आतंकवाद और अतिवाद को परास्त करने के लिए मिल कर प्रयास करने की जरूरत : मोदी

Updated at : 09 Jun 2017 7:37 PM (IST)
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आतंकवाद और अतिवाद को परास्त करने के लिए मिल कर प्रयास करने की जरूरत : मोदी

भारत, पाकिस्तान बने एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य अस्ताना : भारत और पाकिस्तान शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के पूर्णकालिक सदस्य बन गये. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खतरे से निपटने और संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को चोट पहुंचाये बिना संपर्क बढ़ाने के लिए एससीओ सदस्यों के बीच समन्वित प्रयासों का मजबूती से समर्थन […]

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भारत, पाकिस्तान बने एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य

अस्ताना : भारत और पाकिस्तान शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के पूर्णकालिक सदस्य बन गये. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खतरे से निपटने और संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को चोट पहुंचाये बिना संपर्क बढ़ाने के लिए एससीओ सदस्यों के बीच समन्वित प्रयासों का मजबूती से समर्थन किया. मोदी ने कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में उम्मीद जतायी कि एससीओ परिवार में भारत के प्रवेश से आतंकवाद तथा क्षेत्र के सामने मौजूद अन्य चुनौतियों से निपटने की दिशा में इस समूह को नयी गति मिलेगी.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आतंकवाद मानवता को एक बड़ा खतरा है.’ उन्होंने कहा कि आतंकवाद और अतिवाद को परास्त करने के लिए मिल कर प्रयास करने की आवश्यकता है. मोदी ने कट्टरपंथ, आतंकवादियों की भर्ती, प्रशिक्षण एवं वित्त पोषण समेत आतंकवाद के खतरे से निपटने के समन्वित प्रयासों पर बल दिया. उन्होंने कहा, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि भारत-एससीओ सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा और इसे नयी दिशा देगा.’ प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता की भी बात की और कहा कि यह व्यापार एवं निवेश बढ़ाने के लिए अहम है.

उन्होंने कहा, ‘एससीओ देशों के साथ हमारा सहयोग व्यापक है. हम संपर्क बढ़ाने पर और ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं.’ चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रकार के सहयोग में संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता अहम कारक होने चाहिए. मोदी का यह बयान ऐसे समय में महत्व रखता है, जब कुछ ही सप्ताह पहले भारत ने बीजिंग में आयोजित हाई प्रोफाइल ‘बेल्ट एंड रोड फोरम’ का बहिष्कार कर दिया था. इस सम्मेलन में विश्व के 29 नेताओं ने भाग लिया था.

भारत ने 50 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को लेकर अपनी चिंताओं को रेखांकित करने के लिए शिखर सम्मेलन से दूरी बनायी. चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (बीआरआई) का हिस्सा है. यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जेवाले कश्मीर से होकर गुजरता है.

शी ले मिले मोदी

इससे पहले मोदी ने शिखर सम्मेलन के इतर शी से मुलाकात की और उन्होंने एक दूसरे की ‘मूल चिंताओं’ के सम्मान करने और विवादों को उचित तरीके से निपटाने की जरूरत पर जोर दिया. शी के साथ अपनी मुलाकात के दौरान मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों को अपनी क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, संवाद को मजबूत करते हुए और अंतरराष्ट्रीय मामलों में तालमेल बढ़ाते हुए एक-दूसरे की चिंताओं का सम्मान करना चाहिए तथा अपने विवादों का उचित तरीके से निपटारा करना चाहिए. सम्मेलन में मोदी के संबोधन के बाद भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य बने। यह चीन के प्रभुत्व वाले इस सुरक्षा समूह का पहला विस्तार है. इस संगठन को नाटो का शक्ति-संतुलन करने वाले संगठन के तौर पर देखा जा रहा है.

फिलहाल एससीओ की अध्यक्षता कर रहे कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव ने यहां संगठन के शिखर-सम्मेलन में घोषणा करते हुए कहा, ‘भारत और पाकिस्तान अब एससीओ के सदस्य हैं. यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण क्षण है.’ मोदी ने कहा कि एससीओ युद्ध पीड़ित अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने में मदद करेगा. उन्होंने भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए एससीओ के सभी देशों का आभार व्यक्त किया प्रधानमंत्री ने कहा कि एससीओ में भारत की सदस्यता सदस्य देशों के बीच सहयोग को निश्चित ही नयी उंचाइयों पर ले जायेगी.

उन्होंने कहा, ‘ऊर्जा, शिक्षा, कृषि, रक्षा, खनिज, क्षमता निर्माण, विकास, साझेदारी, व्यापार और निवेश इसके वाहक हैं.’ प्रधानमंत्री ने एससीओ से जलवायु परिवर्तन से निपटने के भी प्रयास करने का आह्वान किया. मोदी ने कहा कि एससीओ की यात्रा में यह एक ऐतिहासिक मोड़ है और भारत इस समूह में सक्रिय एवं सकारात्मक भागीदारी के लिए तैयार है. एससीओ ने जुलाई 2015 में रूस के ऊफा में हुए सम्मेलन में भारत को समूह का सदस्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी. उस समय भारत और पाकिस्तान को सदस्यता प्रदान करने के लिए प्रशासनिक अवरोधों को दूर किया गया था. रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों ने 2001 में शंघाई में एक शिखर-सम्मेलन में एससीओ की नींव रखी थी.

भारत, ईरान और पाकिस्तान को 2005 में अस्ताना में हुए सम्मेलन में पर्यवेक्षकों के रुप में शामिल किया गया था. जून 2010 में ताशकंद में हुए एससीओ के सम्मेलन में नयी सदस्यता पर लगी रोक हटायी गयी थी और समूह के विस्तार का रास्ता साफ हो गया. भारत का मानना है कि एससीओ के सदस्य के रूप में वह क्षेत्र में आतंकवाद के खतरे से निपटने में बडी भूमिका निभा सकेगा.

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