मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देगी राज्य सरकार, नौ सदस्यीय कमेटी गठित, पहली बैठक जल्द
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jul 2023 5:29 PM
राज्य भर के पर्यटन स्थलों पर खोले जाने वाले आयुर्वेद क्लीनिक में पंचकर्म, रसायन चिकित्सा ( तेल मालिश), शोधन चिकित्सा( विरेचन) आदि की सुविधा रहेगी. इससे कम समय में मरीजों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी.
कोलकाता, शिव कुमार राउत : केंद्र सरकार का फोकस है कि भारत वैश्विक स्तर पर मेडिकल और वेलनेस के क्षेत्र में एक ब्रांड के रूप में विकसित हो. मेडिकल टूरिज्म के तहत अब तक 156 देशों के नागरिकों के लिए ई-मेडिकल वीजा सुविधा दी गयी है. इसका फायदा स्थानीय स्तर पर लोगों को भी मिलता है. ऐसे में मेडिकल वैल्यू ट्रेवल एंड वेलनेस (हेल्थ) टूरिज्म को मान्यता देते हुए भारत को एक मेडिकल और वेलनेस टूरिस्ट डेस्टिनेशन (चिकित्सा और कल्याण पर्यटन स्थल) के रूप में बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये हैं. इसी के तहत मेडिकल वीजा की भी शुरुआत की गयी है, जिसे चिकित्सा उपचार को लेकर भारत आने वाले विदेशी यात्रियों को विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्रदान किया जा सकता है. ऐसे में पश्चिम बंगाल को केंद्र सरकार ने मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म के लिए हब के रूप में चिह्नित किया है.
मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य में नौ सदस्यीय एक कमेटी गठित की गयी है. डॉयरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेस इस कमेटी के चेयरमैन और डॉयरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन को-चेयरमैन नियुक्त किये गये हैं. डॉयरेक्टर ऑफ आयुर्वेद भी इस कमेटी के सदस्य हैं. अगले महीने इस कमेटी की पहली बैठक राज्य स्वास्थ्य विभाग में होगी. इस विषय में राज्य स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों के साथ पश्चिम की राजधानी कोलकाता में भी बांग्लादेश, नेपाल, भुटान समेत अन्य देशों से हर साल लाखों पर्यटक घूमने व इलाज के लिए आते हैं. इस वजह से अब मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए केंद्र के साथ मिल कर राज्य सरकार यह कार्य करेगी. इसके लिए राज्य के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर आयुर्वेद व एलोपैथी के क्लीनिक खोले जाने की योजना है. जहां आउट पेसेंट डिपार्टमेंट (ओपीडी) और इंडोर पेसेंट्स डिपार्टमेंट (आइपीडी) की व्यवस्था रहेगी. इन क्लीनिक में फिलहाल एलोपैथी के साथ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से इलाज होगा.
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उक्त योजना के तहत राज्य भर के पर्यटन स्थलों पर खोले जाने वाले आयुर्वेद क्लीनिक में पंचकर्म, रसायन चिकित्सा ( तेल मालिश), शोधन चिकित्सा( विरेचन) आदि की सुविधा रहेगी. इससे कम समय में मरीजों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी.
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केंद्र चिकित्सा और कल्याण पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिल कर एक मजबूत ढांचा तैयार करने जा रहा है. मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है.
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राज्य स्वास्थ्य विभाग के डॉयरेक्टर ऑफ आयुष प्रो. डॉ देवाशीष घोष ने बताया कि अगले महीने ही कमेटी की पहली बैठक होगी. इस बैठक में मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म योजना के क्रियान्वयन व क्लीनिक खोले जाने के लिए स्पॉट चिह्नित किये जाने पर चर्चा होगी. विशेष कर आयुर्वेद योग और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति से पर्यटकों का इलाज किया जायेगा. आयुर्वेद के पंचकर्म व क्यूरेटिव थैरेपी से इलाज पर जोर दिया जायेगा. इससे मरीजों को भर्ती रखने की आवश्यकता नहीं होगी. उन्हें अच्छी चिकित्सा भी मिलेगी. आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ सुमित सूर ने बताया कि मेडिकल एंड वेलनेस टूरिज्म के जरिए राज्य में आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार होगा. काफी लोग आयुर्वेद के संबंध जान सकेंगे. वहीं, पर्यटकों को बेहतर चिकित्सा मिलेगी. राज्य में आयुर्वेद के करीब 2200 डिग्रीधारी डॉक्टर हैं. इस योजना से इन डॉक्टरों को भी रोजगार मिलेगा.
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