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Kartik Maas 2022: कार्तिक में तुलसी का रोपण, दान और पूजन से होगा फायदा, जीवन के कष्ट हो जाएंगे  दूर

Updated at : 05 Nov 2022 5:46 PM (IST)
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Kartik Maas 2022: कार्तिक में तुलसी का रोपण, दान और पूजन से होगा फायदा, जीवन के कष्ट हो जाएंगे  दूर

Kartik Maas 2022: जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर में सुख, शांति, सौभाग्य, ऐश्वर्य एवं धन हमेशा बना रहता है. भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्ति के लिए कार्तिक मास में तुलसी पूजन किया जाता है.

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Kartik Maas 2022:   सनातन धर्म में तुलसी का पौधा अत्यंत पूजनीय माना गया है. घर में तुलसी रोपण करने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है तथा हर प्रकार के विकारों से सुरक्षा मिलती है. जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर में सुख, शांति, सौभाग्य, ऐश्वर्य एवं धन हमेशा बना रहता है. भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्ति के लिए कार्तिक मास में तुलसी पूजन किया जाता है.

5 नवंबर 2022 को शालिग्राम और तुलसी विवाह की परंपरा निभाई जा रही है. श्रीहरि भगावन विष्णु के शालीग्राम बनने के पीछे क्या है वजह और क्यों तुलसी से उन्हें करना पड़ा विवाह. वहीं मंगल का आशीष देने वाली तुलसी की उत्पत्ति कैसे हुई.

कहा जाता है जहां पर तुलसी का पौधा होता है और उसकी पूजा-सेवा की जाती है, उस घर में लक्ष्मीजी की सदैव कृपा बनी रहती है. शास्त्रों में माना गया है की रविवार, एकादशी और सूर्य व चंद्र ग्रहण के समय तुलसी को जल नहीं चढ़ाना चाहिए, इसके साथ ही इस दिन तुलसी के पत्तों को भी नहीं तोड़ना चाहिए.

क्या है कार्तिक मास में तुलसी पूजन का महत्व?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में तुलसी पूजन करने से भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है. जगत के पालनहार अपने भक्तों को सुख, समृद्धि, यश, ऐश्वर्य, धन तथा सद्बुद्धि का वरदान देते हैं. कार्तिक मास में तुलसी की पूजा करने से यमदूतों का भय समाप्त होता है. जो भक्त सच्ची श्रद्धा से तुलसी पूजन करते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

तुलसीदल के बिना नहीं लगता है भोग

भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कोई भी पूजा तुलसी दल के बिना पूरी नहीं मानी जाती है. वहीं हनुमान जी को भी भोग में तुलसी दल बहुत ही प्रिय होती है. पद्मपुराण के अनुसार कलियुग में तुलसी का पूजन, कीर्तन, ध्यान,रोपण और धारण करने से वह समस्त पाप को जलाती है और स्वर्ग एवं मोक्ष प्रदान करती है. यदि मंजरी युक्त तुलसी पत्रों के द्वारा भगवान श्री विष्णु की पूजा की जाए तो अनंत पुन्यफलों की प्राप्ति होती है.

क्या है तुलसी का वैज्ञानिक महत्व?

  • तुलसी के पत्तों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता पायी जाती है

  • इसके नियमित सेवन से सर्दी जुकाम फ्लू जैसी छोटी मोटी परेशानियां नहीं हो पाती

  • साथ ही गंभीर बीमरियों में भी इसका काफी लाभ देखा गया है

  • तुलसी के बीज , संतान उत्पत्ति की समस्यों में कारगर होते हैं.

  • जहाँ भी तुलसी लगती है , उसके आस-पास सकारात्मक ऊर्जा होती है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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