ट्रंप बोले- ईरान युद्ध के बाद क्यूबा का नंबर… अटैक होगा या पीस डील से बनेगी बात?

एयरफोर्स वन पर सवार होने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).
Trump on Cuba: ईरान युद्ध के बाद क्यूबा का नंबर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया कि क्यूबा समझौता करना चाहता है. उन्होंने कहा कि डील बहुत जल्द होगी यह फिर कोई एक्शन हो सकता है.
Trump on Cuba: अमेरिका इन दिनों ईरान में उलझा हुआ है. लेकिन उसके भविष्य के अभियानों की भी तैयारी पूरी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका जल्द ही क्यूबा के साथ कोई समझौता कर सकता है या फिर अन्य कदम उठा सकता है. उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि लंबे समय से तनावपूर्ण रहे दोनों देशों के रिश्तों में जल्द कोई नया घटनाक्रम हो सकता है. क्यूबा और अमेरिका के बीच लंबे समय से संकट बना हुआ है. लेकिन वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद से क्यूबा पूरी तरह अकेला पड़ गया है.
रविवार को, वॉशिंगटन से फ्लोरिडा जाते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘क्यूबा एक असफल देश है. क्यूबा भी समझौता करना चाहता है और मुझे लगता है कि हम बहुत जल्द या तो कोई डील करेंगे या फिर जो करना होगा वह करेंगे. हम क्यूबा से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन क्यूबा से पहले हम ईरान का मामला निपटाएंगे.’
ट्रंप की क्यूबा पर सख्ती कैसे शुरू हुई
वॉशिंगटन और हवाना (क्यूबा की राजधानी) के बीच कई वर्षों से लगे प्रतिबंधों, कूटनीतिक तनाव और प्रवासन व सुरक्षा से जुड़े विवादों के कारण रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. जनवरी 2026 में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद अमेरिका ने वेनेजुएला से क्यूबा जाने वाली तेल आपूर्ति और वित्तीय लेनदेन रोक दिए. 11 जनवरी 2026 को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अब ‘क्यूबा को न तेल मिलेगा और न पैसा’ और क्यूबा की सरकार से जल्द समझौता करने को कहा.
इसके बाद 29 जनवरी 2026 को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (14380) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें क्यूबा को तेल सप्लाई करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की अनुमति दी गई और क्यूबा को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया. वेनेजुएला में तख्ता पलट के बाद, आयातित तेल की आपूर्ति में बाधा के कारण क्यूबा का आर्थिक संकट और गहरा गया है. यह तेल बिजली संयंत्रों और परिवहन नेटवर्क को चलाने के लिए बेहद जरूरी है. ईंधन की कमी के कारण अधिकारियों को कई इलाकों में बिजली की कटौती करनी पड़ी है और कुछ सार्वजनिक सेवाओं को सीमित करना पड़ा है.
क्यूबा बातचीत के लिए तैयार
अब डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान से जुड़े ऑपरेशन खत्म होने के बाद अमेरिका क्यूबा पर कदम उठा सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है जब क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कनेल ने पुष्टि की कि अमेरिका और क्यूबा के बीच द्विपक्षीय मतभेदों को लेकर बातचीत हुई है. क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कानेल ने शुक्रवार को कहा, ‘इन वार्ताओं का उद्देश्य संवाद के माध्यम से उन द्विपक्षीय मतभेदों का समाधान ढूंढना है जो दोनों देशों के बीच मौजूद हैं.’ उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि बातचीत से दोनों लंबे समय से प्रतिद्वंद्वी देशों को टकराव से दूर ले जाने में मदद मिलेगी.
हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने के बावजूद सरकारों के बीच कई बड़े मतभेद अब भी बने हुए हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि किसी भी तरह की रियायत या दबाव में कमी के लिए हवाना को राजनीतिक और आर्थिक रियायतें देनी पड़ सकती हैं, जबकि क्यूबा के नेताओं का कहना है कि बातचीत में देश की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए.
‘फ्रेंडली टेकओवर’ की बात
हाल के हफ्तों में ट्रंप ने कई बार बयान दिए हैं जिनमें उन्होंने कहा कि क्यूबा पतन के कगार पर है या अमेरिका के साथ समझौता करने को तैयार है. 27 जनवरी को उन्होंने यह भी कहा था कि क्यूबा पर दोस्ताना तरीके से नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन फिर जोड़ा कि हो सकता है यह दोस्ताना नियंत्रण न हो. ‘फ्रेंडली टेकओवर’ का मतलब क्या हो सकता है? विश्लेषकों के अनुसार इसका मतलब अमेरिका समर्थित सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक बदलाव से हो सकता है. फ्रेंडली टेकओवर न हो तो? ईरान या फिर वेनेजुएला जैसा अभियान.
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5 मार्च को व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा कि क्यूबा बहुत बुरी तरह डील करना चाहता है, लेकिन अमेरिका पहले ईरान के मुद्दे पर ध्यान देगा. 9 मार्च को फ्लोरिडा में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि रुबियो आने वाले समय में क्यूबा भी जा सकते हैं. रुबियो मूल रूप से क्यूबा के ही हैं. उनके माता पिता क्यूबा की कम्यूनिस्ट सरकार की प्रताड़ना से बचने के लिए अमेरिका के मियामी भाग गए थे.
क्यूबा में अमेरिका की दिलचस्पी क्यों
क्यूबा कैरेबियन का सबसे बड़ा द्वीप देश है, जो अटलांटिक महासागर, मैक्सिको की खाड़ी और कैरेबियन सागर के संगम पर स्थित है. यह अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य से लगभग 150 किलोमीटर दक्षिण में है. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के बाद रूस और अमेरिका के बी कोल्ड वॉर के समय क्यूबा मिसाइल संकट यूएस के लिए बहुत बड़ी समस्या बन था. ऐसे में अमेरिका यहां पर अपने लिए फ्रेंडली सरकार चाहता है.
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ट्रंप की क्यूबा पर नई रणनीति इसी मकसद के लिए ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति का हिस्सा मानी जा रही है. इसका उद्देश्य क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को कमजोर करना और संभावित राजनीतिक बदलाव की दिशा में दबाव बनाना है.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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