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Pitru Paksha 2022: कौआ 16 दिन रहता है हर घर की छत का मेहमान, श्राद्ध पक्ष में जानें क्यों दी जाती है दावत

Updated at : 11 Sep 2022 10:33 AM (IST)
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Pitru Paksha 2022: कौआ 16 दिन रहता है हर घर की छत का मेहमान, श्राद्ध पक्ष में जानें क्यों दी जाती है दावत

Pitru Paksha 2022: अलीगढ़ के ज्योतिषाचार्य पंडित ह्रदय रंजन शर्मा ने बताया कि पितृ पक्ष में पित्तरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने के बाद जितना जरूरी भांजे और ब्राह्मण को भोजन कराना होता है, उतना ही जरूरी कौआ को भोजन कराना होता है.

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Aligarh News: श्राद्ध पक्ष यानी पितृ पक्ष में कौआ के छत पर आने का इंतजार रहता है, उसे सम्मान से दावत दी जाती है. श्राद्ध पक्ष को छोड़कर अन्य दिन कौआ को दुत्कार के अलावा कुछ नहीं मिलता. उसका छत पर आना, चिल्लाना, किसी को पसंद नहीं आता है. आखिर श्राद्ध पक्ष में कौआ हर घर की छत पर मेहमान नवाजी क्यों कराता है, आइए जानते हैं.

ब्राह्मण के समान कौआ की दावत जरूरी

अलीगढ़ के ज्योतिषाचार्य पंडित ह्रदय रंजन शर्मा ने बताया कि पितृ पक्ष में पित्तरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, इसके साथ ही इस दिन कौवों को भी भोजन कराया जाता है. शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करने के बाद जितना जरूरी भांजे और ब्राह्मण को भोजन कराना होता है, उतना ही जरूरी कौआ को भोजन कराना होता है. माना जाता है कि कौए इस समय हमारे पित्तरों का रूप धारण करके पृथ्वीं पर उपस्थित रहते हैं.

कौआ से जुड़ी है यह पौराणिक कथा

त्रेतायुग में जब भगवान राम ने अवतार लिया. इन्द्र के पुत्र जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मारी. तब भगवान श्रीराम ने तिनके का बाण चलाकर जयंत की आंख फोड़ दी. जब उसने अपने किए के लिए भगवान राम से माफी मांगी, तब राम ने उसे यह वरदान दिया कि तुम्हें अर्पित किया भोजन पितरों को मिलेगा. तभी से श्राद्ध में कौवों को भोजन कराने की परंपरा चली आ रही है. पितृ पक्ष के समय पंचबली चींटी, गाय, कौआ, कुत्ता, देवादि बलि के लिए निकाली जाती है.

कौआ के बारे में विचित्र बातें…

  • कौआ के बारे में कई विचित्र बातें सुनने में आती हैं.

  • कौआ अतिथि आगमन का सूचक एवं पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है.

  • कौआ की कभी भी स्वाभाविक मृत्यु नहीं होती. यह पक्षी कभी किसी बीमारी, वृद्धा अवस्था के कारण मृत्यु को प्राप्त नहीं होता. इसकी मृत्यु आकस्मिक रूप से होती है.

  • जिस दिन कौआ की मृत्यु होती है, उस दिन उसका साथी भोजन ग्रहण नहीं करता.

  • कौआ कभी भी अकेले में भोजन ग्रहण नहीं करता, यह पक्षी किसी साथी के साथ मिलकर ही भोजन करता है.

  • कौआ में नर और मादा दोनों एक समान ही दिखाई देते है. यह बगैर थके मीलों उड़ सकता है.

कौआ से जुड़े शकुन और अपशकुन

  • यदि आप शनिदेव को प्रसन्न करना चाहते हो, तो कौआ को भोजन करना चाहिए.

  • यदि आपके मुंडेर पर कोई कौआ बोले, तो वह मेहमान के आने का सूचक होता है.

  • यदि कौआ घर की उत्तर दिशा से बोले, तो समझे जल्द ही आप पर लक्ष्मी की कृपा होने वाली है.

  • कौआ पश्चिम दिशा से बोले तो घर में मेहमान आते है.

  • कौआ पूर्व में बोले, तो शुभ समाचार आता है.

  • कौआ दक्षिण दिशा से बोले, तो बुरा समाचार आता है.

  • कौआ को भोजन कराने से अनिष्ट व शत्रु का नाश होता है.

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