झारखंड के पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपी की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने नहीं दी राहत

Published by : Sameer Oraon Updated At : 09 Apr 2026 9:31 PM

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रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Ramesh Singh Munda Murder Case: रांची में एनआईए की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा उर्फ मोचू की जमानत याचिका खारिज कर दी है. साल 2008 में तमाड़ के तत्कालीन विधायक की हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था. सरकारी गवाह बनने के बावजूद आरोपी को अभी जेल में ही रहना होगा, क्योंकि एनआईए ने स्पष्ट किया है कि कानूनन ट्रायल समाप्त होने तक एप्रूवर को हिरासत में रखना अनिवार्य है. देखिए, इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब आगे क्या होगा.

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Ramesh Singh Munda Murder Case, रांची (अजय दयाल की रिपोर्ट): रांची स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने चर्चित नक्सली साजिश और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड के आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा उर्फ मोचू की जमानत अर्जी को नामंजूर कर दिया है. यह मामला बुंडू थाना कांड संख्या 65/2008 से संबंधित है, जिसने अपने समय में पूरे झारखंड में सनसनी फैला दी थी. अदालत ने बचाव पक्ष और एनआईए की दलीलों को सुनने के बाद यह निर्णय लिया है कि आरोपी को वर्तमान परिस्थितियों में राहत नहीं दी जा सकती है.

2008 का वो काला दिन और एनआईए की जांच

घटनाक्रम के अनुसार, 9 जुलाई 2008 को तमाड़ के तत्कालीन विधायक रमेश सिंह मुंडा की नक्सलियों ने गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी. इस जघन्य हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए मामले की कमान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई थी. एनआईए ने इस पूरी साजिश की विस्तृत जांच की और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए. इसी क्रम में 8 जुलाई 2016 को आरोपी राम मोहन सिंह मुंडा को गिरफ्तार किया गया था, जो तब से लगातार न्यायिक हिरासत में है.

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सरकारी गवाह बनने के बाद भी नहीं मिली राहत

मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब एनआईए ने 23 नवंबर 2017 को राम मोहन सिंह मुंडा को ‘एप्रूवर’ यानी सरकारी गवाह बना दिया. इसके पश्चात आरोपी ने मामले से जुड़े कई रहस्यों पर अपना बयान भी दर्ज कराया था. जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि चूंकि आरोपी अब सरकारी गवाह बन चुका है और उसके बयान की प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है, इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए. साथ ही, ट्रायल की लंबी अवधि का भी हवाला दिया गया.

एनआईए की दलील और अदालत का कड़ा रुख

बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए एनआईए ने अदालत में कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया. एनआईए ने स्पष्ट किया कि कानूनी व्यवस्था के अनुसार, किसी भी एप्रूवर (सरकारी गवाह) को ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होने तक हिरासत में रखना अनिवार्य होता है. एनआईए की इस ठोस दलील और मामले की संवेदनशीलता को स्वीकार करते हुए विशेष अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करने का आदेश जारी किया. इस फैसले के बाद अब आरोपी को विचारण समाप्त होने तक जेल में ही रहना होगा.

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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