आतंकियों के पक्ष में चीन

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आतंकियों के पक्ष में चीन

भारत ने कहा है कि इस प्रकार की घटनाएं आतंकवाद की चुनौती का सामना करने में असल राजनीतिक इच्छा की कमी को दिखाती हैं. चीन के ऐसे ही कदमों की वजह से अमेरिका और भारत समेत कई देश उसे अविश्वास की नजरों से देखते हैं.

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चीन ने संयुक्त राष्ट्र में एक बार फिर पाकिस्तान की तरफदारी करते हुए भारत को अपनी ताकत का अहसास दिलाया है. उसने पाकिस्तान स्थित लश्करे तैयबा के एक आतंकवादी को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के भारत और अमेरिका के प्रस्ताव को ब्लॉक कर दिया है. मुंबई में 26 नवंबर, 2008 को हुए हमले में लिप्त समझे जाने वाले लश्कर सदस्य साजिद मीर का नाम भारत की मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूची में शामिल है. अमेरिका को भी उसकी तलाश है और उसने मीर के ऊपर 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित कर रखा है. अमेरिका ने साजिद को ब्लैक लिस्ट करवाने के लिए सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया था और भारत ने उसका अनुमोदन किया था. चीन ने पिछले साल इस प्रस्ताव को टलवा दिया था.

अब उसने औपचारिक रूप से इसे ब्लॉक कर दिया है. उसने यह कदम ऐसे दिन उठाया जिस दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के बहुचर्चित दौरे पर पहुंचे. भारत और अमेरिका की बढ़ती करीबी पर पैनी नजर गड़ाये चीन को भारतीय प्रधानमंत्री का अमेरिका दौरा अखर रहा है. चीन के विदेश मंत्री ने चीन के सरकारी समाचारपत्र ग्लोबल टाइम्स में एक लेख में भारत को सावधान किया है कि वह चीन को काबू करने के अमेरिका के गैर-जिम्मेदाराना और स्वार्थी खेल का हिस्सा नहीं बने. चीनी विदेश मंत्री की बातों से जाहिर है कि चीन अपने आप को अमेरिका के समान वैश्विक शक्ति मानता है. और सुरक्षा परिषद में अमेरिका और भारत के प्रस्ताव में अड़ंगा लगाकर उसने यही दर्शाने की कोशिश की है.

चीन सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्यों में से एक है और अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर वह जताता रहता है कि वह किसे दोस्त समझता है और किसे नहीं. यह पहली बार नहीं है जब चीन ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को ब्लैक लिस्ट करने के प्रस्ताव को पारित नहीं होने दिया है. चीन ने पिछले वर्ष मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड लश्करे तैयबा प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद के बेटे हाफिज तलाह सईद समेत पांच आतंकवादियों को ब्लैक लिस्ट करने की कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया था. भारत ने कहा है कि इस प्रकार की घटनाएं आतंकवाद की चुनौती का सामना करने में असल राजनीतिक इच्छा की कमी को दिखाती हैं. चीन के ऐसे ही कदमों की वजह से अमेरिका और भारत समेत कई देश उसे अविश्वास की नजरों से देखते हैं.

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