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‘टच द सन’ मिशन लांच, 9.30 करोड़ मील की दूरी तय कर 5 नवंबर को सूर्य की कक्षा में करेगा प्रवेश

Updated at : 13 Aug 2018 8:12 AM (IST)
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‘टच द सन’ मिशन लांच, 9.30 करोड़ मील की दूरी तय कर 5 नवंबर को सूर्य की कक्षा में करेगा प्रवेश

वाशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ‘टच द सन’ मिशन के तहत रविवार को पार्कर सोलर प्रोब यान को लॉन्च कर दिया. दुनिया का यह पहला अंतरिक्ष यान है, जो सूर्य के सबसे नजदीक से गुजरेगा. शनिवार को हीलियम अलार्म बजने की वजह से यह यान घंटे की देरी से रवाना हुआ. इस यान […]

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वाशिंगटन : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ‘टच द सन’ मिशन के तहत रविवार को पार्कर सोलर प्रोब यान को लॉन्च कर दिया. दुनिया का यह पहला अंतरिक्ष यान है, जो सूर्य के सबसे नजदीक से गुजरेगा.

शनिवार को हीलियम अलार्म बजने की वजह से यह यान घंटे की देरी से रवाना हुआ. इस यान को डेल्टा-4 रॉकेट से केप कानावेरल एयरफोर्स स्टेशन से भेजा गया. यह 85 दिन बाद पांच नवंबर को सूर्य की कक्षा में पहुंचेगा.

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अगले सात साल तक यह यान सूर्य के कोरोना का 24 चक्कर लगायेगा. कार के आकार वाला यह यान 4.30 लाख मील प्रति घंटे की रफ्तार से सूरज का चक्कर लगायेगा.

सूरज तक पहुंचने की इस यात्रा के दौरान यह यान कई ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण मार्ग से होकर भी गुजरेगा. इसमें बुध ग्रह का गुरुत्वाकर्षण मार्ग भी इसकी मदद करेगा.

धरती और सूरज के बीच की औसत दूरी 9 करोड़ 30 लाख मील है. यह यान सूरज के वायुमंडल जिसे कोरोना कहते हैं, का विस्तृत अध्ययन करेगा.

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कोरोना को इंसानी आंखों से सूर्य ग्रहण के दौरान देखा जा सकता है. यह धुंधला सा झिलमिलाता वातावरण होता है. सूरज के इतने करीब पहुंचने वाला यह अब तक पहला यान होगा. इससे पहले लॉन्च किये गये मिशन सफल नहीं हो सके थे.

धरती से 500 गुना ज्यादा रेडिएशन झेलेगा यह यान

इस यान को बेहद शक्तिशाली हीट शील्ड से सुरक्षित किया गया है, ताकि यह सूरज के पास ताप को झेल सके और धरती की तुलना में 500 गुना ज्यादा रेडिएशन झेल सके. यह कार्बन शील्ड 11.43 सेमी मोटी है. यह यान जब सूरज के सबसे करीब से गुजरेगा, तो वहां का तापमान 2500 डिग्री सेल्सियस तक होगा. नासा के मुताबिक, अगर सबकुछ ठीक रहा, तो यान के अंदर का तापमान 85 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा.

11 लाख लोगों के नाम भी सूरज तक पहुंचेंगे

इस यान के साथ करीब 11 लाख लोगों के नाम भी सूरज तक पहुंचेंगे. इसी साल मार्च में नासा ने अपने ऐतिहासिक मिशन का हिस्सा बनने के लिए लोगों से नाम मंगाये थे. नासा ने बताया था कि मई तक करीब 11 लाख 37 हजार 202 नाम उन्हें मिले थे, जिन्हें मेमोरी कार्ड के जरिये यान के साथ भेजा गया है.

अमेरिकी खगोलशास्त्री के नाम पर है यह मिशन

इस यान का नाम अमेरिकी सौर खगोलशास्त्री यूजीन नेवमैन पार्कर के नाम पर रखा गया है. इन्होंने 1958 में पहली बार अनुमान लगाया था कि सौर हवाएं होती हैं. आवेशित कणों और चुंबकीय क्षेत्रों की धारा होती हैं, जो सूर्य से निकलती रहती हैं. जब ये धाराएं तेजी से निकलती हैं, तो धरती पर उपग्रह लिंक प्रभावित होता है. ऐसा क्यों होता है, अब मिशन इस रहस्य से ही पर्दा उठायेगा. पार्कर अब पहले जीवित वैज्ञानिक बन गये हैं, जिनके नाम पर मिशन है.

सूरज के करीब जाने वाला पहला यान था हेलियोस-2

हेलियोस-2 यान सूरज के सबसे नजदीक से गुजरा था. 1976 में यह यान सूरज के करीब 4 करोड़ 30 किलोमीटर पास तक गया था.

उड़न तश्तरी बनेगी सन प्रोब की सनस्क्रीन

नासा ने पार्कर सोलर प्रोब को सूरज के अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए आठ फीट की उड़न तश्तरी बनायी है. एपीएल में मिशन प्रोजेक्ट साइंटिस्ट निकी फॉक्स ने बताया कि उनकी टीम ने इस रक्षा कवच को उड़न तश्तरी नाम दिया है.

सुब्रमण्यम चंद्रशेखर ने इस मिशन के लिए तैयार की थी जमीन

साठ साल पहले अगर भारतीय-अमेरिकी खगोल भौतिकशास्त्री सुब्रमण्यम चंद्रशेखर ने ‘सौर पवन’ के अस्तित्व के प्रस्ताव वाले शोधपत्र का प्रकाशन अपने जर्नल में करने का साहस नहीं दिखाया होता, तो ‘टच द सन’ के पहले इंसानी मिशन की मौजूदा शक्ल शायद कुछ और ही होती. ‘सौर पवन’ सूर्य से बाहर वेग से आने वाले आवेशित कणों या प्लाज़्मा की बौछार को नाम दिया गया है. ये कण अंतरिक्ष में चारों दिशाओं में फैलते जाते हैं. इन कणों में मुख्यतः प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन (संयुक्त रूप से प्लाज्मा) से बने होते हैं, जिनकी ऊर्जा लगभग एक किलो इलेक्ट्रॉन वोल्ट (केईवी) हो सकती है.

प्रोजेक्ट : एक नजर में

103 अरब रुपये इस प्रोजेक्ट पर खर्च

09 फीट 10 इंच लंबा है यह यान

612 किलोग्राम है इसका वजन

1371 डिग्री तापमान सहने की क्षमता है यान में

190 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलेगा यान

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