ऑस्ट्रेलियाई मूल के कलाकार का चीन करेगा प्रत्यर्पण

Updated at : 07 Jun 2014 5:08 PM (IST)
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ऑस्ट्रेलियाई मूल के कलाकार का चीन करेगा प्रत्यर्पण

चीन का कहना है कि तियेनएनमेन चौक की 25वीं वर्षगांठ से पहले हिरासत में लिए गए ऑस्ट्रेलियाई मूल के चीनी कलाकार को ऑस्ट्रेलिया प्रत्यर्पित किया जाएगा. गुओ जियान ने 1989 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में भाग लिया था. फ़ाइनेंसियल टाइम्स अख़बार में उनका एक विस्तृत साक्षात्कार प्रकाशित होने के बाद रविवार को पुलिस उन्हें लेकर […]

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चीन का कहना है कि तियेनएनमेन चौक की 25वीं वर्षगांठ से पहले हिरासत में लिए गए ऑस्ट्रेलियाई मूल के चीनी कलाकार को ऑस्ट्रेलिया प्रत्यर्पित किया जाएगा.

गुओ जियान ने 1989 में लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में भाग लिया था. फ़ाइनेंसियल टाइम्स अख़बार में उनका एक विस्तृत साक्षात्कार प्रकाशित होने के बाद रविवार को पुलिस उन्हें लेकर गई थी.

इस लेख में उनकी सूअर के मांस के क़ीमे से बनी तियेनएनमेन चौक की कलाकृति प्रकाशित की गई थी.

वीज़ा से जुड़ा मामला

ऑस्ट्रेलियाई विदेश विभाग का कहना कि वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को बीजिंग में गुओ जियान से मिलने की इजाज़त दी गई.

विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, ”चीनी अधिकारियों ने बताया कि गुओ जियान को विज़ा से जुड़े एक मामले में हिरासत में लिया गया था.”

बयान में कहा गया है, ”हम समझते हैं कि गुओ जियान को 15 दिन के लिए हिरासत में लिया गया है और उसके बाद उन्हें चीन को प्रत्यर्पित करना होगा.”

तियेनएनमेन चौक नरसंहार की 25वीं वर्षगांठ से पहले असंतोष की भावना को फैलने से रोकने के लिए चीन से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है.

अधिकारियों ने हफ़्तों पहले से ही असंतुष्टों और कार्यकर्ताओं को आगाह करना शुरू कर दिया था.

वकीलों, पत्रकारों और छात्रों को हिरासत में लिया गया है.

दमन का दौर

इंटरनेट पर 1989 के नरसंहार और विरोध-प्रदर्शन से संबंधित खोज को अवरुद्ध कर दिया गया है. इसके अलावा गूगल का प्रयोग भी कथित तौर पर प्रतिबंधित कर दिया गया है.

चीन में 1949 में पीपुल्स गणराज्य की स्थापना के बाद से कम्युनिस्ट शासन के ख़िलाफ़ वह सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन था.

लोकतांत्रिक सुधारों की मांग करते हुए हज़ारों-लाखों लोग तियेनएनमेन चौक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जमा हुए थे.

प्रदर्शन शुरू होने के एक हफ़्ते बाद अधिकारियों ने चार जून को प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी. इसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो गई थी.

विश्लेषकों का कहना है कि अन्य सालों की तुलना में इस साल 25वीं वर्षगांठ पर दमन कुछ ज़्यादा ही है.

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