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बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा को जोरदार झटका, सजा हुई दोगुनी, चुनाव भी नहीं लड़ पायेंगीं

Updated at : 30 Oct 2018 5:21 PM (IST)
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बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा को जोरदार झटका, सजा हुई दोगुनी, चुनाव भी नहीं लड़ पायेंगीं

ढाका : बांग्लादेश की बीमार चल रही पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को मंगलवार को एक और झटका लगा जब यहां की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें मिली पांच साल कैद की सजा मंगलवार को दोगुनी करते हुए दस साल कर दी. इससे आम चुनावों के मद्देनजर विपक्ष पर दबाव बढ़ गया […]

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ढाका : बांग्लादेश की बीमार चल रही पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया को मंगलवार को एक और झटका लगा जब यहां की एक अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उन्हें मिली पांच साल कैद की सजा मंगलवार को दोगुनी करते हुए दस साल कर दी. इससे आम चुनावों के मद्देनजर विपक्ष पर दबाव बढ़ गया है.

इससे एक दिन पहले ही भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नेता जिया को सात साल की जेल की सजा सुनायी गयी थी. द डेली स्टार की एक खबर के अनुसार, हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति इनायेतुर रहीम और न्यायमूर्ति मुस्तफिजुर रहमान की पीठ ने फैसले की घोषणा की. अदालत ने जिया अनाथालय ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में 73 वर्षीय जिया की जेल की सजा बढ़ाने की भ्रष्टाचार रोधी आयोग की पुनर्विचार याचिका को मंजूर करने के बाद फैसले की घोषणा की. ढाका की एक अदालत ने आठ फरवरी को अनाथालय भ्रष्टाचार मामले में जिया को पांच साल की जेल की सजा सुनायी थी. जिया तब से जेल में बंद हैं.

अदालत कक्ष में जिया और मामले के अन्य आरोपी की ओर से कोई वकील मौजूद नहीं था. पीठ ने मामले के अन्य दोषियों के बारे में कुछ नहीं कहा क्योंकि उन्होंने कोई अपील दायर नहीं की और वे फरार हैं. अटॉर्नी जनरल महबूबे आलम ने द डेली स्टार को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिया अगला संसदीय चुनाव नहीं लड़ सकतीं. भ्रष्टाचार रोधी आयोग के वकील खुर्शीद आलम खान ने पत्रकारों से कहा, इस फैसले का मतलब है कि खालिदा जिया आगामी चुनाव नहीं लड़ पायेंगी. पूर्व प्रधानमंत्री को जिया चैरिटेबल ट्रस्ट के लाखों रुपये के गबन के लिए सोमवार को सजा सुनायी गयी थी.

जिया हिंसा और भ्रष्टाचार से जुड़े कई अलग-अलग आरोपों का सामना कर रही हैं. उन्होंने हाल ही में अदालत का रुख करते हुए अपने हाथ और एक पैर सुन्न होने की शिकायत की थी. छह अक्तूबर को उन्हें बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल यूनिवर्सिटी अस्पताल ले जाया गया जहां अभी उनका इलाज चल रहा है. दिसंबर में संसदीय चुनावों के मद्देनजर मंगलवार को आया फैसला अहम है. जिया की पार्टी ने 2014 में हुए चुनावों का बहिष्कार किया था. बीएनपी ने फैसले के विरोध में मंगलवार को देश भर में मार्च निकालने का आह्वान किया है. अदालत के ताजा आदेश ने जिया की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चुनाव लड़ने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

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