बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की मॉब लिंचिंग की कोशिश

Updated at : 18 Aug 2018 2:41 PM (IST)
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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर की मॉब लिंचिंग की कोशिश

बिहार के मोतिहारी ज़िले में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार पर शुक्रवार को कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया है. घायल हालत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (पीएमसीएच) रेफ़र किया गया है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. उनके सहकर्मी मृत्युंजय कुमार ने बीबीसी […]

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बिहार के मोतिहारी ज़िले में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय कुमार पर शुक्रवार को कुछ लोगों ने जानलेवा हमला किया है.

घायल हालत में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पीटल (पीएमसीएच) रेफ़र किया गया है, जहां उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है. उनके सहकर्मी मृत्युंजय कुमार ने बीबीसी से बताया, "इमरजंसी वार्ड में हैं, उनकी जांच हो रही है. सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड हुए हैं, रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं हमलोग, काफी चोटें हैं, कुछ कहा नहीं जा सकता."

मृत्युंजय कुमार के मुताबिक एक ही राहत की बात है कि रात तीन बजे के बाद से संजय बेहोश नहीं हुए हैं, पहले तो थोड़ी थोड़ी देर में वे बेहोश हो जा रहे थे.

उधर दूसरी ओर महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के शिक्षक संघ ने संजय कुमार पर हुए जानलेवा हमले की निंदा करते हुए अपना बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है, "एक कथित फ़ेसबुक पोस्ट को बहाना बनाकर अराजक तत्वों ने मॉब लिंचिंग के रुप में एक साजिश के तहत डॉ. संजय पर हमला किया और उन्हें ज़िंदा जलाने की कोशिश की. एक शिक्षक को सरेआम मारने-जलाने का तांडव होता है और कुलपति महोदय शिक्षक को देखने तक नहीं आते."

मॉब लिंचिंग की कोशिश

संजय कुमार की ओर मोतिहारी के नगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि उनकी मॉब लिंचिंग की कोशिश की गई, पेट्रोल डालकर ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई. संजय कुमार ने 12 लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है, पुलिस ने मामला दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन संजय कुमार की ओर से कहा जा रहा है कि पुलिस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है और मॉब लिंचिंग की कोशिश को देखते हुए धारा 307 के तहत मुक़दमा दर्ज नहीं किया है.

मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार शर्मा ने बीबीसी को बताया, "उनकी शिकायत के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है. धारा 307 के तहत तभी मुक़दमा दर्ज हो सकता था, जब उनके शरीर पर उस तरह की इंजरी होती, वैसी इंजरी थी नहीं. लेकिन जितने तरह के मामले हो सकते थे, वो सब लगाए गए हैं. इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तारी नहीं हुई है."

स्थानीय पत्रकार नीरज सहाय के मुताबिक ये घटना शुक्रवार दोपहर लगभग एक बजे की है. लेकिन पुलिस ने घटना के करीब सात-आठ घंटे बाद प्राथमिकी दर्ज की.

हमले की वजह क्या?

संजय कुमार पर हमले की वजह क्या इसको लेकर अब तक दो बातें सामने आई हैं. संजय कुमार ने स्थानीय पुलिस के पास जो प्राथमिकी दर्ज कराई है उसमें भी सोशल पोस्ट को हमले की वजह बताया है.

हमले से ठीक पहले उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मौत के बाद दो पोस्ट लिखे थे जो अटल समर्थकों को नागवार लग सकता है.

अपनी एक पोस्ट में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी को संघी कहा है, जिन्होंने अपनी भाषण देने की कला से हिंदुत्व को मिडिल क्लास के बीच सेक्सी बना दिया. वहीं एक दूसरी पोस्ट में संजय ने लिखा है कि भारतीय फासीवाद का एक युग समाप्त हुआ.

वैसे संजय कुमार की फेसबुक प्रोफ़ाइल पर अब ये पोस्ट नज़र नहीं आ रही है. मृत्युजंय कुमार बताते हैं, "हमलोग पोस्ट तो नहीं ही हटाते. इस पोस्ट पर जितनी गालियां पड़ी थीं उसे देखते हुए फ़ेसबुक ने इसे स्पैम में डाल दिया होगा. इन पोस्टों के चलते ही संजय पर शुक्रवार को ही हमला हो गया."

विश्वविद्यालय की राजनीति

वैसे केवल सोशल पोस्ट ही हमले की वजह रही हो ऐसा भी नहीं है. दरअसल संजय कुमार बीते कुछ महीनों से विश्वविद्यालय प्रशासन के ख़िलाफ़ संघर्ष करते आ रहे थे. मृत्युंजय कुमार ने बताया कि वे लोग विभिन्न मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ़ 29 मई से ही शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हुए हैं.

मृत्युंजय कुमार का दावा है कि यही बात विश्वविद्यालय से जुड़े कई लोगों को पसंद नहीं आ रही थी. ऐसे में विश्वविद्यालय कैंपस की आपसी राजनीति और जोर अजमाइश की इस हमले में अहम भूमिका रही होगी. इस बात की तस्दीक महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के शिक्षक संघ की ओर से जारी बयान से भी होती है.

संजय कुमार ने पुलिस के पास दर्ज अपनी शिकायत में ये कहा है कि उनके साथ मारपीट करने वाले लोग उन्हें इस्तीफ़ा देने और यहां से भागने की बात कह रहे थे.

लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर बिहार सरकार पर सवालिया निशान लगा दिया है. पहले से मुज़फ़्फ़रपुर बालिक गृह कांड से शर्मसार राज्य प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. विपक्षी दल इस मसले को मुद्दा बनाने की कोशिश करेंगे.

मॉब लिंचिंग की इस कोशिश पर कांग्रेस के विधायक शकील अहमद ख़ान ने स्थानीय पत्रकार नीरज सहाय से कहा है, ‘इस प्रकरण को देखकर लगता है कि बिहार में भी मॉब लिंचिंग की शुरुआत हो गई है. प्रशासन इस घटना को छिपाने का प्रयास कर रहा है. हमने इस घटना की जांच की मांग की है."

मॉब लिंचिंग की घटनाएं

पिछले कुछ सालों में मॉब लिंचिंग में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को देश के अलग अलग हिस्सों में निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. हाल ही में अलवर में हुई रक़बर की हत्या संसद में बहस का हिस्सा बनी. अलवर ज़िले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में कथित गोरक्षकों ने रकबर की बुरी तरह पिटाई की थी, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 10 अगस्त को उग्र भीड़ ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी. कथित गोरक्षकों ने जुलाई में पश्चिमी राजस्थान में 28 साल के एक मुस्लिम शख़्स की हत्या कर दी.

जुलाई में तो मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, सिंगरौली और देश के अन्य कई हिस्सों से ऐसी ख़बरें मिलीं.

पिछले कुछ दिनों में मॉब लिंचिंग के मामले इतने बढ़ गए इनपर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई के महीने में केंद्र सरकार को राज्यों को स्थिति की गंभीरता समझाते हुए सलाह देने और इससे निपटने के लिए कदम उठाने के लिए कहने का निर्देश दिया.

इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिह ने कहा था कि ‘अगर जरूरत पड़े’ तो मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ राज्यों को ‘सख्त क़ानून’ बनाना चाहिए.

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