झारखंड के कोल्हान के जंगलों में आयीं दुर्लभ प्रजाति की तितलियां, देखिए एक्सक्लूसिव तस्वीरें
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 28 Nov 2020 9:27 AM
खरसावां (शचिंद्र कुमार दाश) : भारत में तितलियों की 1327 प्रजातियां पायी जाती हैं. इनकी एक सबसे खूबसूरत प्रजाति ‘सफ्फुज्ड स्नो फ्लैट’ इन दिनों झारखंड के कोल्हान के जंगलों में देखी जा रही है. इसे शंख जिरानी के नाम से भी जाना जाता है. वहीं, इस बार ग्रासलैंड, वुडलैंड, पायनियर, ब्लू जे, ब्लू मोर्मन, साउथ बर्डविंग, ट्री निम्फ, अंडमान क्रो प्रजाति की तितलियों की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.
खरसावां (शचिंद्र कुमार दाश) : भारत में तितलियों की 1327 प्रजातियां पायी जाती हैं. इनकी एक सबसे खूबसूरत प्रजाति ‘सफ्फुज्ड स्नो फ्लैट’ इन दिनों झारखंड के कोल्हान के जंगलों में देखी जा रही है. इसे शंख जिरानी के नाम से भी जाना जाता है. वहीं, इस बार ग्रासलैंड, वुडलैंड, पायनियर, ब्लू जे, ब्लू मोर्मन, साउथ बर्डविंग, ट्री निम्फ, अंडमान क्रो प्रजाति की तितलियों की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.
इन सबसे अलग यहां सबसे बड़े आकार की ब्लू मोर्मन तितली भी बड़े पैमाने में मिल रही है. इन तितलियों को देखकर लोग मंत्रमुग्ध हो रहे हैं. सेंट्रल सिल्क बोर्ड के खरसावां स्थित बीएसएमटीसी के प्रभारी (वैज्ञानिक-बी) डॉ तिरुपम रेड्डी ने सफ्फुज्ड स्नो फ्लैट की मनमोहक तस्वीरों को अपने कैमरे में कैद की हैं.

डॉ रेड्डी तीन साल से इन तितलियों पर पर्यवेक्षण कर रहे हैं. उन्होंने खरसावां, कुचाई, सरायकेला, चक्रधरपुर समेत कोल्हान के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक तितलियों की 82 प्रजातियों को कैमरे में कैद किया है. वे हर माह तितलियों के पर्यवेक्षण पर 70 घंटे खर्च करते हैं. डॉ रेड्डी ने बताया कि इस वर्ष कोविड-19 को लेकर किये गये लॉकडाउन के दौरान वायु प्रदूषण कम होने से तितलियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है.
Also Read: असम में अख्तर बनकर मुस्लिम युवती से शादी रचानेवाला झारखंड का बुद्धदेव अब धर्म परिवर्तन का क्यों डाल रहा दबाव, पढ़िए ये रिपोर्टडॉ रेड्डी बताते हैं कि तितलियां पर्यावरण की सबसे अच्छी इंडिकेटर होती हैं. इस बार तितलियों की ऐसी प्रजातियां भी देखी गयी हैं, जो लंबे समय से प्रदूषण के कारण विलुप्त होने के कगार पर थीं. इनकी तादाद बढ़ने का अर्थ है कि इस बार पर्यावरण को काफी फायदा हुआ है.इस वर्ष कोरोना को लेकर लागू की गयी लॉक डाउन के दौरान तितलियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ. इसे वैज्ञानिक आने वाले दिनों में प्रकृति के लिए वरदान बता रहे हैं. जानकारी के अनुसार भारत में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजाति की संख्या 1327 है. झारखंड में भी तितलियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ौतरी हुई है.

आम तौर पर कर्नाटना, महाराष्ट्र, केरल जैसे दक्षिण के राज्य व मणिपुर, असम, मेघालय, त्रिपुरा जैसे उत्तर-पूर्व राज्यों में पाये जाने वाले सफ्फुज्ड स्नो फ्लैट (Suffused Snow flat) प्रजाति की तितली कोल्हान के जंगलों में पायी गयी है. इसे शंख जिरानी के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ ही तितलियों के सबसे बड़े आकार के प्रजाति ब्लू मोर्मन (Blue Morman) तितली भी बड़े पैमाने में मिल रही है. इस बार ग्रासलैंड, वुडलैंड, पायनियर, ब्लू जे, ब्लू मोर्मन, साउथ बर्डविंग, ट्री निम्फ, अंडमान क्रो प्रजाति की तितलियों की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ौतरी देखी जा रही है. सेंट्रल सिल्क बोर्ड के खरसावां स्थित बीएसएमटीसी के प्रभारी (वैज्ञानिक -बी) डॉ तिरुपम रेड्डी ने सफ्फुज्ड स्नो फ्लैट को अपने कैमरे में कैद किये हैं.
Also Read: मोमेंटम झारखंड के तीन साल बाद भी कोल्हान में उद्योगों की स्थापना की क्या है जमीनी हकीकत, पढ़िए ये रिपोर्टडॉ तिरुपम रेड्डी बताते हैं कि तितलियां पर्यावरण का सबसे अच्छा इंडिकेटर होती हैं. पर्यावरण इंडिकेटर तितलियां आने वाले समय में अच्छी स्थितियों की ओर इशारा कर रही हैं. उनका कहना है कि इस बार तितलियों की ऐसी प्रजातियां भी देखी गई हैं जो लंबे समय से प्रदूषण के कारण विलुप्त चल रही थीं. तितलियां पोलीनेशन के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं. ये एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक ज़रूरी तत्वों को पहुंचाने का काम करती हैं. इनकी तादाद बढ़ने का अर्थ है कि इस बार पर्यावरण को काफी फायदा हुआ है. लिहाजा इनकी संख्या बढ़ना पर्यावरण के साथ ही सभी जीव-जंतुओं के लिए भी लाभदायक साबित होगा.

लॉकडाउन के बाद वायु प्रदूषण में कमी आने से इस बार तितलियों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है. सबसे ज्यादा फायदा सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां बंद होने से हुआ है क्योंकि पेट्रोल में भारी मेटल होते हैं और जब गाड़ियां चलती है तो हेवी मेटल पॉल्युशन होता है. ये हेवी मेटल रस पैदा करने वाले पौधों के तनों पर जम जाते हैं और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाते हैं. इसका सीधा-सीधा असर तितलियों की संख्या पर पड़ता है क्योंकि तितलियां उन पौधों पर ही निर्भर होती हैं.
Posted By : Guru Swarup Mishra
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