लोगों को दें प्रेम व सम्मान देने का संदेश

Updated at : 06 Jun 2014 5:30 AM (IST)
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लोगों को दें प्रेम व सम्मान देने का संदेश

।। दक्षा वैदकर।। कुछ लोग अपना काम करने के साथ-साथ समाजसेवा भी करते हैं. लोगों को अच्छी बातें भी समझाते हैं. मेरे परिचित में एक पंडित जी हैं. वे जन्म स्थान, तारीख और समय देख कर भविष्य बताते हैं. जब भी उनके पास कुछ देर बैठना होता है, उनका लोगों से बातचीत करने का तरीका […]

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।। दक्षा वैदकर।।

कुछ लोग अपना काम करने के साथ-साथ समाजसेवा भी करते हैं. लोगों को अच्छी बातें भी समझाते हैं. मेरे परिचित में एक पंडित जी हैं. वे जन्म स्थान, तारीख और समय देख कर भविष्य बताते हैं. जब भी उनके पास कुछ देर बैठना होता है, उनका लोगों से बातचीत करने का तरीका दिल को छू जाता है. उनके पास कई फोन आते हैं और वे लोगों का समाधान बड़े अनोखे तरीके से करते हैं.

पिछले दिनों जब उनके पास बैठी, तो एक व्यक्ति का फोन आया. उसने बताया कि उसकी एक बेटी है और वे बेटा चाहते हैं. उन्होंने पूछा कि मेरा बेटा कब होगा? क्या अगली संतान बेटा होगी? पंडित जी ने पहले तो उसे बड़े विनम्र भाव से कहा ‘बेटा होगा या बेटी? यह सवाल पूछना ही अपराध है. इसलिए यह सवाल न मुझसे पूछें और न डॉक्टर से. अब अगर आपको और कोई सवाल पूछना है, तो बतायें.’ व्यक्ति ने कहा, ‘मेरी तरक्की नहीं हो रही है. रुपयों की दिक्कत है.

क्या उपाय करूं? कोई अंगूठी या पूजा पाठ हो तो बतायें.’ पंडित जी बोले, ‘आपकी बेटी ही आपका भाग्य लिखेगी. आप उसे खूब प्रेम व सम्मान दें. उसके अंदर ही लक्ष्मी माता का वास है. बेटी खुश रहेगी, तो लक्ष्मी माता की कृपा आप पर बनी रहेगी.’ व्यक्ति ने वादा किया और फोन रख दिया. अगला फोन एक बहू का था. उसने पूछा कि वह कब अपने पति के साथ नये घर में शिफ्ट होगी. पंडित जी ने समस्या को समझा और बहू को कहा कि आप पहले तो गौमाता को रोज रोटी और गुड़ खिलायें और अपने सास-ससुर का बहुत ख्याल रखें. जब वे संतुष्ट हो कर आपको आशीर्वाद देंगे, तभी आपकी गाड़ी पटरी पर आ सकेगी. बहू ने बताया कि सास और मेरी बनती नहीं है.

हमारे झगड़े होते हैं. पंडित जी ने कहा, ‘आप पहले उन्हें सास कहना बंद करें. उन्हें मां कह कर पुकारना शुरू करें. जितना हो सके, कम बोलें. जब भी आपकी सास कुछ बोले, आप केवल उसे सुनने का काम करें. इस तरह आपकी 90 प्रतिशत समस्या समाप्त हो जायेगी, क्योंकि अधिकांश झगड़े तो जवाब देने से ही होते हैं. बहू ने भी इस उपाय को करने का वादा किया और फोन रख दिया.

बात पते की..

यह जरूरी नहीं है कि आप हमेशा अपना और अपने प्रोफेशन का फायदा देखें. समाज को अच्छा संदेश देना भी आपका फर्ज बनता है.

कभी किसी भी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के प्रति भड़काने का काम न करें. जितना हो सके, लोगों को प्रेम करने, बड़ों को सम्मान देने की सीख दें.

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