इस्तेमाल होता था, इसलिए पत्र में यह अर्थ भी समाहित हो गया है. लेखा का मतलब होता है- लिखावट, रेखांकन, आलेखन, चित्रण. इस तरह पत्रलेखा का अर्थ हुआ- शरीर को अलंकृत करने के लिए चंदन, केसर, मेहंदी या किसी अन्य सुगंधित द्रव्य से शरीर पर चित्रण करना. फूल-पत्ताें से किये जानेवाले श्रृंगार के लिए संस्कृत साहित्य में पत्रबंध शब्द मिलता है.

सौंदर्य- वृद्धि के लिए स्त्रियों द्वारा माथे और गाल पर की जानेवाली चित्रकारी अथवा बेलबूटे बनाने को पत्रभंग, पत्ररचना, पत्ररेखा, पत्रवल्लरी, पत्रवल्ली, पत्रणा, पत्रक, पत्रमंजरी आदि भी कहते हैं. पत्रवलि या पत्रवली का मूल अर्थ है, पत्ताें की कतार. पुराने समय में नारियों के मुख पर सौंदर्य-वृद्धि के लिए पत्ताें की कतार जैसी रचना की जाती थी और उसे भी पत्रवलि कहते थे. कवि जायसी की ये पंक्तियां देखिए- रचि पत्रवलि मांग सिंदूरी/ भरि मोतिन औ मानिक पूरी. दिलचस्प यह है कि दक्षिण भारत में पत्रवली शब्द का इस्तेमाल पत्तल के लिए होता है.

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