संविधान निर्माण में महिलाएं

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सरोजिनी नायडू (1879-1949) इंडियन नेशनल कांग्रेस अध्यक्ष सरोजनी नायडू पहली महिला गवर्नर थीं. सरोजिनी नायडू ने लंदन में उपस्थित सांसदों से भारतीय संविधान संशोधन के मसौदे पर महिलाओं के वोट का अधिकार देने की वकालत की थी, जिसके बाद से इस पर विचार किया गया था. सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 में हुआ […]

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सरोजिनी नायडू (1879-1949)

इंडियन नेशनल कांग्रेस अध्यक्ष सरोजनी नायडू पहली महिला गवर्नर थीं. सरोजिनी नायडू ने लंदन में उपस्थित सांसदों से भारतीय संविधान संशोधन के मसौदे पर महिलाओं के वोट का अधिकार देने की वकालत की थी, जिसके बाद से इस पर विचार किया गया था. सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 में हुआ था. उनके पिता अघोरनाथ चट्टोपध्याय एक वैज्ञानिक और शिक्षाशास्त्री थे. उन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज की स्थापना की थी. उनकी मां वरदा सुंदरी कवयित्री थीं और बंगाली भाषा में कविताएं लिखती थीं. सरोजिनी आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं. उनके एक भाई वीरेंद्र नाथ क्रांतिकारी थे और एक भाई हरेंद्र नाथ कवि, कथाकार और कलाकार थे. सरोजिनी नायडू होनहार छात्रा थीं और उर्दू, तेलुगू, इंग्लिश, बांग्ला और फारसी भाषा में निपुण थीं. 12 साल की छोटी उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास कर ली थी. उन्होंने मद्रास प्रेसीडेंसी में पहला स्थान हासिल किया था. उनके पिता चाहते थे कि वह गणितज्ञ या वैज्ञानिक बनें लेकिन उनकी रुचि कविता में थी.

उनकी कविता से हैदराबाद के निजाम बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने सरोजिनी नायडू को विदेश में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति दी. 16 वर्ष की आयु में वे इंग्लैंड गयीं. वहां पहले उन्होंने किंग कॉलेज लंदन में दाखिला लिया उसके बाद कैंब्रिज के ग्रीतान कॉलेज से शिक्षा हासिल की. वहां वे उस दौर के प्रतिष्ठित कवि अार्थर साइमन और इडमंड गोसे से मिलीं. इडमंड ने सरोजिनी को भारतीय विषयों को ध्यान में रख कर लिखने की सलाह दी. उन्होंने नायडू को भारत के पर्वतों, नदियों, मंदिरों और सामाजिक परिवेश को अपनी कविता में समाहित करने की प्रेरणा दी.

उनके द्वारा संग्रहित द गोल्डन थ्रेशहोल्ड (1905), द बर्ड ऑफ टाइम (1912) और द ब्रोकन विंग (1912) बहुत सारे भारतीयों और अंग्रेजी भाषा के पाठकों को पसंद आयी. 15 साल की उम्र में वे डॉ गोविंदराजुलू नायडू से मिलीं और उनको उनसे प्रेम हो गया. डॉ गोविंदराजुलू पेशे से एक डॉक्टर थे. अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सरोजिनी ने 19 साल की उम्र में विवाह कर लिया. उन्होंने अंतरजातीय विवाह किया था, जो कि उस दौर में मान्य नहीं था. यह एक तरह से क्रांतिकारी कदम था, मगर उनके पिता ने उनका पूरा सहयोग किया था.

वर्ष 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में शामिल हुईं. इस आंदोलन के दौरान वे गोपाल कृष्ण गोखले, रवींद्रनाथ टैगोर, मोहम्मद अली जिन्ना, एनी बेसेंट, सीपी रामा स्वामी अय्यर, गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू से मिलीं. भारत में महिला सशक्तीकरण और महिला अधिकार के लिए भी उन्होंने आवाज उठायी. उन्होंने राज्य स्तर से लेकर छोटे शहरों तक हर जगह महिलाओं को जागरूक किया. वर्ष 1925 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयीं. सविनय अवज्ञा आंदोलन में वे गांधीजी के साथ जेल भी गयीं. वर्ष 1942 के ̔भारत छोड़ो आंदोलन में भी उन्हें 21 महीने के लिए जेल जाना पड़ा. सरोजिनी नायडू पर भी गांधीजी का असर था. स्वतंत्रता के बाद सरोजिनी भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं. संविधान सभा में रहते हुए महिला अधिकारों के लिए पहल की. उत्तर प्रदेश का राज्यपाल घोषित होने के बाद वे लखनऊ में बस गयीं. उनकी मृत्यु 2 मार्च, 1949 को दिल का दौरा पड़ने से लखनऊ में हुई.

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