बंगाल के गवर्नर ने राजभवन में जनता की शिकायतों के समाधान के लिए की ‘शांति कक्ष’ की शुरुआत

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बंगाल के गवर्नर ने राजभवन में जनता की शिकायतों के समाधान के लिए की ‘शांति कक्ष’ की शुरुआत

बंगाल में 8 जून को हुई पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से ही लगातार हिंसा जारी है. नामांकन के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हो चुकी है. दक्षिण 24 परगना के भांगड़ और कैनिंग में हुई हिंसा के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने उन इलाकों का दौरा किया था.

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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने दक्षिण 24 परगना जिले के हिंसा प्रभावित कैनिंग शहर का दौरा करने के कुछ घंटे बाद राजभवन में जनता की शिकायतों का समाधान करने के लिए एक सहायता कक्ष की शुरुआत की. एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी है. सहायता कक्ष को ‘शांति कक्ष’ के रूप में वर्णित करते हुए एक बयान में कहा गया कि इसे “चुनाव से पहले बंगाल में आपराधिक धमकी मिलने के बाद लोगों से प्राप्त कई अभ्यावेदनों को ध्यान में रखते हुए खोला गया है.’

लोगों की शिकायतों को एसईसी और राज्य सरकार को भेजेंगे राज्यपाल

पश्चिम बंगाल में आठ जुलाई को पंचायत चुनाव होने हैं. बयान के मुताबिक, सहायता कक्ष उचित कार्रवाई के लिए लोगों के मुद्दों को सरकार और राज्य चुनाव आयुक्त के पास भेजेगा. इसमें कहा गया है कि हिंसा प्रभावित इलाकों में राज्यपाल के लगातार दौरा करने के क्रम में और पंचायत चुनाव से पहले आपराधिक धमकी मिलने के बाद लोगों से प्राप्त कई अभ्यावेदनों के मद्देनजर, शिकायतों के समाधान के लिए राजभवन में एक सहायता कक्ष खोला गया है.

8 जुलाई को है बंगाल में पंचायत चुनाव

बंगाल में 8 जून को हुई पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद से ही लगातार हिंसा जारी है. नामांकन के दौरान हुई हिंसा में कई लोगों की मौत हो चुकी है. दक्षिण 24 परगना के भांगड़ और कैनिंग में हुई हिंसा के बाद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने उन इलाकों का दौरा किया था. इसके बाद उन्होंने कहा था कि हिंसा हर हाल में खत्म होनी चाहिए. लोकतंत्र में जीत-हार वोट की गिनती से तय होना चाहिए, न कि शवों की गिनती से.

तृणमूल कांग्रेस के सांसद ने की राज्यपाल की आलोचना

राज्यपाल के भांगड़ और कैनिंग दौरे की राज्य की सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस ने जमकर आलोचना की है. तृणमूल के लोकसभा सांसद और वरिष्ठ नेता सौगत रॉय ने मीडिया के सामने राज्यपाल के इस आचरण की निंदा की. उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद किसी भी हिंसा को रोकने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. अगर हिंसा होती है, तो उस पर राज्य चुनाव आयोग विचार करेगा, न कि राज्यपाल.

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