नौकरियों की कमी से जूझ रहा है भारत लेकिन चीन ने 5 सालों में पैदा की 6.5 करोड नौकरियां

Updated at : 23 Oct 2017 8:43 AM (IST)
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नौकरियों की कमी से जूझ रहा है भारत लेकिन चीन ने 5 सालों में पैदा की 6.5 करोड नौकरियां

बीजिंग : भारत में जहां रोजगार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. वहीं चीन ने रोजगार और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में लंबी दूरी तय कर ली है. रोजगार और उद्यमिता नीतियों की वजह से पिछले पांच सालों में करीब 6.5 करोड़ नौकरियां चीन में सृजित किए गए हैं. एक चीनी अधिकारी ने यह बात […]

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बीजिंग : भारत में जहां रोजगार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. वहीं चीन ने रोजगार और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में लंबी दूरी तय कर ली है. रोजगार और उद्यमिता नीतियों की वजह से पिछले पांच सालों में करीब 6.5 करोड़ नौकरियां चीन में सृजित किए गए हैं. एक चीनी अधिकारी ने यह बात कही. मानव संसाधन और सामाजिक सुरक्षा मंत्री यिन वीमिन ने कहा कि चीन वर्ष 2020 तक एक समृद्ध समाज के निर्माण की दिशा में आगे बढने के साथ-साथ एक सतत रोजगार बाजार को लेकर भी आश्वस्त है. उन्होंने कहा कि पिछले पांच सालों में चीन में 6.5 करोड नौकरियों के अवसर और 2.5 करोड लोगों को पुनर्नियुक्त किया गया है.

उन्होंने कहा कि चीन का रोजगार बाजार स्थिर है. पिछले पांच साल में शहरी क्षेत्रों में औसतन 1.3 करोड नई नौकरियां हर साल सृजित की गई हैं. चाइना डेली ने उनके हवाले से कहा कि अगले साल, विश्वविद्यालयों के स्नातकों की संख्या 8 करोड के उच्च स्तर पर पहुंच जाएगी और यह संख्या उच्च बनी रहेगी. इस दौरान, देश में कुशल श्रमिकों के लिए आपूर्ति और मांग में अंतर बना रहेगा. हालांकि, चीनी अर्थव्यवस्था में वृद्धि की वजह से शहरी क्षेत्रों में पंजीकृत बेरोजगारी दर नीचे बनी रही. यिन ने कहा कि स्थायी रोजगार सुनिश्चित करने के लिए चीन ने रोजगार समर्थित और उद्यमिता नीतियां की श्रृंख्ला पेश की. जबकि, देश की उद्यमशीलता लहर और तृतीयक उद्योग (ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने वाले उद्योग) में वृद्धि ने भी नौकरी सृजित करने में मदद की

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चीन में नौकरियां पैदा होने की वजह
चीन ने युवाओं के लिए अवसर पैदा करने के लिए मैन्यूफैक्चरिंग को अपना आधार बनाया. आज उसे ‘दुनिया की फैक्टरी’ के नाम से जाना जाता है. चीन में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के निर्माण के लिए विख्यात सेनजेन सिटी एक दशक पहले मछुआरों का शहर रहा करता था, लेकिन अब वह चीन का सिलिकॉन वैली है. आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए समुद्रीतटों के किनारे मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट बसाये गये. हाइस्पीड ट्रेन नेटवर्क और नये शहरों का निर्माण कर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया गया.. आज चीन हर रोज 35,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा करता है.
भारत में क्यों नहीं पैदा हो रही हैं नौकरियां
सरकार के तमाम योजनाओं के बावजूद नौकरियों की संख्या में वृद्धि की बजाय कटौती हो रही है. भारत में हर महीने दस लाख युवा जॉब मार्केट में जुड़ते हैं. हर साल एक करोड़ 20 लाख नौकरियों की जरूरत हैलेकिन नौकरियां बढ़ने की बजाय कम होते जा रही है.सरकार ने मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया का नारा भी दिया लेकिन तीन साल के इस अभियान के बावजूद चीन को सस्ते खिलौने व दीपावली की लाइट बनाने में टक्कर नहीं दे पाया. अर्थास्त्रियों के मुताबिक सेवा क्षेत्र के मुकाबले मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर ज्यादा नौकरियां पैदा करती है.
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